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G7 Summit 2026 : फ्रेंच आल्प्स की वादियों में मोदी-ट्रंप की रणनीतिक मुलाकात, पूरी दुनिया की टिकी नजरें!

G7 Summit 2026

G7 Summit 2026 : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बहुत जल्द एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित मुलाकात होने जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही यह द्विपक्षीय वार्ता न तो भारत में होगी और न ही अमेरिका की धरती पर, बल्कि इसके लिए फ्रांस को चुना गया है। दरअसल, आगामी जून महीने में फ्रांस दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के समूह जी-7 (G-7) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। हाल ही में सामने आई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की पुष्टि कर दी है। दूसरी तरफ, भारत को भी इस खास बैठक के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है, जिसके चलते पीएम मोदी का फ्रांस जाना तय है।

व्हाइट हाउस के बाद फ्रांस में फिर आमने-सामने होंगे दोनों नेता

राजनयिक गलियारों में इस मुलाकात को लेकर इसलिए भी ज्यादा उत्सुकता है क्योंकि दोनों नेताओं के बीच हाल ही में एक बेहद सफल मुलाकात हो चुकी है। इससे पहले 13 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका का आधिकारिक दौरा किया था, जहां व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बेहद गर्मजोशी भरी रणनीतिक बैठक हुई थी। अब लगभग सवा साल बाद एक बार फिर वैश्विक मंच पर इन दोनों वैश्विक नेताओं की सीधी मुलाकात होने जा रही है। इस बैठक में भारत-अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों, वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने जैसे कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

जानिए किस तारीख और कहां होने जा रही है जी-7 की बैठक?

इस साल फ्रांस के पास जी-7 शिखर सम्मेलन की प्रतिष्ठित अध्यक्षता है और इसके आयोजन स्थल के लिए बेहद खूबसूरत लोकेशन को चुना गया है। साल 2026 की यह जी-7 देशों की वार्षिक उच्च स्तरीय बैठक फ्रांसीसी आल्प्स के सुरम्य इलाके एवियन-लेस-बेंस (Evian-les-Bains) में आयोजित की जाएगी। यह महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन 15 जून से शुरू होकर 17 जून तक लगातार तीन दिनों तक चलेगा। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी रेखांकित किया गया है कि फ्रांस में होने जा रही जी-7 की यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 80वें जन्मदिन के ठीक अगले दिन शुरू हो रही है, जिससे अमेरिकी दल के लिए यह दौरा और भी खास बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर बनेगी आम सहमति

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सीमा पार अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने पर रहेगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस जी-7 बैठक के दौरान किसी बड़े वास्तविक या औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद कम है। इस बैठक का प्राथमिक और मूल उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों पर सभी सदस्य देशों के बीच एक मजबूत आम सहमति बनाना है, ताकि भविष्य में होने वाले समझौतों की मजबूत आधारशिला रखी जा सके। इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिडिल ईस्ट के एजेंडे पर भी बातचीत की संभावना है, लेकिन ट्रंप का जोर मुख्य रूप से वैश्विक व्यापार नीतियों पर रहेगा।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को दिया था विशेष निमंत्रण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फ्रांस दौरे की पुष्टि काफी पहले ही हो चुकी थी। मार्च 2026 में भारत में स्थित फ्रांसीसी दूतावास ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी थी कि पीएम मोदी इस वैश्विक शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। दरअसल, इसके पीछे की पृष्ठभूमि फरवरी महीने में ही तैयार हो गई थी, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी 2026 तक भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आए थे। अपनी इसी द्विपक्षीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन में विशेष भागीदार के रूप में शामिल होने का व्यक्तिगत रूप से न्योता दिया था, जिसे भारत ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

क्या है जी-7 समूह और कौन से देश हैं इसके सदस्य?

आम जनता के लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि जी-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) आखिर क्या है। यह दुनिया की सात सबसे विकसित, समृद्ध और प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का एक बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय मंच है। इस खास वैश्विक समूह में दुनिया के सात दिग्गज देश शामिल हैं, जिनके नाम हैं- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा। इन सात देशों के अलावा, यूरोपीय संघ (European Union) भी इस समूह की सभी आधिकारिक बैठकों और चर्चाओं में स्थायी रूप से भाग लेता है। यद्यपि भारत इस समूह का परमानेंट सदस्य नहीं है, लेकिन इसकी बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक ताकत को देखते हुए इसे लगातार विशेष आमंत्रित देश के तौर पर बुलाया जाता रहा है।

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