भूकंप का अधिकेंद्र (Epicenter) वह स्थान होता है जो भूकंप के झटकों का धरातल पर सबसे पहला और तीव्र अनुभव करता है। यह स्थान पृथ्वी की सतह पर उस बिंदु के ठीक ऊपर होता है, जहां अंदर (फोकस या Hypocenter) चट्टानों के टूटने से ऊर्जा मुक्त होती है। अधिकेंद्र वह जगह होती है जहां भूकंप के झटके सबसे अधिक प्रभावी होते हैं और नुकसान की संभावना अधिक होती है। इसलिए अधिकेंद्र का पता लगाना आपदा प्रबंधन के लिए बहुत आवश्यक होता है।
टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि
भूकंप मुख्यतः टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियों के कारण आते हैं। ये प्लेटें पृथ्वी की ऊपरी सतह पर तैरती रहती हैं और जब ये एक-दूसरे से टकराती, खिसकती या अलग होती हैं तो ऊर्जा का संकेंद्रण होता है। यह ऊर्जा जब एक झटके के रूप में बाहर आती है तो भूकंप होता है। अधिकतर टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं महाद्वीपीय क्षेत्रों के पास होती हैं, इसलिए भूकंप का अधिकेंद्र भी वहीं बनता है। हिमालय, जापान, इंडोनेशिया जैसे क्षेत्रों में ये घटनाएं अधिक होती हैं।
महाद्वीपीय सीमाओं पर तनाव अधिक
महाद्वीपों की सतह पर मौजूद प्लेट सीमाओं पर निरंतर तनाव और दबाव बना रहता है। यह तनाव तब उत्पन्न होता है जब प्लेटें वर्षों तक धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर धकेली जाती हैं। जब यह तनाव सहनसीमा से अधिक हो जाता है, तब चट्टानें टूटती हैं और ऊर्जा बाहर आती है, जिससे भूकंप उत्पन्न होता है। इसीलिए अधिकेंद्र अक्सर इन्हीं महाद्वीपीय सीमाओं पर ही देखा जाता है। यह भूगर्भीय प्रक्रिया धीमी लेकिन अत्यधिक शक्तिशाली होती है।
समुद्रों में भी होते हैं भूकंप, लेकिन कम प्रभावी
हालांकि भूकंप समुद्रों के नीचे भी होते हैं, जिन्हें समुद्री भूकंप (Submarine Earthquakes) कहा जाता है, लेकिन इनके अधिकेंद्र ज्यादातर गहराई में होते हैं। समुद्र के भीतर ऊर्जा का फैलाव जल के माध्यम से होता है, जिससे उसकी तीव्रता भूमि की अपेक्षा कम प्रतीत होती है। हालांकि, कभी-कभी यही समुद्री भूकंप सुनामी का कारण बनते हैं। लेकिन सामान्यतः, जनसंख्या और निर्माण अधिक महाद्वीपों पर होते हैं, इसलिए वहां के भूकंप अधिक चर्चित और घातक माने जाते हैं।
अधिकेंद्र निर्धारण और विज्ञान की भूमिका
आज के वैज्ञानिक उपकरण जैसे सिस्मोग्राफ भूकंप का केंद्र और अधिकेंद्र दोनों को पहचानने में सक्षम हैं। महाद्वीपों पर उपकरणों की उपलब्धता और जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण वहां के भूकंप अधिक दर्ज किए जाते हैं। इसके अलावा, महाद्वीपों में पाई जाने वाली दरारें, भ्रंश रेखाएं (Fault Lines) और पहाड़ी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए हमें महाद्वीपीय भूकंपों की तैयारी और चेतावनी तंत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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