Kakoli Ghosh Resignation : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें और आंतरिक कलह लगातार गहराती जा रही है। तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बढ़ते भ्रष्टाचार, सामाजिक अन्याय और प्रशासनिक अपारदर्शिता को लेकर आम जनता के बीच पनपी गहरी चिंताओं का स्पष्ट हवाला देते हुए टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष (Barasat Organizational District President) के पद से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मचा दी है।
नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की: खराब चुनावी प्रदर्शन पर पार्टी नेतृत्व को घेरा
पार्टी लीडरशिप को भेजे गए अपने आधिकारिक त्यागपत्र में चार बार की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य के भीतर हाल के दिनों में जो अप्रिय घटनाक्रम और विवाद सामने आए हैं, उन्होंने आम जनमानस के मन में पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सांसद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि शीर्ष नेतृत्व इन बुनियादी सवालों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल नहीं कर सकता।
राजनीति में शुचिता, पारदर्शिता, जवाबदेही, अनुशासन और वैचारिक प्रतिबद्धता के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने माना कि हालिया विधानसभा चुनावों में जिले के भीतर पार्टी का निराशाजनक प्रदर्शन असल में जनता के आक्रोश और मूड को दर्शाता है, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए वे पद छोड़ रही हैं।
पुराने वफादारों को सम्मान देने की वकालत: वफादारी के बदले मिला पद से हटाने का इनाम
वरिष्ठ टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन को मजबूत करने की सलाह देते हुए शीर्ष नेतृत्व से आग्रह किया है कि पार्टी के पुराने, अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में लाकर उचित महत्व दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि एक मजबूत और स्वच्छ संगठनात्मक ढांचा ही पार्टी की धूमिल हो चुकी छवि को सुधारने और जमीनी स्तर के पुराने समर्थकों के साथ दोबारा जुड़ने में मददगार साबित हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि इस इस्तीफे से ठीक पहले काकोली घोष को लोकसभा के चीफ विजिलेंस ऑफिसर के महत्वपूर्ण पद से अचानक हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा था कि उन्हें ‘चार दशकों की वफादारी का यह अनोखा इनाम मिला है।’ इसके तुरंत बाद उनके आवास के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने से कयासबाजी का दौर शुरू हो गया, जिसके बीच रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने अपने इस्तीफे का औपचारिक ऐलान कर दिया।
नए नेताओं पर फूटा गुस्सा: ‘शहद इकट्ठा करने आए’ नेताओं की विलासिता पर उठाए सवाल
सांसद ने पार्टी के भीतर पनपे नए और चाटुकार नेतृत्व के खिलाफ अपना तीखा आक्रोश जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा, “साल 2011 में सत्ता आने के बाद जो लोग सिर्फ शहद इकट्ठा करने (मलाई चाटने) के इरादे से पार्टी में शामिल हुए हैं, वे आज फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर जो अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के कुछ नेताओं के जीवन में जो बेतहाशा शान-शौकत, विलासिता और अपारदर्शिता आई है, वे उसके साथ कभी तालमेल नहीं बिठा सकतीं क्योंकि वे खुद एक बेहद साधारण मध्यमवर्गीय जीवन जीती हैं।
ममता बनर्जी की ‘वोट चोरी’ थ्योरी खारिज: ‘हार की असली वजह भ्रष्टाचार और अहंकार है’
रविवार को जहां एक तरफ ममता बनर्जी फेसबुक लाइव पर आकर यह दावा कर रही थीं कि बीजेपी केवल वोट चुराकर और धांधली करके चुनाव जीती है, वहीं उनकी ही अपनी वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में सच्चाई स्वीकार करते हुए कहा, “वास्तविकता यह है कि धरातल पर भारी करप्शन और बेईमानी हुई है। पार्टी के कई जमीनी नेता और पदाधिकारी घमंडी हो चुके हैं, जिसे जागरूक जनता कभी स्वीकार नहीं करती। आम लोग अब अच्छी तरह समझ चुके हैं कि लोकतंत्र में आप अपनी मर्जी से जो चाहें वो नहीं कर सकते, जनता सब देख रही है।”
टीएमसी की अंदरूनी कलह आई सामने: कुणाल घोष ने साधी चुप्पी, टिप्पणी से किया इनकार
काकोली घोष दस्तीदार के इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे और बगावती तेवरों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान को छुपाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम और विवाद के संबंध में जब टीएमसी के वरिष्ठ प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद नपे-तुले अंदाज में कहा कि यह पूरी तरह से पार्टी का अंदरूनी और घरेलू मामला है। उन्होंने कहा कि सांसद ने औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया है या नहीं, इस विषय पर वे फिलहाल कोई भी सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे और जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उचित समझेगा, तब इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी कर मीडिया को सूचित कर दिया जाएगा।
बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी: चिकित्सा के क्षेत्र से लेकर संसद तक का सफर
राजनीति के मंच पर एक बेहद सक्रिय और प्रखर नेता होने के अतिरिक्त, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार पेशे से एक बेहद प्रतिष्ठित और अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) भी हैं। उन्होंने कोलकाता के ऐतिहासिक आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल से अपनी एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री पूरी की थी और इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए लंदन जाकर ऑब्सटेट्रिक अल्ट्रासाउंड के क्षेत्र में विशेष ट्रेनिंग हासिल की थी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और महिलाओं के अधिकारों व सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रखरता से उठाने के लिए पहचानी जाने वाली काकोली घोष, इससे पहले अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन को संभाल चुकी हैं और लोकसभा में अपनी पार्टी की चीफ व्हिप (Chief Whip) जैसी बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का भी कुशलतापूर्वक निर्वहन कर चुकी हैं।
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