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US Trade War: भारत समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लगाएगा अमेरिका! वैश्विक बाजार में मचेगा हड़कंप

US Trade War

US Trade War:  वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। एक तरफ जहां भारत और अमेरिका ने आपसी आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौता फ्रेमवर्क (Interim Trade Agreement Framework) तैयार कर लेने की आधिकारिक घोषणा की है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन ने वैश्विक बाजार में एक नया टैरिफ बम फोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत भारत सहित दुनिया के दर्जनों बड़े व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% या उससे अधिक का अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की बात कही गई है। इस कड़े कदम के पीछे वाशिंगटन ने तर्क दिया है कि इन देशों से अमेरिका आने वाले कुछ सामानों के निर्माण में जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है, जिससे वैश्विक व्यापार के नियमों का उल्लंघन होता है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की आधिकारिक रिपोर्ट

बुधवार, 3 जून 2026 की सुबह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से जारी एक व्यापक रिपोर्ट में इस नीतिगत बदलाव की रूपरेखा साझा की गई है। इस आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा, मेक्सिको, ताइवान, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) और कुछ अन्य सहयोगी देशों से आने वाले सामानों पर 10% का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इन देशों पर आरोप है कि इन्होंने जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंधों को अपने यहाँ कड़ाई से लागू नहीं किया। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में भारत के साथ-साथ चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे आर्थिक रूप से सुदृढ़ देशों को और अधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन देशों से आने वाले सामानों पर 12.5% का भारी-भरकम अतिरिक्त आयात शुल्क थोपने की योजना तैयार की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है।

अमेरिकी कामगारों के हितों की दुहाई

इस बड़े आर्थिक फैसले को सही ठहराते हुए यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के राजदूत जैमिसन ग्रीयर ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट बयान जारी किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “हमारे सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक व्यापारिक भागीदार देशों का जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में पूरी तरह विफल रहना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस विफलता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ऐसी असमान और अनुचित स्थिति पैदा होती है, जहां हमारे अमेरिकी कामगारों को वैश्विक स्तर पर एकतरफा और नुकसानदेह प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो उनके आर्थिक अधिकारों का हनन है।”

भविष्य की रणनीति पर जोर

राजदूत जैमिसन ग्रीयर ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की शुद्धता पर जोर देते हुए आगे कहा, “हमारे जितने भी व्यापारिक पार्टनर देश हैं, उन सभी को अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक कड़े तथा प्रभावी कदम उठाने होंगे कि वैश्विक व्यापार अनजाने में भी दुनिया के किसी कोने में जबरन मजदूरी या बंधुआ श्रम को बढ़ावा न दे और न ही ऐसी प्रणालियों को मजबूत करे।” हालांकि, व्यापारिक जगत और भारतीय निर्यातकों के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि ये नए और भारी-भरकम टैरिफ तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किए जा रहे हैं। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन शुल्कों को अंतिम रूप से धरातल पर उतारने से पहले आम जनता, उद्योग जगत और संबंधित हितधारकों की राय ली जाएगी। इस सार्वजनिक परामर्श के बाद प्रस्ताव की व्यापक समीक्षा की जाएगी, जिसके आधार पर ही भविष्य की अंतिम रूपरेखा तय होगी।

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