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Iran US conflict 2026 : ईरान-ओमान पर अमेरिकी धमकियों से भड़का तेहरान, इजरायली हमलों में 11 लेबनानी नागरिकों की मौत

Iran US conflict 2026

Iran US conflict 2026 : ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने देश के संप्रभु इलाकों पर हुए अमेरिकी हमलों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने 28 मई की सुबह ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र बंदर अब्बास और उसके आस-पास के इलाकों को निशाना बनाकर की गई अमेरिकी सैन्य आक्रामकता की कड़े शब्दों में भर्त्सना की। गुरुवार को राजधानी तेहरान में जारी एक आधिकारिक बयान में बाकाई ने साफ तौर पर कहा कि वाशिंगटन द्वारा की गई यह हिंसक सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के नियमों, स्थापित वैश्विक कानूनों और संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के मूलभूत सिद्धांतों का खुला और घोर उल्लंघन है।

उन्होंने वैश्विक शांति के लिए जिम्मेदार संस्था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। बाकाई ने कहा कि सुरक्षा परिषद को अब अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए और इस अवैध सैन्य हमले के लिए अमेरिकी हमलावरों को वैश्विक मंच पर जवाबदेह ठहराना चाहिए।

फारस की खाड़ी में युद्धविराम का उल्लंघन

ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्षेत्र में लगातार बढ़ती अशांति के लिए सीधे तौर पर अमेरिकी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। बाकाई ने इस बात पर विशेष रूप से प्रकाश डाला कि अमेरिका ने इससे पहले 9 अप्रैल को हुए युद्धविराम समझौते का बार-बार और लगातार उल्लंघन किया है। उन्होंने फारस की खाड़ी के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाजों पर हाल के दिनों में हुए संदिग्ध हमलों और दक्षिणी ईरान के रिहायशी व सैन्य ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों का सिलसिलेवार हवाला दिया। ईरान का मानना है कि इन अमेरिकी हरकतों की वजह से मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के इस बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और युद्ध जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं।

ओमान को ‘उड़ा देने’ की ट्रंप की धमकी की निंदा

ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक और कड़े उपाय करने का पूर्ण अधिकार रखता है और इसके लिए वह पूरी तरह संकल्पित है। इसके साथ ही, बाकाई ने ईरान और मध्य पूर्व के अन्य पड़ोसी देशों के खिलाफ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लगातार दी जा रही सैन्य धमकियों और भड़काऊ बयानबाजी की तीखी आलोचना की।

उन्होंने इस दौरान ओमान के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ओमान को यह धमकी दी थी कि अगर उसने वैश्विक व्यापार के लिए अहम ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खुला नहीं रखा, तो अमेरिका ओमान को “उड़ा देगा”। ईरान ने इस धमकी की निंदा करते हुए कहा कि ओमान संयुक्त राष्ट्र का एक सम्मानित सदस्य देश है, जिसने हमेशा क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और कूटनीतिक मध्यस्थता में एक बेहद रचनात्मक, प्रभावी और जिम्मेदार भूमिका निभाई है।

वैश्विक मंच पर अमेरिकी दादागिरी की आलोचना

ईरानी राजनयिक बाकाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ इस तरह की खुलेआम धमकियां देना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के उस मूलभूत सिद्धांत का सीधे तौर पर उल्लंघन है, जो बल के प्रयोग या किसी भी तरह की सैन्य धमकी को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका का यह अड़ियल रुख दुनिया को एक खतरनाक दिशा में ले जा रहा है। बाकाई के अनुसार, महाशक्तियों द्वारा की जा रही ऐसी बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में “अराजकता, मनमानी और दादागिरी के सामान्यीकरण” की ओर एक बेहद खतरनाक प्रवृत्ति का संकेत देती है, जिससे वैश्विक स्तर पर छोटे और शांतिप्रिय देशों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

लेबनान में इजरायल की भीषण बमबारी

मध्य पूर्व के इस तनाव के बीच लेबनान से भी एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि देश के दक्षिणी हिस्से में इजरायली वायुसेना द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों में दो मासूम बच्चों सहित कम से कम 11 बेगुनाह नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, सिदोन शहर की एक बहुमंजिला आवासीय इमारत पर हुए इजरायली हमले में दो महिलाओं सहित पांच नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, एक अन्य दुखद घटना में, सिदोन जिले के ही अदलून कस्बे में इजरायली विमानों ने एक चलती गाड़ी को निशाना बनाया। इस हवाई हमले में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार दो मासूम बच्चे, उनकी मां और उनके पिता सहित एक ही परिवार के छह लोग मौके पर ही शहीद हो गए।

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