US Iran Deal: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी भीषण सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘न्यूज कॉर्प’ और ‘न्यूयार्क टाइम्स’ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपने सबसे आक्रामक रुख से पीछे हटते हुए उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के विशाल भंडार को छोड़ने के लिए पूरी तरह सहमत हो गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम (970 पाउंड) संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। वैश्विक रक्षा विशेषज्ञ तेहरान के इस अप्रत्याशित कदम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़क कूटनीति के आगे ईरान का बड़ा सरेंडर मान रहे हैं, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध के बादल छंटने की उम्मीद जगी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही होगी बहाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, चौतरफा प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाई के डर से घिरे ईरान ने आखिरकार वाशिंगटन के आगे घुटने टेक दिए हैं। वह अपने इस संवेदनशील यूरेनियम भंडार को किसी सुरक्षित तीसरे पक्ष या अमेरिका को सौंपने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है, जिसका आधिकारिक ऐलान किसी भी वक्त किया जा सकता है। राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक कदम से दोनों परमाणु शक्तियों के बीच सालों पुराना टकराव हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। इसके साथ ही, वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य () में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सामान्य और सुरक्षित आवाजाही को दोबारा बहाल करने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने की पुष्टि, सौंपने की प्रक्रिया पर औपचारिक हस्ताक्षर होना बाकी
वाशिंगटन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने इस कूटनीतिक प्रगति की पुष्टि करते हुए कहा है कि तेहरान ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह युद्ध टालने के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम के सबसे विवादित हिस्से पर समझौता करने को तैयार है। हालांकि, इस भारी मात्रा में मौजूद यूरेनियम को किस सुरक्षित तंत्र और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत स्थानांतरित या नष्ट किया जाएगा, इसके बारीक तकनीकी ब्लूप्रिंट को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडलों के बीच इस मसौदे पर अंतिम दौर की चर्चा चल रही है और औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद ही इस पूरी सौंपने की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा।
ट्रंप की सख्त सैन्य चेतावनी के बाद बातचीत की मेज पर आया तेहरान
उल्लेखनीय है कि उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का यह मुद्दा हमेशा से ही वाशिंगटन और इजरायल की मुख्य मांगों की सूची में शीर्ष पर रहा है। शुरुआत में ईरान इस विषय को शांति वार्ता के पहले चरण में शामिल करने के सख्त खिलाफ था और इसे भविष्य की चर्चाओं के लिए टालना चाहता था। लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तेहरान वार्ता के शुरुआती चरण में ही यूरेनियम भंडार पर लिखित प्रतिबद्धता नहीं दिखाता, तो अमेरिका शांति वार्ता को तुरंत छोड़कर दोबारा बड़े पैमाने पर विनाशकारी सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा।
बंकर बस्टर हमलों और इजरायल-अमेरिका संयुक्त कमांडो ऑपरेशन की थी तैयारी
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अमेरिकी सेना () ने हाल के दिनों में ईरान के सभी प्रमुख परमाणु ठिकानों को हवाई हमलों के जरिए पूरी तरह नष्ट करने का एक फुलप्रूफ प्लान तैयार कर लिया था। इस सीक्रेट सैन्य योजना में ईरान के इस्फहान स्थित अत्यंत सुरक्षित भूमिगत परमाणु केंद्रों पर भारी ‘बंकर बस्टर’ बमों से हमला करना और अमेरिका-इजरायल के विशेष मरीन कमांडो द्वारा संयुक्त जमीनी ऑपरेशन चलाना शामिल था। हालांकि, इन आक्रामक सैन्य योजनाओं को अंतिम मंजूरी मिलने से ठीक पहले ही ईरान ने अपने पैर पीछे खींच लिए और समझौते का रास्ता चुनना ही बेहतर समझा।
60 प्रतिशत तक संवर्धित है ईरान का यूरेनियम, इजरायल ने जताया था परमाणु बम का खतरा
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी () की हालिया क्लोज्ड-डोर रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद यह यूरेनियम भंडार बेहद खतरनाक स्तर पर है, क्योंकि इसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है। परमाणु वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस 60% संवर्धित यूरेनियम को थोड़ा और रिफाइन किया जाए, तो इससे बहुत ही कम समय में कई घातक परमाणु हथियार (एटम बम) तैयार किए जा सकते हैं। इसी गंभीर वैश्विक खतरे को भांपते हुए इजरायल लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा कर रहा था कि ईरान परमाणु शक्ति बनने के बिल्कुल करीब है। इसी खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अमेरिका और उसके पश्चिमी मित्र देश लगातार ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बना रहे थे।
साल 2015 के ओबामा मॉडल की तर्ज पर रूस को सौंपा जा सकता है यूरेनियम भंडार
इस महासमझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए पर्दे के पीछे एक और कूटनीतिक प्रस्ताव पर काम चल रहा है। इसके तहत, ईरान अपने कुल यूरेनियम भंडार को सुरक्षा गारंटी के साथ रूस को सौंप सकता है। यह हूबहू वैसा ही मॉडल है, जिसे साल 2015 के ऐतिहासिक ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ () परमाणु समझौते के दौरान अपनाया गया था, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम कसी गई थी। इस मॉडल के तहत रूस इस संवर्धित सामग्री को अपने पास सुरक्षित रखेगा ताकि ईरान इसका उपयोग हथियार बनाने में न कर सके।
डोनाल्ड ट्रंप ने किया बड़ा दावा, कहा—शांति समझौता अब केवल अंतिम चरण में
इस वैश्विक घटनाक्रम पर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से एक बड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने मीडिया के सामने दावा किया कि मध्य पूर्व में जारी इस लंबे सैन्य संघर्ष को स्थाई रूप से समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच समझौता लगभग 100% तय हो चुका है। राष्ट्रपति ने कहा, “अब केवल कुछ अंतिम शर्तों, तकनीकी पहलुओं और कानूनी शब्दों पर चर्चा होना बाकी है।” डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी प्रस्तावित व्यवस्था को वैश्विक शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक ‘समझौता ज्ञापन’ () करार दिया है, जो आने वाले दशकों के लिए दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करेगा।
अगले 30 से 60 दिनों के भीतर शुरू होगी नए सिरे से व्यापक परमाणु वार्ता
उच्च कूटनीतिक सूत्रों से लीक हुए मसौदा समझौते के मुताबिक, इस आगामी शांति दस्तावेज में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे पहले दोनों देशों के बीच जारी छद्म युद्ध की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की जाएगी। इसके तुरंत बाद ईरान द्वारा ब्लॉक किए गए होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। समझौते के लागू होने के अगले 30 से 60 दिनों के भीतर, अमेरिका, यूरोपीय संघ और ईरान के बीच तेहरान के संपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए असैन्य (शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए) बनाए रखने के लिए एक नए और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
28 फरवरी के भीषण हमलों के बाद अप्रैल से लागू था अस्थाई युद्धविराम
गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए भारी हवाई हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था और वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह हिल गया था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अप्रैल महीने से एक अस्थाई युद्धविराम (सीजफायर) लागू है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद संवेदनशील और विस्फोटक बने हुए थे। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस व्यापक परमाणु समझौते को तभी पूरी तरह मानेगा, जब अमेरिका उस पर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाएगा और विदेशी बैंकों में फ्रीज (जमा) पड़ी उसकी अरबों डॉलर की राष्ट्रीय संपत्तियों तक उसकी पहुंच को दोबारा बहाल करेगा।
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