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Stock Market Crash: शेयर बाजार में ‘ब्लैक मंडे’, सेंसेक्स 2743 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

Stock Market Crash

Stock Market Crash: ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष ने आज भारतीय शेयर बाजार की नींव हिला दी है। सोमवार की सुबह जैसे ही ट्रेडिंग की शुरुआत हुई, दलाल स्ट्रीट पर चारों ओर केवल बिकवाली का शोर सुनाई दिया। स्क्रीन पर लाल निशानों के बीच निवेशकों के चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती थी। युद्ध की इस आग ने न केवल सेंसेक्स और निफ्टी को गोता लगाने पर मजबूर किया, बल्कि आम जनता के मन में महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता का नया डर भी पैदा कर दिया है। यह एक ऐसी सुबह थी जब छोटे से लेकर बड़े निवेशक की नजरें केवल युद्ध की ताजा खबरों और अपने तेजी से गिरते पोर्टफोलियो पर टिकी हुई थीं।

Stock Market Crash: बाजार की ऐतिहासिक गिरावट: निवेशकों के डूबे खरबों रुपये

सोमवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी डरावने सपने से कम साबित नहीं हुआ। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 2743 अंकों की भारी गिरावट के साथ 78,543 के स्तर पर खुला। इस गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में पल भर में खरबों रुपये का नुकसान हो गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 519 अंक लुढ़ककर 24,659 पर खुला। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी अपनी चमक खोते हुए 91 के स्तर पर पहुँच गया, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

Stock Market Crash: वैश्विक तनाव का असर: सुरक्षित निवेश की ओर भागे निवेशक

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में पैदा हुई भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। इसका असर न केवल भारत में, बल्कि अमेरिकी बाजारों और एशिया के अन्य बड़े इंडेक्स जैसे जापान के निक्केई (Nikkei) पर भी साफ दिखा। अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशकों ने जोखिम भरे इक्विटी शेयरों से अपना पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों (Safe Havens) में लगाना शुरू कर दिया है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।

कच्चे तेल में 7% का उबाल: महंगाई बढ़ने की बढ़ी आशंका

ईरान और इजरायल के सैन्य संघर्ष का सबसे सीधा और घातक असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 7.60 प्रतिशत बढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों ने आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ा दी है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल का महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँचना आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत को बढ़ा सकता है, जिससे सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार: विकास दर और GST के आंकड़े

बाजार में मची इस अफरा-तफरी के बीच भारत के आर्थिक आंकड़े उम्मीद की एक किरण जगाते हैं। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.4 प्रतिशत से बेहतर है। इसके अलावा, फरवरी का GST कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो देश की मजबूत आंतरिक मांग और प्रभावी कर प्रबंधन को दर्शाता है। ये आंकड़े साबित करते हैं कि वैश्विक झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति काफी ठोस है और वह इस संकट से उबरने की क्षमता रखती है।

विशेषज्ञों की सलाह: डरें नहीं, धैर्य के साथ पोर्टफोलियो की समीक्षा करें

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में निवेशकों को घबराहट (Panic) में आकर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। बिना सोचे-समझे शेयरों को बेचने के बजाय यह समय धैर्य रखने और अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का है। आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व के हालातों और वैश्विक कूटनीतिक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में बने रहें और बाजार में आने वाले हर बड़े उतार-चढ़ाव को सावधानी से परखें।

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