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दीपक जलाते ही दरवाजा क्यों नहीं बंद करना चाहिए? जानिए 7 अहम कारण

दीपक जलाते ही दरवाजा क्यों नहीं बंद करना चाहिए? जानिए 7 अहम कारण

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। खासतौर पर शाम को जब सूर्य अस्त हो रहा होता है, तब दीपक जलाकर वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाया जाता है। लेकिन बहुत से लोग दीपक जलाते ही तुरंत दरवाजा बंद कर देते हैं, जिससे लाभ के बजाय हानि होती है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि मुख्य द्वार पर दीपक जलाने के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए और क्यों ये बातें आपके जीवन में सुख-शांति बनाए रखने में मदद करती हैं।

दरवाजा तुरंत बंद न करें-ऊर्जा का अवरोध होता है

दीपक जलाते ही दरवाजा बंद कर देने से वह सकारात्मक ऊर्जा जो दीपक के माध्यम से घर में प्रवेश करती है, उसका प्रवाह रुक जाता है। यह ऊर्जा बाहर ही रह जाती है और घर में उसका लाभ नहीं पहुंच पाता। वास्तु के अनुसार, दीपक एक ऊर्जा केंद्र की तरह कार्य करता है और जब वह द्वार पर जलाया जाता है तो घर में लक्ष्मी, शांति और सुख का प्रवेश होता है। कम से कम 5 से 10 मिनट तक दरवाजा खुला रखें ताकि वातावरण में सकारात्मकता का समुचित संचार हो सके।

दीया पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रखें

जब आप मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं, तो ध्यान दें कि दीया का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो। इससे ऊर्जा का बहाव सकारात्मक दिशा में होता है और घर में लक्ष्मी का वास बना रहता है। दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने से उल्टा प्रभाव पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा धन और समृद्धि की दिशा मानी गई है, इसलिए दीपक को इसी दिशा में रखें और इसके साथ-साथ कोई पवित्र मंत्र भी पढ़ें।

सरसों के तेल या घी का दीपक हो अधिक फलदायी

वास्तु शास्त्र के अनुसार सरसों के तेल या देशी घी से दीपक जलाना शुभ माना जाता है। घी का दीपक देवी-देवताओं को समर्पित होता है जबकि सरसों के तेल का दीपक नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। शाम के समय विशेष रूप से सरसों के तेल का दीपक मुख्य द्वार पर जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक शक्ति का वास होता है। इससे मानसिक शांति और पारिवारिक सामंजस्य में भी वृद्धि होती है।

द्वार की सफाई और सजावट रखें उत्तम

दीपक जलाने से पहले मुख्य द्वार की साफ-सफाई जरूर करें। जाले, गंदगी या टूटी सजावट दरवाजे पर नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। द्वार पर रंगोली, स्वस्तिक, ॐ या शुभ-लाभ जैसे शुभ चिह्न बनाएं। इससे दीपक की ऊर्जा कई गुना अधिक प्रभावी हो जाती है। सुंदर और स्वच्छ द्वार ही लक्ष्मी को आकर्षित करता है। दीपक के साथ फूल या हल्दी-कुमकुम का प्रयोग करें तो यह शुभता को और बढ़ाता है।

दीपक जलाते समय ध्यान रखें मौन और एकाग्रता

दीपक जलाते समय वातावरण में शांति बनाए रखें। मोबाइल, टीवी या अन्य शोर-शराबे से दूर रहें। शांत मन से दीपक जलाने से आपकी ऊर्जा, प्रार्थना और भावना उस दीप में समाहित होती है और उसका असर भी अधिक होता है। यदि संभव हो तो “शुभम् करोति कल्याणम्” या “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” जैसे मंत्रों का उच्चारण करते हुए दीपक जलाएं।

दीपक बुझने न दें-अधूरी ऊर्जा प्रवाह हानि पहुंचाता है

दीपक अगर बीच में ही बुझ जाए तो वह शुभ संकेत नहीं होता। इससे ऊर्जा प्रवाह अधूरा रह जाता है, जिससे परिवार में असंतुलन या क्लेश बढ़ सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि दीपक सुरक्षित स्थान पर रखा हो जहां हवा या किसी वस्तु से वह न बुझे। आप चाहें तो दीपक के चारों ओर शीशे का कवर भी रख सकते हैं।

दीपक जलने के बाद घर में घुसते हुए शुभ शब्द कहें

दीपक जलाकर जब आप पुनः घर में प्रवेश करें, तो ‘शुभ लाभ’, ‘जय श्री लक्ष्मी’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ जैसे शब्दों का उच्चारण करें। इससे सकारात्मकता को और बल मिलता है। ऐसे शब्दों से वातावरण में दिव्यता बनी रहती है और घर के सभी सदस्यों को मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है। यह न केवल ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि आपको आंतरिक शांति भी देता है।

यह भी पढ़ें:घर का दक्षिणमुखी द्वार कर रहा है नुकसान? जानिए 7 आसान वास्‍तु उपाय

2 thoughts on “दीपक जलाते ही दरवाजा क्यों नहीं बंद करना चाहिए? जानिए 7 अहम कारण

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