Lok Sabha Seat Increase : भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। संसद का आगामी बजट सत्र, जो 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित होने वाला है, देश की लोकतांत्रिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव का गवाह बन सकता है। इस विशेष तीन दिवसीय सत्र के दौरान केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना है, बल्कि देश की बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप जनप्रतिनिधियों की संख्या में भी विस्तार करना है।
16 से 18 अप्रैल: संसद का विशेष 3 दिवसीय सत्र
सरकार ने अप्रैल के मध्य में संसद का तीन दिवसीय सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। हालांकि यह सत्र छोटा है, लेकिन इसका एजेंडा बेहद व्यापक और दूरगामी परिणामों वाला है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की प्रबल चर्चा है कि सरकार इस दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में कुछ तकनीकी और संवैधानिक संशोधनों को मंजूरी दिलाना चाहती है। इस सत्र की रणनीतिक महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि यह सीधे तौर पर आगामी चुनावों और देश के भविष्य की प्रशासनिक रूपरेखा को प्रभावित करेगा।
लोकसभा सीटों में 50% वृद्धि का ऐतिहासिक प्रस्ताव
वर्तमान में भारतीय लोकसभा में कुल 543 निर्वाचित सीटें हैं, जो दशकों पुरानी जनगणना के आधार पर निर्धारित हैं। सरकार की नई योजना के अनुसार, इन सीटों की संख्या में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव है। यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो निचले सदन में सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। सीटों के इस विस्तार को देश की जनसंख्या और मतदाताओं की संख्या में हुई भारी वृद्धि के साथ संतुलन बैठाने की एक अनिवार्य प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
महिलाओं के लिए 273 सीटों का आरक्षण: एक नया युग
प्रस्तावित संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिला प्रतिनिधित्व है। 816 सीटों की नई व्यवस्था में से लगभग एक-तिहाई हिस्सा यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह ‘नारी शक्ति’ को भारतीय लोकतंत्र के शीर्ष सदन में नेतृत्वकारी भूमिका प्रदान करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा। अब तक महिलाओं की भागीदारी प्रतीकात्मक स्तर पर रही है, लेकिन इस कानून के प्रभावी होने के बाद भारतीय संसद का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा और महिलाओं की आवाज नीति-निर्माण में निर्णायक होगी।
परिसीमन की शर्त से मुक्त होगा महिला आरक्षण कोटा
सरकार का मुख्य उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ की जटिलताओं को दूर करना है। वर्तमान कानून के अनुसार, महिला आरक्षण को लागू करने के लिए अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया का इंतजार करना अनिवार्य था। प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से सरकार महिलाओं के लिए तय इस कोटे को परिसीमन की लंबी प्रक्रिया से अलग करना चाहती है। इसका सीधा मतलब यह है कि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए अब दशकों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और इसे जल्द से जल्द अमली जामा पहनाया जा सकेगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सुधार की जरूरत
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को साल 2023 में संसद के दोनों सदनों द्वारा भारी बहुमत से पारित किया गया था। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में परिसीमन की शर्त एक बड़ी बाधा मानी जा रही थी। विपक्ष और कई नागरिक संगठनों ने भी मांग की थी कि महिलाओं को अधिकार देने में देरी नहीं होनी चाहिए। अब सरकार इस संशोधन विधेयक के जरिए उन कानूनी अड़चनों को दूर करने जा रही है, जिससे 33% आरक्षण का सपना हकीकत में बदल सके। यह सत्र भारतीय राजनीति में महिलाओं के वर्चस्व को स्थापित करने वाला मील का पत्थर साबित होगा।
