Women Reservation Bill : भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों ‘महिला आरक्षण संशोधन बिल’ को लेकर भारी उठापटक देखने को मिल रही है। 17 अप्रैल का दिन संसदीय इतिहास में चर्चा का विषय बन गया जब यह बहुप्रतीक्षित बिल लोकसभा में गिर गया। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद देश की दो प्रमुख पार्टियों, कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ एक तरफ कांग्रेस पार्टी ने बिल के गिरने को अपनी राजनीतिक जीत के रूप में प्रचारित किया, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इस रुख को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए उन पर तीखा हमला बोला है।
Women Reservation Bill : प्रियंका गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की नई मांग
बिल गिरने के बाद कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए एक नया प्रस्ताव पेश किया। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण को भविष्य के परिसीमन या जनगणना के भरोसे छोड़ने के बजाय, इसे लोकसभा की वर्तमान सीटों और मौजूदा महिला सांसदों की संख्या के आधार पर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि आरक्षण की प्रक्रिया में देरी करना महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों के साथ अन्याय है।
Women Reservation Bill : स्मृति ईरानी का करारा जवाब: “98 साल के संघर्ष का क्या हुआ?”
कांग्रेस के दावों और जश्न पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने एक जवाबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। स्मृति ईरानी ने भावुक होते हुए कहा कि देश की महिलाओं को कांग्रेस ने दशकों से एक सपना दिखाया था कि उन्हें राजनीतिक अधिकार मिलेंगे, लेकिन जब मौका आया तो कांग्रेस ने संसद में इस बिल को गिराने में भूमिका निभाई। उन्होंने सवाल किया कि “98 साल पुराने इस मकसद का कल संसद में जो हश्र हुआ, उसे देश की हर महिला ने देखा है।” ईरानी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने मेजें थपथपाकर महिलाओं की आकांक्षाओं का अपमान किया है।
महिला सशक्तिकरण के आंकड़ों पर बीजेपी और कांग्रेस में टकराव
स्मृति ईरानी ने अपने संबोधन में केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के पिछले छह दशकों के शासनकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए यह केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि समानता की लड़ाई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस के शासन में देश की 11 करोड़ महिलाएं बुनियादी शौचालय सुविधाओं से वंचित थीं और 25 करोड़ महिलाओं के पास बैंक खाते तक नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने ही पहली बार देश में ‘जेंडर बजट फ्रेमवर्क’ पेश किया, जो महिलाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
परिसीमन और संवैधानिक व्यवस्था पर कांग्रेस के ‘पाखंड’ का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के विरोधाभासी बयानों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस कहती है कि वह 2023 के मूल बिल का समर्थन करती है, जिसमें स्पष्ट रूप से ‘परिसीमन’ (Delimitation) का उल्लेख है, लेकिन दूसरी तरफ वे परिसीमन समिति और संवैधानिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं जताते। ईरानी ने इसे कांग्रेस का “दोहरा चरित्र” और “पाखंड” बताते हुए कहा कि कांग्रेस को न तो देश की संसद पर भरोसा है और न ही देश की महिलाओं पर। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के विरोध के माध्यम से कांग्रेस का ‘क्रूर और महिला विरोधी चेहरा’ जनता के सामने बेनकाब हो गया है।
महिलाओं के राजनीतिक भविष्य पर गहराता संशय
महिला आरक्षण बिल का गिरना केवल एक विधायी प्रक्रिया की विफलता नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावों के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। जहाँ भाजपा इसे कांग्रेस की साजिश बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा की प्रशासनिक विफलता के रूप में देख रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में कौन सी पार्टी देश की आधी आबादी का विश्वास जीतने में सफल रहती है।
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