ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मानव जीवन पर नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का गहरा प्रभाव होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की दशा प्रतिकूल होती है, तो उसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र-स्वास्थ्य, करियर, वैवाहिक जीवन, मानसिक स्थिति-पर दिखाई देता है। ऐसे में नवग्रहों की दशा को शांत करने के कुछ उपाय करना जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं 5 प्रभावी उपाय, जो आपको ग्रहों की शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति में मदद कर सकते हैं।
सूर्य ग्रह की शांति के उपाय
प्रतिदिन सुबह सूर्य को जल चढ़ाना अत्यंत लाभकारी होता है। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, चावल और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। रविवार को व्रत रखें और लाल रंग के वस्त्र दान करें। इससे आत्मबल, स्वास्थ्य और सरकारी मामलों में लाभ होता है। सूर्य अशुभ हो तो अहंकार से बचना चाहिए। विनम्रता ग्रह को शांत करती है।
चंद्र ग्रह को शांत करने के उपाय
सोमवार के दिन सफेद वस्त्र पहनें और सफेद वस्तुएं जैसे चावल, दूध, शक्कर दान करें। रात्रि को चंद्रमा की रोशनी में चंद्र मंत्र “ॐ सोम सोमाय नमः” का जाप करें। मानसिक शांति के लिए चंदन का तिलक लगाएं और रुद्राभिषेक कराएं। माता के साथ अच्छे संबंध बनाएं, क्योंकि चंद्रमा मातृत्व का प्रतीक है।
मंगल ग्रह की अशांति से राहत
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। लाल मसूर की दाल, लाल वस्त्र, तांबा और रक्तचंदन दान करें। “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। गुस्से और हिंसा से बचें। संयमित जीवन मंगल ग्रह को प्रसन्न करता है।
शनि ग्रह की दशा को कैसे करें शांत
शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल और काले वस्त्र दान करें। पीपल के वृक्ष की पूजा करें और उसमें जल चढ़ाएं। दीपक जलाकर “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के समय शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ करें। गरीबों, अपाहिजों और वृद्धों की सेवा करें-यह शनि को अत्यंत प्रिय है।
राहु और केतु की बाधाएं दूर करने के उपाय
राहु के लिए “ॐ रां राहवे नमः” और केतु के लिए “ॐ कें केतवे नमः” मंत्रों का जाप करें। शनिवार या बुधवार के दिन नीले या भूरे वस्त्र पहनें, काले उड़द और नारियल दान करें। राहु-केतु की पूजा विशेष रूप से नाग पंचमी, ग्रहण काल या राहु-केतु पीड़ा काल में करें। कुण्डली में कालसर्प दोष हो तो नाग देवता की पूजा करें और शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।
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