TN Politics: तमिलनाडु के कद्दावर नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से विदाई लेने का पूरा मन बना लिया है। सियासी गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, अन्नामलाई ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया है। इसके तुरंत बाद उन्होंने देश के गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी छोड़ने के अपने मुख्य कारणों को साझा किया।
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि अन्नामलाई अब भाजपा से अलग होकर अपनी खुद की एक नई क्षेत्रीय पार्टी की शुरुआत कर सकते हैं। एनडीटीवी से बातचीत में एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि अन्नामलाई को पिछले कुछ समय से यह महसूस होने लगा था कि भाजपा के वर्तमान ढांचे में उनके लिए आगे बढ़ने के कोई खास अवसर और भविष्य नहीं बचा है। इसके बाद उन्होंने साल 2021 में शुरू हुए अपने इस सफर को एक सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण विदाई देने का फैसला किया।
‘एन मन, एन मक्कल’ यात्रा से उभरा था नेतृत्व
अन्नामलाई के राजनीतिक जीवन में उनकी राज्यव्यापी पदयात्रा “एन मन, एन मक्कल (मेरी भूमि, मेरे लोग)” को एक मील का पत्थर माना जाता है। इस ऐतिहासिक यात्रा का शुभारंभ खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 28 जुलाई, 2023 को किया था। लगभग 200 दिनों तक चली इस विशाल पदयात्रा के माध्यम से अन्नामलाई ने तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया था। इस यात्रा का भव्य समापन 28 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशाल जन संबोधन के साथ हुआ था। उस दौर में किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि इतनी लोकप्रियता हासिल करने वाले नेता का भाजपा में सफर इतनी जल्दी समाप्त हो जाएगा। दिल्ली पहुंचे अन्नामलाई ने आलाकमान के सामने पार्टी से अलग होने की इच्छा जताई है।
नई राजनीतिक पार्टी का गठन
महज 41 वर्ष की आयु में राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले अन्नामलाई के बारे में चर्चा है कि वे जल्द ही नए दल की घोषणा करेंगे। वर्तमान में वे “वी द लीडर्स” नाम की एक सामाजिक संस्था का संचालन कर रहे हैं, जिसे विशेषज्ञों द्वारा उनकी भविष्य की राजनीतिक पार्टी का आधार माना जा रहा है। खाकी वर्दी का त्याग कर राजनीति में आए अन्नामलाई की नेतृत्व क्षमता को पहचानकर भाजपा ने उन्हें बहुत कम समय में बड़ी जिम्मेदारियां दी थीं। हालांकि, अब उन्होंने अपनी राहें जुदा कर ली हैं। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि उनकी नई सियासी पारी भी पूरी तरह से हिंदुत्व और प्रखर राष्ट्रवाद की विचारधारा पर ही आधारित होगी, जिससे वैचारिक रूप से भाजपा को कोई बड़ा कूटनीतिक नुकसान नहीं पहुंचेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली थी प्रेरणा
साल 2020 में कर्नाटक कैडर के इस तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी ने यह घोषणा करते हुए अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों और देश के प्रति उनके दृष्टिकोण से बेहद प्रेरित हैं। राजनीति में कदम रखने के कुछ ही हफ्तों के भीतर भाजपा ने उन्हें तमिलनाडु का राज्य उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया और इसके ठीक एक साल बाद वे प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने में सफल रहे। उनकी 200 दिनों की पदयात्रा ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक बेहद आक्रामक और मुखर चेहरे के रूप में स्थापित किया, जो सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) सरकार की नीतियों पर जमकर और सीधे प्रहार करते थे।
वोट प्रतिशत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अन्नामलाई की आक्रामक कार्यशैली का सबसे बड़ा लाभ भाजपा को साल 2024 के लोकसभा चुनावों में देखने को मिला। जहां 2019 के चुनावों में भाजपा को तमिलनाडु में महज 3.66 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 11 फीसदी तक पहुंच गया। इसके बावजूद, क्षेत्रीय द्रविड़ पार्टियों के साथ चुनावी गठबंधन के मुद्दे पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। भाजपा का एक बड़ा धड़ा राज्य में आगे बढ़ने के लिए एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ गठबंधन को अनिवार्य मानता था, जबकि अन्नामलाई का दृढ़ विश्वास था कि पार्टी को अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी चाहिए।
एआईएडीएमके की शर्त ने बदला समीकरण
अन्नामलाई द्वारा दिवंगत नेता जयललिता और द्रविड़ विचारधारा के दिग्गजों के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणियों के कारण एआईएडीएमके बेहद नाराज हो गई थी, जिसके चलते पुराना गठबंधन टूट गया था। लेकिन 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों की जमीनी हकीकत को देखते हुए भाजपा ने एआईएडीएमके के साथ दोबारा गठबंधन कर लिया। इस नए समझौते के लिए एआईएडीएमके ने अन्नामलाई को हटाने की कड़ी शर्त रखी थी। परिणाम स्वरूप, भाजपा ने अन्नामलाई को अध्यक्ष पद से मुक्त करते हुए उनके स्थान पर नैनार नागेंद्रन को नया प्रदेश प्रमुख नियुक्त कर दिया, जिसने अंततः अन्नामलाई को पार्टी से बाहर का रास्ता चुनने पर मजबूर कर दिया।
