Israel Iran War: मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल ने ईरान के नए नेतृत्व को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह लेने वाला कोई भी नेता इजरायल के निशाने पर होगा। काट्ज के अनुसार, जो भी नया लीडर इजरायल के विनाश की बात करेगा या स्वतंत्र दुनिया और क्षेत्रीय देशों के लिए खतरा पैदा करेगा, उसका “खात्मा” इजरायल का प्राथमिक लक्ष्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुश्मन चाहे किसी भी नाम से जाना जाए या दुनिया के किसी भी कोने में छिपा हो, इजरायल उसे ढूंढ निकालने की क्षमता रखता है।
Israel Iran War: अमेरिकी सहयोग और ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने का संकल्प
रक्षा मंत्री काट्ज ने अपने बयान में न केवल व्यक्तिगत लक्ष्यों की बात की, बल्कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि इजरायल अपने अमेरिकी सहयोगियों के साथ मिलकर ईरानी सरकार की सैन्य और प्रशासनिक काबिलियत को पूरी तरह नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है। इजरायल का उद्देश्य ऐसे हालात पैदा करना है जिससे ईरानी जनता स्वयं इस शासन को उखाड़ फेंके। काट्ज ने स्पष्ट किया कि इजरायल का अगला मिशन उस व्यवस्था को समाप्त करना है जो जुल्म और धमकियों के आधार पर टिकी है।
Israel Iran War: मोजतबा खामेनेई का चयन: विरासत या मजबूरी?
ईरान में मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किए जाने की आधिकारिक घोषणा ने दुनिया को चौंका दिया है। शनिवार को तेहरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों की मौत के बाद यह पद खाली हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, ‘विशेषज्ञ सभा’ (Assembly of Experts) ने मोजतबा के नाम पर मुहर लगा दी है। हालांकि, युद्ध की विभीषण परिस्थितियों के कारण यह चयन पूर्ण बैठक के बजाय आभासी (Virtual) माध्यमों और आंतरिक परामर्श के जरिए किया गया है।
IRGC का दबाव और वंशानुगत सत्ता का विवाद
ईरान इंटरनेशनल की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के पीछे शक्तिशाली ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) का भारी दबाव था। दिलचस्प बात यह है कि ईरान का इस्लामी गणराज्य ऐतिहासिक रूप से खुद को वंशानुगत राजतंत्र (Monarchy) के खिलाफ एक वैचारिक विकल्प मानता रहा है। ऐसे में पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च पद पर बैठना ईरान के अपने ही क्रांतिकारी सिद्धांतों पर सवालिया निशान खड़े करता है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम ईरान की वैचारिक नींव को कमजोर कर सकता है, क्योंकि वहां सत्ता हस्तांतरण कभी भी पारिवारिक विरासत के आधार पर नहीं रहा है।
तेहरान में मातम और अनिश्चितता का माहौल
सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की याद में तेहरान में बुधवार रात से तीन दिवसीय शोक सभा का आयोजन शुरू हो गया है। ईरानी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ के मुताबिक, हजारों लोग तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में एकत्रित होकर अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक (अंतिम संस्कार) करने की सटीक तारीख और स्थान का अभी खुलासा नहीं किया गया है। पूरे ईरान में इस समय तनावपूर्ण शांति है, जबकि सीमा पर युद्ध की लपटें तेज होती जा रही हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा
मोजतबा के सत्ता संभालने और इजरायल की सीधी धमकी के बाद अब मध्य पूर्व में टकराव के एक नए और अधिक हिंसक चरण की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका और इजरायल की जुगलबंदी ने तेहरान के रणनीतिक चक्रव्यूह को तोड़ दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया ईरानी नेतृत्व इजरायल की इस सीधी चुनौती का सामना किस प्रकार करता है और क्या यह बदलाव क्षेत्र को संपूर्ण युद्ध की ओर धकेलेगा या किसी नए कूटनीतिक मोड़ पर ले जाएगा।
