UNGA 2026 : संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखा। उन्होंने शरीफ के भाषण में लगाए गए आरोपों और आतंकवाद से जुड़े पाकिस्तान के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
9/11 की बरसी के बाद पाकिस्तान पर उठाए सवाल
पेटल गहलोत ने अपने बयान की शुरुआत 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी के संदर्भ से की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान ऐसे समय आए हैं, जब दुनिया ने कुछ ही दिन पहले न्यूयॉर्क में हुए उस भीषण आतंकवादी हमले को याद किया था। उन्होंने इस संदर्भ में पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का मुद्दा उठाया।
पाकिस्तानी सैन्य अकादमी के पास ओसामा का ठिकाना
भारतीय राजनयिक ने कहा कि 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना की प्रमुख सैन्य अकादमी के बेहद करीब रह रहा था। उन्होंने इस तथ्य को पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी दावों के संदर्भ में उठाया। पेटल गहलोत ने कहा कि जिस देश से आज लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों पर बातें सुनी गईं, उसके अपने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठते हैं।
पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी निशाना
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों को लेकर किए जाने वाले दावों और जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने पाकिस्तान की सत्ता संरचना में सेना की भूमिका का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए।
27वें संशोधन और इम्युनिटी का किया उल्लेख
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस संशोधन और संबंधित प्रावधानों से पाकिस्तान की वास्तविक सत्ता संरचना को समझने में मदद मिलती है। गहलोत ने सैन्य नेतृत्व को दी गई कथित आजीवन कानूनी सुरक्षा का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के लोकतांत्रिक दावों पर सवाल उठाए।
धार्मिक असहिष्णुता पर पाकिस्तान को घेरा
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिस शासन की ओर से धार्मिक सहिष्णुता और मानवाधिकारों पर टिप्पणी की गई, वहां अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों का जिक्र करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता व्यक्त की।
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दावों पर सवाल
गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सुरक्षा और शांति की बातें की जाती हैं, लेकिन भारत लंबे समय से उस पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाता रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के बयानों के साथ-साथ उसके कथित आतंकवाद रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह टिप्पणी सीधे तौर पर पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी दावों पर केंद्रित थी।
जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख
कश्मीर के मुद्दे पर भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत का पुराना रुख दोहराया। गहलोत ने कहा कि यदि कश्मीर पर चर्चा करनी है तो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का उठाया मुद्दा
पेटल गहलोत ने विशेष रूप से रावलकोट का उल्लेख करते हुए वहां के लोगों के सामने कथित चुनौतियों का सवाल उठाया। उन्होंने अंधाधुंध हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों का जिक्र किया। इस तरह भारत ने UNGA के मंच पर पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी आरोपों का जवाब देते हुए पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर की स्थिति को भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा में लाने की कोशिश की।
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