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Strait of Hormuz Reopens : कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी गिरावट, होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने से मिली राहत

Strait of Hormuz Reopens

Strait of Hormuz Reopens :  अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक 10 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध के बाद बने तनाव का कम होना और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ का दोबारा खुलना बताया जा रहा है। बाजार में छाई अनिश्चितता के बादल छंटने से तेल की कीमतों में यह नरमी आई है, जिसका असर आने वाले दिनों में भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिलेगा।

Strait of Hormuz Reopens :   होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने से सप्लाई चेन की बाधा दूर

पिछले कुछ समय से वैश्विक बाजार में यह आशंका बनी हुई थी कि ईरान और संबंधित तनाव के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद हो सकता है। यह रास्ता तेल व्यापार के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। यदि यह मार्ग बंद होता, तो वैश्विक तेल संकट पैदा हो सकता था। हालांकि, अब यह स्पष्ट हो गया है कि मार्ग पूरी तरह खुला है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। आपूर्ति बाधित होने का खतरा टलते ही बाजार में फैली घबराहट शांत हुई और कीमतों में तेज गिरावट आई।

Strait of Hormuz Reopens :   ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में भारी फिसलन

ताजा आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें जो आसमान छू रही थीं, अब गिरकर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी फिसलकर 83 से 86 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गया है। कुछ ही घंटों के भीतर कीमतों में इस तरह का उतार-चढ़ाव हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि जब तक आपूर्ति की गारंटी बनी रहेगी, तब तक कीमतों के बहुत ज्यादा बढ़ने की संभावना कम है।

निवेशकों की मुनाफावसूली और सकारात्मक धारणा

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का एक अन्य कारण निवेशकों द्वारा की गई बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) भी है। कीमतों में हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने अपने सौदे बेचना शुरू किए, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा। इसके अलावा, लेबनान में सीजफायर और कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं ने भी निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया है। बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि तनाव का चरम दौर बीत चुका है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और पेट्रोल-डीजल पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में यह कमी भारत जैसे देशों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है, जो अपनी जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं। कच्चे तेल का सस्ता होना सीधे तौर पर भारत के व्यापार घाटे को कम करेगा। इससे आने वाले समय में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिससे आम आदमी को महंगाई से राहत मिल सकती है। माल ढुलाई सस्ती होने से महंगाई दर में भी नरमी आने की उम्मीद है, जो रिजर्व बैंक और सरकार के लिए बड़ी राहत की बात होगी।

शेयर बाजार में तेजी और सेक्टोरल उछाल की उम्मीद

इस घटनाक्रम का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल के सस्ता होने से उन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होता है जिनके लिए कच्चा तेल एक मुख्य कच्चा माल है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एशियन पेंट्स जैसी पेंट बनाने वाली कंपनियों और टायर निर्माण से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी तेजी दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों में भी हलचल तेज रहेगी। कुल मिलाकर, यह भूराजनीतिक बदलाव वैश्विक और भारतीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत लेकर आया है।

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