PM Modi Diplomatic Milestone: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। अपनी इजरायल यात्रा के दौरान, उन्होंने इजरायली संसद जिसे ‘नेसेट’ (Knesset) के नाम से जाना जाता है, को संबोधित किया। इस संबोधन के बाद उन्हें एक ऐसे दुर्लभ सम्मान से नवाजा गया है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम राजनेताओं के हिस्से आता है। प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल के प्रतिष्ठित ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया है, जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों का जीवंत प्रमाण है।
PM Modi Diplomatic Milestone: अमीर ओहाना द्वारा प्रदान किया गया ऐतिहासिक सम्मान
इजरायली संसद के गौरवशाली हॉल में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान, नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को यह प्रतिष्ठित पदक भेंट किया। यह क्षण न केवल प्रधानमंत्री के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय रहा। स्पीकर अमीर ओहाना ने इस दौरान पीएम मोदी के विजन और उनकी कार्यशैली की जमकर सराहना की। यह सम्मान समारोह उस अटूट विश्वास को दर्शाता है जो इजरायल ने भारत के नेतृत्व के प्रति व्यक्त किया है। पदक प्रदान करते समय सदन में मौजूद सदस्यों ने करतल ध्वनि से प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
PM Modi Diplomatic Milestone: असाधारण नेतृत्व और भारत-इजरायल संबंधों की नई ऊंचाई
यह पदक प्रधानमंत्री मोदी को उनके उस ‘असाधारण नेतृत्व’ के लिए प्रदान किया गया है, जिसने पिछले एक दशक में भारत और इजरायल के रिश्तों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। कृषि, रक्षा, तकनीक और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच जो तालमेल आज देखने को मिलता है, उसकी नींव पीएम मोदी के दूरदर्शी फैसलों ने रखी है। इजरायल सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों ने न केवल दो सरकारों को, बल्कि दोनों देशों की जनता को भी एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भारी वृद्धि हुई है।
इतिहास में दर्ज हुआ नाम: यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले नेता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम इस सम्मान के साथ एक बड़ा विश्व रिकॉर्ड भी जुड़ गया है। वे ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले विदेशी नेता बन गए हैं। इससे पहले यह पदक किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को प्रदान नहीं किया गया था। इस उपलब्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक मंच पर भारत की आवाज अब पहले से कहीं अधिक बुलंद और प्रभावशाली है। प्रधानमंत्री ने इस पदक को स्वीकार करते हुए विनम्रता दिखाई और इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर, भारत के 140 करोड़ नागरिकों और दोनों देशों की चिरस्थायी मित्रता को समर्पित किया।
अटूट दोस्ती और भविष्य की साझा रणनीतियां
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और इजरायल की दोस्ती केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि साझा मूल्यों और साझा चुनौतियों पर आधारित है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई से लेकर नवाचार (Innovation) के क्षेत्र में सहयोग तक की बात की। पीएम मोदी ने कहा कि यह पदक उन लाखों लोगों की मेहनत का परिणाम है जो पर्दे के पीछे रहकर दोनों देशों के विकास के लिए काम कर रहे हैं। 2026 तक के इस कालखंड में, भारत-इजरायल संबंध एक रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़कर एक भरोसेमंद पारिवारिक रिश्ते की तरह विकसित हो चुके हैं, जो आने वाले दशकों तक वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान देंगे।
