सावन कब से शुरू हो रहा है और कब खत्म हो रहा है?
सावन सोमवार 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई जायेगी। वहीं अगले दिन 11 जुलाई से सावन की शुरूआत होगी। ऐसे में आषाढ पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 11 जुलाई की देर रात 02 बजकर 06 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 12 जुलाई को देर रात 02 बजकर 08 मिनट पर होगा। यह पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने में आने वाले चार सोमवार – जिन्हें ‘सावन सोमवार’ कहा जाता है – बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। शिवभक्त पूरे सावन मास में व्रत रखते हैं और विशेष पूजा करते हैं। इस दौरान शिवालयों में भक्तों की भीड़ रहती है और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है।
सावन सोमवार के व्रत का क्या नियम है?
सावन सोमवार का व्रत रखने के लिए सबसे पहले प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। व्रत में अधिकतर लोग दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा-अर्चना के बाद फलाहार ग्रहण करते हैं। इस व्रत में अनाज, नमक, तली-भुनी चीजें वर्जित रहती हैं; फल, दूध, दही, शहद, मखाने, साबूदाना, और सूखे मेवे खा सकते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक, शहद, गंगाजल आदि चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा में मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और शिव चालीसा या शिवाष्टक का पाठ करें।
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सावन सोमवार का व्रत कैसे तोड़ा जाता है?
व्रत खोलने का सही समय सूर्यास्त के बाद पूजा-अर्चना के उपरांत माना जाता है। पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें, दीप जलाएं, मंत्र जाप करें और भोग लगाएं। उसके बाद ही फलाहार या व्रत का हल्का भोजन करें। कुछ लोग दूध, फल, मखाने या साबूदाना की खिचड़ी से व्रत तोड़ते हैं। कोशिश करें कि व्रत तोड़ने के बाद भी सात्विक और हल्का भोजन ही करें। रात को भी अधिक तैलीय या भारी भोजन न लें, ताकि पाचन सही रहे। व्रत का उद्देश्य केवल उपवास नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता भी है।
सावन सोमवार व्रत रखने के क्या-क्या फायदे हैं?
ऐसा माना जाता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है। कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत उत्तम वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है, वहीं विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत मन, शरीर और आत्मा को पवित्र करता है और अनुशासन सिखाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से उपवास शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन को आराम देने में भी सहायक होता है। इससे आत्मविश्वास, धैर्य और मन की शक्ति भी बढ़ती है।
सावन सोमवार व्रत में कितनी बार खाना चाहिए?
अधिकतर लोग इस व्रत में पूरे दिन एक बार ही फलाहार या हल्का भोजन करते हैं, और कुछ लोग दो बार भी फल, दूध या मखाने खाते हैं। खास बात यह है कि अनाज और नमक से परहेज रखना चाहिए। पहला फलाहार प्रातःकाल में दूध या फल से हो सकता है, और शाम को पूजा के बाद दूसरा। हर व्यक्ति अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह अनुसार उपवास रखें। यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें और व्रत का तरीका उसी हिसाब से तय करें।
सावन सोमवार व्रत का महत्व क्या है?
सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में लिखा है कि इस माह में शिव की आराधना करने से जन्म-जन्मांतर के पाप कटते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, जो भक्त को संयम, धैर्य और आत्मनियंत्रण का संदेश भी देता है। यही कारण है कि यह व्रत केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, विचार और आचरण को भी सात्विक बनाता है।
क्या पुरुष भी सावन सोमवार का व्रत रख सकते हैं?
जी हां, सावन सोमवार का व्रत न सिर्फ महिलाएं, बल्कि पुरुष भी रख सकते हैं। पुरुष इस व्रत के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं, जीवन में सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। कई पुरुष कांवड़ भी लाते हैं और जल अर्पित करते हैं। यह व्रत उम्र, जाति या लिंग की सीमा से परे, हर भक्त को भगवान शिव की उपासना का अवसर देता है।
सावन सोमवार व्रत में क्या दान करना शुभ माना जाता है?
सावन सोमवार व्रत के दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल और जल दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान शिव की विशेष कृपा भी मिलती है। खासकर बेलपत्र, दूध, शहद, घी, सफेद वस्त्र या चंदन दान करना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये सब शिव को प्रिय हैं। कुछ लोग गरीबों को भोजन कराते हैं या शिवालय में जल और प्रसाद चढ़ाते हैं। दान करते समय न सिर्फ भौतिक चीजों का बल्कि अच्छे विचारों और प्रेम का भी दान करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र महीने में किया गया दान कई गुना फल देता है।
क्या सावन सोमवार व्रत में जलाभिषेक जरूरी है?
सावन सोमवार में भगवान शिव का जलाभिषेक करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। भक्त गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। जलाभिषेक से मन की शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल भी अर्पित किए जाते हैं, जो भगवान शिव को प्रिय हैं। जलाभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ होता है। अगर घर पर शिवलिंग नहीं है, तो तस्वीर या प्रतीक के सामने भी जल चढ़ाकर पूजा की जा सकती है। इसका उद्देश्य मन और आत्मा को शुद्ध करना है।
सावन सोमवार व्रत के दौरान किन बातों से बचें?
सावन सोमवार व्रत सिर्फ उपवास का नाम नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का भी प्रतीक है। इस दौरान क्रोध, द्वेष, झूठ, निंदा और अपवित्र विचारों से बचना चाहिए। शराब, मांसाहार और तामसिक भोजन का त्याग करना जरूरी है। कुछ लोग व्रत रखते हुए भी दिनभर मोबाइल, टीवी या सोशल मीडिया में लगे रहते हैं; जबकि इस समय को ध्यान, भजन और अच्छे कामों में लगाना ज्यादा फलदायी होता है। साथ ही, व्रत के दौरान किसी पर कटाक्ष या अपशब्द कहने से बचें। इस तरह व्रत से शरीर के साथ-साथ मन भी शुद्ध होता है और सच्चा पुण्य मिलता है।
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