Sanjiv Arora Arrest : पंजाब की सियासत में आज उस वक्त भूचाल आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, लंबी पूछताछ और सुबह से जारी छापेमारी के बाद केंद्रीय एजेंसी ने यह कड़ा कदम उठाया है। हालांकि, ED की ओर से अभी इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन इस कार्रवाई ने पंजाब सरकार के भीतर खलबली मचा दी है। संजीव अरोड़ा की गिनती सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों में होती है, ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को विपक्ष एक बड़े हथियार के रूप में देख रहा है।
छापेमारी का घटनाक्रम: 20 गाड़ियाँ और सुरक्षा बलों का घेरा
9 मई 2026 की सुबह संजीव अरोड़ा के लिए नई मुश्किलें लेकर आई। सुबह करीब 7:25 बजे ED की एक विशाल टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास पर धमक पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 20 गाड़ियों के काफिले में अधिकारी पहुंचे थे, जिनके साथ सुरक्षा के लिए सीआईए (CIA) और स्पेशल फोर्स (SF) के तीन दर्जन से अधिक जवान तैनात थे। जांच एजेंसी ने न केवल उनके सरकारी आवास, बल्कि चंडीगढ़, गुरुग्राम और दिल्ली स्थित उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ के दफ्तरों पर भी एक साथ छापेमारी की।
तीसरी बार रेड: जांच एजेंसी के रडार पर मंत्री
यह कोई पहली बार नहीं है जब संजीव अरोड़ा जांच एजेंसियों के घेरे में आए हों। पिछले एक साल के भीतर यह उनके ठिकानों पर तीसरी बड़ी रेड है। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले एक महीने के अंदर ही यह दूसरी बार है जब ED ने उन पर शिकंजा कसा है। इससे पहले साल 2024 में लुधियाना पश्चिम के विधायक रहते हुए उन पर जमीन घोटाले के आरोप में छापा मारा गया था। वहीं, अप्रैल 2026 में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत उनके 13 अलग-अलग ठिकानों पर रेड हुई थी, जिसके बाद से ही उनकी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी।
गंभीर आरोप: 100 करोड़ का फर्जी GST बिल और मनी लॉन्ड्रिंग
कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा पर लगे आरोपों की सूची काफी लंबी और गंभीर है। उन पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी GST बिल बनाने का प्राथमिक आरोप है। जांच के अनुसार, मोबाइल फोन कारोबार के फर्जी इनवॉइस तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध रूप से दावा किया गया था। इसके अलावा, उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए दुबई से ‘राउंड ट्रिपिंग’ कर अवैध धन भारत लाने का भी आरोप है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कैसे अवैध सट्टेबाजी का पैसा रियल एस्टेट सेक्टर में खपाया गया और औद्योगिक भूमि को आवासीय प्रोजेक्ट में बदलकर राज्य सरकार के राजस्व को करोड़ों का चूना लगाया गया।
PMLA के तहत कार्रवाई और राजनीतिक प्रभाव
प्रवर्तन निदेशालय ने यह पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत की है। ED के पास मौजूद सबूतों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद अब पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां एक ओर सरकार इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आगामी दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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