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Raghav Chadha Committee : राघव चड्ढा बने राज्यसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष, सभापति ने किया पुनर्गठन

Raghav Chadha Committee

Raghav Chadha Committee : आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और युवा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को भारतीय संसद के उच्च सदन में एक बहुत बड़ी और नई संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। राघव चड्ढा को राज्यसभा की अत्यंत महत्वपूर्ण ‘पिटीशन कमेटी’ (याचिका समिति) का नया अध्यक्ष (चेयरमैन) नियुक्त किया गया है। संसदीय कार्यप्रणाली में इस समिति की भूमिका बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता और देश के नागरिकों की विभिन्न समस्याओं और उनकी याचिकाओं पर सुनवाई कर संसद के पटल पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। इस प्रतिष्ठित पद पर राघव चड्ढा की नियुक्ति को उनकी राजनीतिक और विधायी क्षमताओं की बड़ी स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया विशेष संसदीय समिति का पुनर्गठन

संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के वर्तमान सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने एक विशेष आधिकारिक आदेश जारी करते हुए इस महत्वपूर्ण याचिका समिति का नए सिरे से पुनर्गठन किया है। सभापति ने संसद के नियमों और नियमावली के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस नई समिति की संरचना को अपनी अंतिम मंजूरी दी। राघव चड्ढा के नेतृत्व में काम करने वाली इस नवनिर्मित समिति में राजनीतिक संतुलन और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए उच्च सदन के कुल 10 वरिष्ठ और अनुभवी सदस्यों (सांसदों) को शामिल किया गया है, जो देशहित से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर विचार करेंगे।

समिति में शामिल हुए देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के 10 कद्दावर सांसद

पुनर्गठित की गई इस उच्च स्तरीय याचिका समिति में अध्यक्ष राघव चड्ढा के अलावा देश के विभिन्न राजनीतिक दलों और राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई कद्दावर नेताओं को बतौर सदस्य जगह दी गई है। जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, इस प्रतिष्ठित समिति में सांसद हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल और मयंककुमार नायक को सदस्य मनोनीत किया गया है। इन सभी अनुभवी सांसदों के शामिल होने से समिति के भीतर विधायी कार्यों, संसदीय परंपराओं और कानूनी मसौदों की समीक्षा करने की क्षमता को काफी मजबूती मिलेगी, जिससे जनहित के मुद्दों का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा।

विभिन्न क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के इन प्रमुख चेहरों को भी मिली बड़ी जगह

समिति की कार्यप्रणाली को और अधिक व्यापक व समावेशी बनाने के लिए इसमें कई अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के प्रमुख चेहरों को भी शामिल किया गया है। इस कड़ी में मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुबाशीष खुंटिया, रोंगवरा नरजारी और संदोष कुमार पी. को भी इस नई याचिका समिति का आधिकारिक सदस्य नियुक्त किया गया है। यह बहुदलीय समिति देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और वर्गों की आवाज़ को संसद के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने का काम करेगी। समिति के सभी सदस्य मिलकर विभिन्न जन-याचिकाओं की गहनता से पड़ताल करेंगे।

क्या होती है संसद की याचिका समिति और इसके मुख्य वैधानिक अधिकार

संसदीय लोकतंत्र में याचिका समिति (Committee on Petitions) का इतिहास और महत्व बेहद गौरवशाली रहा है। इस समिति का मुख्य वैधानिक कार्य राज्यसभा के समक्ष देश के आम नागरिकों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली सार्वजनिक महत्व की याचिकाओं और ज्ञापनों की बारीकी से जांच करना है। जब देश का कोई भी नागरिक किसी गंभीर जनहित के मुद्दे, सरकारी नीतियों की खामियों या किसी सामाजिक समस्या को लेकर संसद में याचिका दायर करता है, तो यह समिति उस पर संबंधित मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों को समन भेजकर जवाब तलब करती है। समिति अपनी विस्तृत सिफारिशें सीधे सदन के पटल पर रखती है, जिसे सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम जनता की समस्याओं का होगा त्वरित निपटारा

राघव चड्ढा के अध्यक्ष बनने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि समिति के कामकाज में और अधिक तेजी और आधुनिकता देखने को मिलेगी। एक युवा और कानून की अच्छी समझ रखने वाले सांसद के नेतृत्व में यह समिति आम जनता की उन फाइलों और अर्जियों को तेजी से निपटाएगी जो लंबे समय से प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण धूल फांक रही थीं। नवनियुक्त अध्यक्ष राघव चड्ढा जल्द ही समिति के सभी 10 सदस्यों के साथ अपनी पहली औपचारिक बैठक करेंगे, जिसमें आगामी संसदीय सत्र के दौरान आने वाली याचिकाओं की रूपरेखा और समिति के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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