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Petrol Diesel Excise Duty : मोदी सरकार का बड़ा फैसला, एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को दी महंगाई से भारी राहत

Petrol Diesel Excise Duty

Petrol Diesel Excise Duty :  अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते युद्ध और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में भारी कटौती का ऐलान किया है। सरकारी आदेश के मुताबिक, पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर मात्र 3 रुपये कर दिया गया है। वहीं, डीजल के मोर्चे पर सरकार ने और भी कड़ा फैसला लेते हुए उत्पाद शुल्क को 10 रुपये से घटाकर शून्य (0 रुपये) कर दिया है।

Petrol Diesel Excise Duty :होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी: वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट

सरकार का यह निर्णय वर्तमान अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रेरित है। ईरान ने युद्ध के दबाव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नाकाबंदी कर दी है, जो दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्ग माना जाता है। युद्ध से पहले, वैश्विक समुद्री मार्ग से होने वाले कुल कच्चे तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता था। प्रतिदिन लगभग 20 से 25 मिलियन बैरल तेल और 10 अरब घन फुट गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इस मार्ग के बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, जिसके असर को कम करने के लिए भारत ने अपनी कर नीतियों में बदलाव किया है।

Petrol Diesel Excise Duty :एविएशन सेक्टर पर दबाव: एटीएफ पर लागू हुई स्पेशल एक्साइज ड्यूटी

ईंधन के मोर्चे पर जहां आम जनता को राहत देने की कोशिश की गई है, वहीं विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) के लिए खबर थोड़ी चिंताजनक है। मोदी सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत एटीएफ पर 50 रुपये प्रति लीटर टैक्स निर्धारित किया गया था, लेकिन विभिन्न छूटों के बाद इसकी प्रभावी दर 29.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। जानकारों का मानना है कि टैक्स की इस नई दर से एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ जाएगी, जिसका सीधा बोझ हवाई यात्रियों की जेब पर बढ़ते टिकट किराए के रूप में पड़ सकता है

तेल कंपनियों को संजीवनी: विंडफॉल टैक्स खत्म और अन्य रियायतें

घरेलू तेल शोधन और उत्पादन कंपनियों के लिए सरकार ने राहत का पिटारा खोला है। सरकार ने वर्ष 2022 में लागू किए गए ‘विंडफॉल टैक्स’ को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर भी कई प्रकार के शुल्कों से छूट दी गई है। डीजल पर निर्यात शुल्क की दर 18.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जबकि पेट्रोल पर इसे शून्य रखा गया है। ये सभी क्रांतिकारी बदलाव 26 मार्च 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जिससे घरेलू तेल कंपनियों की बैलेंस शीट को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

क्या आम आदमी को मिलेगा सस्ता तेल? कीमतों का गणित समझें

एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पेट्रोल पंपों पर तेल सस्ता होगा? इसका जवाब थोड़ा जटिल है। विशेषज्ञों और सूत्रों के अनुसार, पंपों पर कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की संभावना कम है। इसका मुख्य कारण भारतीय तेल कंपनियों को होने वाला भारी घाटा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है, जिससे कंपनियां प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर लगभग 48.8 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। सरकार द्वारा दी गई 10 रुपये तक की टैक्स राहत का उपयोग कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए करेंगी, ताकि आपूर्ति श्रृंखला सुचारू बनी रहे।

युद्ध के साये में भारत की सधी हुई आर्थिक रणनीति

2026 का यह समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परीक्षा की घड़ी है। एक तरफ वैश्विक युद्ध की विभीषिका है और दूसरी तरफ घरेलू महंगाई का दबाव। सरकार ने उत्पाद शुल्क घटाकर कंपनियों को दिवालिया होने से बचाया है और कीमतों को और अधिक बढ़ने से रोकने की कोशिश की है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, 26 मार्च से लागू हुए ये नियम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

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