Rented House Vastu : आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में बेहतर आजीविका, उच्च शिक्षा, नौकरी और व्यापार के सिलसिले में बड़ी संख्या में लोग अपने पैतृक घर को छोड़कर दूसरे शहरों में किराए के मकान में जीवन व्यतीत करते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह गलत धारणा होती है कि वास्तु शास्त्र के सिद्धांत और नियम केवल स्वयं के स्वामित्व वाले स्थाई मकान पर ही प्रभावी होते हैं। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।
आप जिस भी स्थान पर निवास करते हैं, वहां का वातावरण और ऊर्जा आपके जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। किराए के घर में भी कुछ बेहद सरल और आसान वास्तु उपायों को अपनाकर जीवन में अटूट सुख-शांति, मानसिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखा जा सकता है। इन उपायों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनके लिए आपको मकान में किसी भी प्रकार के बड़े बदलाव, निर्माण कार्य या तोड़फोड़ की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। केवल दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों में सुधार करके आप अपने परिवार की बरकत और उन्नति के मार्ग खोल सकते हैं।
स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा का अटूट संबंध, कबाड़ हटाने से दूर होगा मानसिक तनाव
वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों में पूर्ण स्वच्छता और पवित्रता को सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा और मुख्य आधार माना गया है। किसी भी किराए के घर में अपना सामान शिफ्ट करने या रहने से पहले पूरे परिसर की कोने-कोने से अच्छी तरह डीप क्लीनिंग (साफ-सफाई) करना अत्यंत आवश्यक और कल्याणकारी माना जाता है। घर के भीतर कभी भी अनुपयोगी, बेकार, कबाड़ और टूटी-फूटी चीजों को अनावश्यक रूप से जमा करके नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार, घर में बिखरा हुआ सामान, अव्यवस्था और धूल-मिट्टी नकारात्मक ऊर्जा (नेगेटिविटी) को तेजी से बढ़ाती हैं। इसके दुष्प्रभाव से परिवार के सदस्यों में अकारण मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और गंभीर आर्थिक तंगहाली या परेशानियां जन्म लेने लगती हैं। इसलिए घर को हमेशा सुव्यवस्थित रखें।
मुख्य द्वार की पवित्रता और प्रकाश व्यवस्था, शुभ प्रतीकों से आकर्षित होगी लक्ष्मी
वास्तु विज्ञान के अनुसार, किसी भी मकान का मुख्य प्रवेश द्वार (मेन गेट) ब्रह्मांडीय ऊर्जा और प्राणवायु के प्रवेश का सबसे मुख्य स्रोत माना जाता है। इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा अत्यंत साफ-सुथरा, सुंदर और बाधा रहित रखना चाहिए। मुख्य दरवाजे के ठीक बाहर या ऊपर सिंदूर अथवा अष्टगंध से स्वास्तिक, पवित्र ॐ (ओम) या ‘शुभ-लाभ’ जैसे मांगलिक और शुभ चिन्ह अंकित करना बेहद शुभ माना जाता है। यह नकारात्मक शक्तियों को घर में प्रवेश करने से रोकता है। इसके अतिरिक्त, इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि मुख्य दरवाजे के पास अंधेरा न रहे; वहां शाम के समय पर्याप्त रोशनी और चमकदार प्रकाश की व्यवस्था होना अनिवार्य बताया गया है ताकि सकारात्मकता और मां लक्ष्मी का आगमन सुगमता से हो सके।
ईशान कोण में स्थापित करें ईश्वर का दरबार, सही दिशा में पूजा से मिलेगी आत्मिक शांति
किराए के छोटे या सीमित स्थान वाले घरों में भी एक छोटा सा, सुंदर और पवित्र पूजा स्थान अवश्य बनाना चाहिए, क्योंकि यह पूरे घर के वातावरण को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध रखने में रीढ़ की हड्डी का काम करता है। वास्तु शास्त्र के कड़े नियमों के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ‘ईशान कोण’ को देवताओं का स्थान माना गया है, इसलिए इसी दिशा में पूजा घर या मंदिर स्थापित करना सर्वश्रेष्ठ होता है। यदि जगह की कमी के कारण ऐसा संभव न हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा का चयन करें। ईश्वर की आराधना, मंत्र जाप या आरती करते समय साधक का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और प्रार्थना सीधे ईश्वर तक पहुंचती है।
सोने की सही दिशा से सुधरेगा स्वास्थ्य, उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से बचें
मानव स्वास्थ्य और मानसिक शांति का हमारी सोने की दिशा से बहुत गहरा और वैज्ञानिक संबंध है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, शयनकक्ष (बेडरूम) में सोते समय व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण (South) या पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं में सिर रखकर सोने से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का शरीर पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है, गहरी नींद आती है और सुबह उठने पर मानसिक शांति व नई ऊर्जा का अहसास होता है। इसके विपरीत, भूलकर भी कभी उत्तर (North) दिशा में सिर रखकर नहीं सोना चाहिए, क्योंकि इससे चुंबकीय खिंचाव के कारण सिरदर्द, बुरे सपने और स्वास्थ्य संबंधी अन्य गंभीर विकार उत्पन्न होने का खतरा रहता है।
रसोईघर में अग्नि और जल का अद्भुत संतुलन, टपकते नलों को तुरंत कराएं ठीक
किराए के मकानों में अक्सर रसोईघर (किचन) की दिशा को बदल पाना किराएदार के हाथ में नहीं होता है, लेकिन उसकी आंतरिक व्यवस्था को संतुलित रखकर दोषों को पूरी तरह कम किया जा सकता है। रसोई को हमेशा साफ और जूठे बर्तनों से मुक्त रखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रसोई में जलते हुए गैस चूल्हे (अग्नि तत्व) के बिल्कुल समीप या सटाकर पानी से भरे बर्तन, मटका या एक्वागार्ड (जल तत्व) रखने से बचना चाहिए। वास्तु के नियमानुसार, अग्नि और जल परस्पर विरोधी तत्व हैं, इसलिए इनके बीच पर्याप्त दूरी या संतुलन होना अनिवार्य है, अन्यथा घर में कलह की स्थिति बनती है। साथ ही, घर के किसी भी हिस्से में टपकते हुए नल या पानी के रिसाव (लीकेज) को तुरंत ठीक करवाना चाहिए, क्योंकि बहता पानी सीधे तौर पर धन के अपव्यय और आर्थिक नुकसान का प्रतीक माना जाता है।
इंडोर प्लांट्स और पवित्र तुलसी का चमत्कार, कांटेदार पौधों से घर में बढ़ती है कड़वाहट
घर के भीतर प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली को शामिल करने से न केवल आंखों को सुकून मिलता है, बल्कि इससे प्राणवायु और सकारात्मक ऊर्जा का स्तर भी कई गुना बढ़ जाता है। अपने किराए के घर की बालकनी, खिड़की या लॉबी में छोटे-छोटे सुंदर और जीवंत हरे पौधे (इंडोर प्लांट्स) अवश्य लगाने चाहिए। सनातन परंपरा में पूजनीय तुलसी का पौधा घर में रखना विशेष रूप से परम कल्याणकारी और शुभ फल देने वाला माना गया है। तुलसी का पौधा घर के वातावरण को पूरी तरह से कीटाणुमुक्त, शुद्ध और शांत बनाए रखता है। हालांकि, वास्तु के नियमों के अनुसार, कैक्टस या किसी भी प्रकार के कांटेदार और दूध निकालने वाले पौधों को घर के अंदर या मुख्य द्वार पर रखने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि ये आपसी रिश्तों में कड़वाहट और प्रगति में रुकावट पैदा करते हैं।
