कर्णम मल्लेश्वरी 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) में कांस्य पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला ओलंपियन बनीं। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 240 किग्रा (110 किग्रा स्नैच और 130 किग्रा क्लीन एंड जर्क) भार उठाकर इतिहास रचा। यह जीत न केवल उनके करियर की, बल्कि भारतीय खेल इतिहास की एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। हालांकि उन्होंने स्वर्ण पदक नहीं जीता, लेकिन महिला खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक पदक की राह उन्होंने जरूर खोल दी।
क्या उन्होंने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता?
बहुत से लोगों में भ्रम है कि कर्णम मल्लेश्वरी ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने कांस्य पदक जीता था, जो उस समय अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि इससे पहले किसी भी भारतीय महिला ने ओलंपिक में पदक नहीं जीता था। यह जीत महिला एथलीटों के लिए प्रेरणा बनी और भारत में महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने का नया आत्मविश्वास मिला।
कर्णम मल्लेश्वरी का जीवन और संघर्ष
कर्णम आंध्र प्रदेश से थीं और एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बनाया। उन्होंने कम उम्र में ही भारोत्तोलन में रुचि ली और जल्द ही कोचों की नजरों में आ गईं। वर्षों की मेहनत और कठिन अभ्यास के बाद, उन्होंने 2000 में वह ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेलों में महिलाओं की भूमिका को सशक्त किया।
भारत में महिला खिलाड़ियों की प्रेरणा
कर्णम मल्लेश्वरी की जीत के बाद भारत में कई महिला खिलाड़ियों ने ओलंपिक में भाग लिया और सफलता भी हासिल की। उनकी उपलब्धि ने एक मिसाल कायम की और सरकार व खेल संघों को महिला खिलाड़ियों के समर्थन में आगे आने को प्रेरित किया। मल्लेश्वरी को पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो उनकी मेहनत और योगदान को दर्शाता है। वे आज भी युवतियों के लिए आदर्श बनी हुई हैं।
स्वर्ण पदक विजेता कौन हैं?
अब तक किसी भारतीय महिला ने मुख्य ओलंपिक (Olympics) में व्यक्तिगत रूप से स्वर्ण पदक नहीं जीता है। हालांकि, अवनि लेखरा ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर यह गौरव प्राप्त किया है। इसलिए तकनीकी रूप से अवनि लेखरा ओलंपिक (पैरा ओलंपिक भी ओलंपिक परिवार का हिस्सा है) में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं।
