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Sex for jobs Ghana : घाना में नौकरी के बदले यौन शोषण पर छिड़ी जंग, राष्ट्रपति महामा ने मांगा सख्त कानून

Sex for jobs Ghana

Sex for jobs Ghana : घाना में इस समय ‘सेक्स फॉर जॉब्स’ (नौकरी के बदले यौन संबंध) के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। देश के राष्ट्रपति जॉन महामा ने इस कुप्रथा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे पूरी तरह से अपराध घोषित करने की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए मौजूदा कानूनी ढांचे में आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति महामा का कड़ा रुख और टाउन हॉल की चर्चा

कोफोरिडुआ में हाल ही में आयोजित एक टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा तब गरमाया जब एक छात्रा ने भर्ती प्रक्रिया में व्याप्त लैंगिक भेदभाव और असुरक्षा पर सवाल उठाया। राष्ट्रपति महामा ने बिना किसी झिझक के स्वीकार किया कि वर्तमान नीतियां महिलाओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नौकरी देने के बदले शारीरिक संबंध की मांग करना न केवल अनैतिक है, बल्कि एक गंभीर अपराध है जिसे दंडनीय बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, वर्कप्लेस पर कदम रखने से पहले ही महिलाओं को इस तरह के मानसिक और शारीरिक आघात से गुजरना समाज के लिए शर्मनाक है।

मौजूदा कानूनों की सीमाएं और नए प्रावधानों की जरूरत

घाना के कानूनी ढांचे में पहले से ही ‘लेबर एक्ट’ और ‘घरेलू हिंसा कानून’ जैसे प्रावधान मौजूद हैं, जो यौन उत्पीड़न को रोकने का दावा करते हैं। हालांकि, इन कानूनों में एक बड़ी कमी यह है कि ये अधिकतर नौकरी मिलने के बाद कार्यस्थल पर होने वाले शोषण पर केंद्रित हैं। भर्ती प्रक्रिया के दौरान यानी ‘हायरिंग स्टेज’ पर होने वाले शोषण को कवर करने के लिए कोई विशिष्ट और सख्त कानून नहीं है। राष्ट्रपति इसी कानूनी शून्य (Legal Vacuum) को भरने के लिए एक नए विधेयक की मांग कर रहे हैं, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।

बढ़ती बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव

इस कुप्रथा के फलने-फूलने के पीछे घाना में व्याप्त भारी बेरोजगारी एक मुख्य कारण है। औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों की भारी कमी और कड़ी प्रतिस्पर्धा ने नियोक्ताओं (Employers) को असीमित शक्ति दे दी है। जब भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती, तो भ्रष्ट अधिकारी और नियोक्ता युवा महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। नौकरी की तलाश में भटक रही महिलाओं के पास अक्सर कोई विकल्प नहीं बचता, जिससे वे इस शोषणकारी चक्र में फंसने को मजबूर हो जाती हैं।

सामाजिक बाधाएं और लोक-लाज का डर

सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं का मानना है कि घाना का पितृसत्तात्मक ढांचा इस समस्या को और जटिल बनाता है। पीड़ित महिलाएं अक्सर बदनामी, समाज में सम्मान खोने और भविष्य में नौकरी न मिलने के डर से चुप्पी साध लेती हैं। पुलिस और न्यायिक व्यवस्था तक पहुंच की कमी और शिकायत दर्ज कराने की जटिल प्रक्रिया के कारण अपराधी बेखौफ घूमते हैं। जब तक समाज में पीड़ित को दोष देने की मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक कानून का प्रभावी क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

भ्रष्टाचार का घिनौना रूप और आधुनिक तकनीक की भूमिका

कानूनी विशेषज्ञों और सांसदों ने ‘सेक्स फॉर जॉब्स’ को भ्रष्टाचार का एक बेहद घिनौना रूप करार दिया है। पूर्व कानूनी सलाहकार विक्टोरिया ब्राइट के अनुसार, यह सत्ता और पद का दुरुपयोग है। हालांकि, आधुनिक तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ने अब नई उम्मीद जगाई है। कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से अब ऐसे मामलों को अदालत में साबित करना पहले के मुकाबले आसान हुआ है। सांसद कोफी बेन्थेह का कहना है कि राष्ट्रपति का इस मुद्दे पर खुलकर बोलना यह दर्शाता है कि अब इस सामाजिक बीमारी का इलाज ढूंढना अनिवार्य हो गया है।

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