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How to Become Loco Pilot : भारतीय रेलवे में लोको पायलट कैसे बनें, जानिए जरूरी योग्यता और पूरी चयन प्रक्रिया

How to Become Loco Pilot

How to Become Loco Pilot : भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा माना जाता है और इसमें सरकारी नौकरी पाने का सपना हर साल लाखों युवा देखते हैं। रेलवे के विभिन्न पदों में से ‘लोको पायलट’ (ट्रेन ड्राइवर) का पद सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले और सम्मानजनक पदों में से एक माना जाता है। हजारों यात्रियों और करोड़ों रुपये की संपत्ति से लदी ट्रेन को पूरी सुरक्षा के साथ गंतव्य तक पहुंचाने का जिम्मा लोको पायलट के मजबूत कंधों पर होता है। यही कारण है कि रेलवे प्रशासन में इस पद को अत्यधिक जिम्मेदारी वाला माना गया है। यदि आप भी कक्षा 12वीं या 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद रेलवे के इस रोमांचक क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा के विभिन्न चरणों और ट्रेनिंग के नियमों को विस्तार से समझना होगा।

असिस्टेंट लोको पायलट से होती है शुरुआत

लोको पायलट मुख्य रूप से वह तकनीकी रेल कर्मचारी होता है जो इंजन रूम में बैठकर पूरी ट्रेन का संचालन करता है। उसका प्राथमिक काम यह सुनिश्चित करना है कि ट्रेन रेलवे के कड़े नियमों, ट्रैकों के सिग्नलों और सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन करते हुए निर्धारित गति सीमा के भीतर समय पर चले। सफर के दौरान आने वाली किसी भी अप्रत्याशित या आपातकालीन स्थिति में तुरंत सटीक निर्णय लेने और यात्रियों की जान-माल की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। भारतीय रेलवे में सीधे लोको पायलट के पद पर भर्ती नहीं होती, बल्कि करियर की शुरुआत ‘असिस्टेंट लोको पायलट’ (ALP) के रूप में होती है। इसके बाद कार्य के अनुभव, वरिष्ठता और समय-समय पर होने वाली विभागीय पदोन्नति परीक्षाओं को पास करके कर्मचारी सीनियर लोको पायलट और पावर कंट्रोलर जैसे उच्च पदों तक का सफर तय करता है।

आवश्यक शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के नियमों के अनुसार, इस तकनीकी पद के लिए केवल सामान्य स्कूली शिक्षा पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड से 10वीं या 12वीं (विज्ञान संकाय) पास होना तो जरूरी है ही, लेकिन इसके साथ ही उसके पास एक वैध तकनीकी सर्टिफिकेट होना भी अनिवार्य है। इसके लिए छात्र के पास संबंधित ट्रेड में आईटीआई (ITI) का सर्टिफिकेट या फिर इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा होना आवश्यक है। मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से पढ़ाई करने वाले युवाओं को इस भर्ती में प्राथमिकता मिलती है। जो छात्र मैट्रिक के बाद सीधे तकनीकी कोर्स कर लेते हैं, वे भी इस पद के लिए पूर्णतः पात्र माने जाते हैं।

चार कड़े चरणों में होती है परीक्षा

असिस्टेंट लोको पायलट बनने के लिए उम्मीदवारों को रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा को पास करना होता है। यह चयन प्रक्रिया मुख्य रूप से चार कठिन चरणों में विभाजित होती है:

  • प्रथम चरण (CBT-1): यह एक कंप्यूटर आधारित प्रारंभिक परीक्षा होती है, जिसमें मुख्य रूप से सामान्य गणित, तार्किक क्षमता (रीजनिंग), सामान्य विज्ञान और करंट अफेयर्स से जुड़े वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • द्वितीय चरण (CBT-2): पहले चरण को पास करने वाले अभ्यर्थियों को इस मुख्य परीक्षा में बैठना होता है। इसमें सामान्य ज्ञान के साथ-साथ उम्मीदवार के चुने हुए तकनीकी विषय (इंजीनियरिंग ट्रेड) से संबंधित अत्यंत गहरे सवाल पूछे जाते हैं।

  • तृतीय चरण (CBAT): दोनों लिखित परीक्षाओं में बाजी मारने वाले मेधावी छात्रों को ‘कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट’ यानी साइको टेस्ट के लिए आमंत्रित किया जाता है, जो उनकी मानसिक सतर्कता की जांच करता है।

  • अंतिम चरण (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल): इसके बाद सभी मूल दस्तावेजों की जांच की जाती है और सबसे अंत में रेलवे के डॉक्टरों द्वारा एक बेहद कड़ा मेडिकल टेस्ट लिया जाता है। आयु सीमा की बात करें तो सामान्य वर्ग के लिए यह 18 से 28 वर्ष के बीच है, जबकि आरक्षित श्रेणियों को उम्र में सरकारी नियमानुसार छूट मिलती है।

चयन के बाद जोनल सेंटरों में ट्रेनिंग

परीक्षा के सभी चरणों को सफलतापूर्वक पास करने के बाद चयनित उम्मीदवारों को सीधे मुख्य ट्रैक पर ट्रेन चलाने की अनुमति नहीं मिलती है। सबसे पहले उन्हें असिस्टेंट लोको पायलट के रूप में नियुक्त करके रेलवे के अत्याधुनिक जोनल ट्रेनिंग सेंटरों (Zonal Training Centers) में भेजा जाता है। वहां उन्हें कई महीनों तक कड़ी तकनीकी, व्यावहारिक और परिचालन संबंधी स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है। इस प्रशिक्षण अवधि को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, इन नए ड्राइवरों को फील्ड में भेजा जाता है, जहां वे कई सालों तक एक अनुभवी और वरिष्ठ लोको पायलट की कड़े दिशा-निर्देशन और निगरानी में सहायक के तौर पर काम करते हुए वास्तविक ट्रेन संचालन का जमीनी अनुभव हासिल करते हैं। चूंकि यह नौकरी अत्यधिक मानसिक दबाव वाली है, इसलिए इसमें शारीरिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होने के साथ-साथ आंखों की रोशनी का शत-प्रतिशत ( बिना चश्मे के) होना अनिवार्य शर्त है।

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