Headline
Bypoll Results
Bypoll Results : उपचुनाव नतीजों पर BJP में मंथन, नितिन नवीन बोले- नई ऊर्जा और संकल्प के साथ जनता के बीच जाएंगे
Trump on Iran Talks
Trump on Iran Talks: ‘कल तक खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट’, ईरान वार्ता पर ट्रंप का बड़ा दावा
Morning Coffee Benefits
Morning Coffee Benefits: क्या सुबह की कॉफी लिवर को रख सकती है स्वस्थ? विशेषज्ञ की राय जानिए
Vastu Tips
Vastu Tips: घर में हाथी का जोड़ा रखना चाहिए या नहीं? जानिए वास्तु शास्त्र की मान्यता और नियम
Manjalpur Bypoll Result
Manjalpur Bypoll Result: BJP की बड़ी जीत, सतीश पटेल ने 30 हजार+ वोटों से मारी बाजी
RSS Gen Z Outreach
RSS Gen Z Outreach: 100+ शहरों में युवाओं से संवाद करेंगे मोहन भागवत, बड़ा अभियान तैयार
Brij Bhushan Singh Case
Brij Bhushan Singh Case: बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में किया बरी
CWG 2026
CWG 2026: भारत के 39 मेडल पर PM मोदी का संदेश, खिलाड़ियों की मेहनत को सलाम
US-Iran Talks
US-Iran Talks: ट्रंप बोले- समझौता हुआ तो बचेगी कई लोगों की जान, आज से शुरू होगी वार्ता

राजकोषीय घाटा कैसे करता है देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित?

राजकोषीय घाटा कैसे करता है देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित?

राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) वह स्थिति होती है जब सरकार की कुल आय (excluding borrowings) उसके कुल व्यय से कम होती है। यह आर्थिक असंतुलन दर्शाता है, जिसमें सरकार अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उधारी का सहारा लेती है। उदाहरण के लिए, यदि सरकार की कुल आय ₹20 लाख करोड़ है और खर्च ₹30 लाख करोड़, तो ₹10 लाख करोड़ का राजकोषीय घाटा कहलाएगा। यह किसी देश की आर्थिक नीति और वित्तीय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है।

राजकोषीय घाटा कैसे होता है?

राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार को अपेक्षित टैक्स और गैर-टैक्स आय नहीं मिलती, लेकिन उसे सामाजिक योजनाओं, रक्षा, सब्सिडी और प्रशासनिक खर्चों में धन खर्च करना पड़ता है। यदि आर्थिक मंदी हो या टैक्स संग्रहण कम हो, तब सरकार को घाटे की भरपाई उधारी से करनी पड़ती है। यह घाटा बजट में स्पष्ट रूप से दिखाया जाता है और इसके लिए सरकार को बॉन्ड जारी करने या बैंकों से ऋण लेने की आवश्यकता होती है।

राजकोषीय घाटे के प्रभाव

राजकोषीय घाटा एक हद तक देश की प्रगति के लिए सहायक हो सकता है, लेकिन जब यह सीमा से बाहर हो जाए तो कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इससे महंगाई बढ़ सकती है, ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और विदेशी निवेशक भारत की आर्थिक स्थिरता पर प्रश्न उठा सकते हैं। यदि घाटा लगातार बना रहे, तो यह देश की क्रेडिट रेटिंग को भी प्रभावित कर सकता है। इससे भविष्य में सरकार को अधिक ब्याज दरों पर ऋण लेना पड़ सकता है।

घाटे को कम करने के उपाय

राजकोषीय घाटा कम करने के लिए सरकार को अपनी आय और व्यय में संतुलन बनाना पड़ता है। इसके लिए टैक्स बेस को बढ़ाना, कर चोरी रोकना, लाभहीन सब्सिडी को समाप्त करना, सरकारी खर्चों को प्राथमिकता देना जैसे उपाय अपनाए जाते हैं। इसके अलावा, डिजिटल टैक्स कलेक्शन, सरकारी कंपनियों का विनिवेश (Disinvestment) और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना भी घाटा कम करने में मददगार होते हैं। एक मजबूत आर्थिक नीति और पारदर्शिता इसके नियंत्रण में सहायक होती है।

भारत में राजकोषीय घाटे की स्थिति

भारत में राजकोषीय घाटा हर साल बजट में घोषित किया जाता है। वर्ष 2024-25 के लिए यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 5.1 प्रतिशत अनुमानित है, जो महामारी के बाद धीरे-धीरे कम हो रहा है। भारत सरकार ‘राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM)’ के तहत इस घाटे को एक तय सीमा में रखने का प्रयास करती है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे GDP के 3% तक लाया जाए, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और देश की अर्थव्यवस्था विश्व स्तर पर मजबूत हो सके।

यह भी पढ़ें-बैलेंस शीट क्या होती है? व्‍यवसाय के लिए यह क्‍यों जरूरी, जानिए आसान भाषा में

One thought on “राजकोषीय घाटा कैसे करता है देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
ग्रीन साड़ी में रॉयल और ट्रेंडी दिखने के लिए अपनाएं ये तरीके पिंपल्स वाली स्किन के लिए मेकअप के आसान टिप्स पहले सावन सोमवार की पूजा ऐसे करें सफल कहां से आया फ्रेंडशिप डे का विचार? तवे पर बार-बार चिपक रहा डोसा?