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Mukul Roy passed away: पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, शोक में डूबा राजनीतिक जगत

Mukul Roy passed away

Mukul Roy passed away: पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता मुकुल रॉय का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। 71 वर्षीय रॉय ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में रविवार देर रात करीब 1:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए बताया कि उनके पिता का निधन कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण हुआ है। वे पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे और अस्पताल में उपचाराधीन थे।

Mukul Roy passed away: ममता बनर्जी के सिपहसालार और राजनीति के ‘चाणक्य’

मुकुल रॉय को केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की सत्ता संरचना के एक कुशल वास्तुकार के रूप में जाना जाता था। उन्हें बंगाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाता था, क्योंकि वे चुनावी समीकरणों और सांगठनिक कौशल में माहिर थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वे बेहद करीबी माने जाते थे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना से लेकर उसे सत्ता के शिखर तक पहुँचाने में मुकुल रॉय की भूमिका निर्णायक रही थी। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना निकट भविष्य में कठिन होगा।

Mukul Roy passed away: भाजपा और टीएमसी के बीच का राजनीतिक सफर

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव और चौंकाने वाले फैसलों से भरा रहा। साल 2017 में उन्होंने ममता बनर्जी के साथ अपने दशकों पुराने वैचारिक मतभेदों के चलते तृणमूल कांग्रेस से दूरी बना ली थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था। भाजपा में रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वे कृष्णनगर उत्तर सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। हालांकि, चुनाव परिणामों के कुछ ही समय बाद जून 2021 में, उन्होंने एक बार फिर घर वापसी की और अपनी पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।

केंद्रीय राजनीति में प्रभाव और रेल मंत्रालय का अनुभव

मुकुल रॉय का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं था। उन्होंने केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे संप्रग (UPA) सरकार के दौरान केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रहे और कुछ समय के लिए रेल मंत्रालय का स्वतंत्र कार्यभार भी संभाला। प्रशासनिक कार्यों पर उनकी पकड़ और जटिल मुद्दों को सुलझाने की उनकी क्षमता ने उन्हें दिल्ली के गलियारों में भी एक सम्मानित नाम बनाया था। वे अपनी सादगी और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे जुड़ाव के लिए लोकप्रिय थे।

एक युग का अवसान और राजनीतिक जगत में शोक

मुकुल रॉय के निधन की खबर फैलते ही बंगाल सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सांगठनिक कौशल को याद किया है। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहाँ समर्थक और नेता उन्हें विदा देंगे। मुकुल रॉय का जाना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि उन तमाम कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी क्षति है, जिन्होंने उनके मार्गदर्शन में राजनीति की बारीकियां सीखीं।

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