RSS on NRC : विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और जनगणना को लेकर जारी चर्चा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने देशभर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) लागू करने की मांग दोहराई है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि देश में कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। उनके मुताबिक नागरिकों की पहचान देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
वोटर लिस्ट में गलत नामों की पहचान जरूरी
सुनील आंबेकर ने कहा कि यदि गैर-नागरिकों के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची में शामिल हैं, तो उनकी पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने और ऐसे लोगों की पहचान NRC के माध्यम से किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर आपत्ति होने पर मौजूदा कानूनी प्रक्रियाओं और अदालतों के माध्यम से समाधान का रास्ता खुला है।
CAA के पात्र लोगों का भी किया जिक्र
RSS नेता ने पड़ोसी देशों से भारत आए उन लोगों का उल्लेख किया, जो CAA के तहत नागरिकता के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में रह गए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों के उत्पीड़न के मुद्दे पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार पात्र लोगों को नागरिकता देने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर विचार जरूरी है।
जनसंख्या बदलाव को विभाजन से जोड़ा
आंबेकर ने जनसंख्या में बदलाव के मुद्दे को भारत के इतिहास और 1947 के विभाजन से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन धर्म और जनसंख्या के आधार पर हुआ था, इसलिए जनसंख्या संतुलन का विषय महत्वपूर्ण है। उन्होंने जनसांख्यिकीय बदलाव को राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि संस्कृति की रक्षा की चर्चा को केवल सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। ये उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचार हैं।
कानूनों में समानता की बात
RSS प्रचार प्रमुख ने विवाह से जुड़े अलग-अलग कानूनी प्रावधानों, संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 तथा स्थानीय निकाय चुनावों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कानूनों में समानता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।
अवैध प्रवास पर पुरानी नीति का मुद्दा
आंबेकर ने अवैध प्रवास के मुद्दे पर पिछली नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने 1983 के Illegal Migrants (Determination by Tribunals) Act का उल्लेख किया। यह कानून असम में अवैध प्रवासियों की पहचान से संबंधित था और सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में इसे असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था।
RSS पहले भी NRC की मांग कर चुका है
देशभर में NRC लागू करने की मांग RSS की ओर से पहले भी उठती रही है। 2019 में तत्कालीन RSS महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा था कि भारतीय नागरिक नहीं होने वाले लोगों की पहचान के लिए NRC तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है। 2019-20 में CAA और प्रस्तावित NRC को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
2024 के बाद NRC पर सरकारी स्थिति
NRC को लेकर राजनीतिक बहस के बावजूद देशभर में NRC लागू करने की कोई नई सरकारी अधिसूचना वर्तमान में जारी नहीं हुई है। दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद NRC पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए BJP के घोषणापत्र में भी NRC को शामिल नहीं किया गया था।
जनगणना के साथ फिर चर्चा में आया NRC
जनगणना की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के साथ NRC का मुद्दा फिर चर्चा में आया है। मौजूदा जनगणना प्रश्नावली में नागरिकता, माता-पिता की जानकारी, आधार और वोटर ID जैसे विषयों से जुड़े सवाल शामिल हैं, जिनमें कुछ सवाल पहले NPR से संबंधित प्रक्रिया में भी मौजूद थे। कानूनी ढांचे के तहत जनसंख्या रजिस्टर के सत्यापन के आधार पर भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करने का प्रावधान मौजूद है।
अभी देशभर में NRC की अधिसूचना नहीं
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से देशभर में NRC लागू करने को लेकर कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। 2021 की जनगणना के साथ NPR की प्रक्रिया प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना टल गई थी। बाद में जनगणना प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, लेकिन NPR के लिए अलग नई अधिसूचना जारी नहीं हुई। ऐसे में RSS की मांग और देश में NRC लागू करने की वास्तविक सरकारी प्रक्रिया फिलहाल अलग-अलग विषय हैं।
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