Lok Sabha Delimitation: महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विपक्ष द्वारा दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों में कटौती की आशंकाओं को खारिज करते हुए सरकार ने ठोस आंकड़े पेश किए हैं। केंद्र का कहना है कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत के राज्यों की लोकसभा सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस स्पष्टीकरण के साथ ही सरकार ने विपक्ष के उन आरोपों पर विराम लगाने की कोशिश की है, जिनमें परिसीमन को उत्तर भारत के पक्ष में बताया जा रहा था।
Lok Sabha Delimitation: संसद का विशेष सत्र और विधायी एजेंडा
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी कानूनी बाधाओं को दूर करना है। सरकार सत्र के दौरान तीन प्रमुख विधेयक पेश करेगी:
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महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक।
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परिसीमन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक विशेष विधेयक।
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दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु विधेयक। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने विपक्ष से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करें और राजनीति से ऊपर उठकर महिला सशक्तिकरण में सहभागी बनें।
Lok Sabha Delimitation: लोकसभा सीटों की सीमा और परिसीमन का नया फॉर्मूला
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भविष्य में लोकसभा सीटों की अधिकतम सीमा 850 तय की गई है, जिसे फिलहाल और नहीं बढ़ाया जाएगा। परिसीमन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर राज्य में एक स्वतंत्र ‘परिसीमन आयोग’ का गठन होगा। यह आयोग संबंधित राज्य के सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ही सीटों की संख्या तय करेगा। सरकार का दावा है कि वह ‘50% सीट वृद्धि’ का एक न्यायसंगत फॉर्मूला लेकर आई है, जो सभी राज्यों के हितों की रक्षा करेगा और जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को दंडित नहीं करेगा।
आंकड़ों से समझें: दक्षिण भारत को कैसे होगा फायदा?
विपक्ष के दावों के उलट, सरकार ने कुछ प्रमुख राज्यों के उदाहरण देकर बताया है कि नई व्यवस्था में सीटें किस प्रकार बढ़ेंगी:
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तमिलनाडु: वर्तमान में 39 सीटें हैं। जनगणना 2011 के आधार पर यह 49 होनी चाहिए थीं, लेकिन सरकार के नए फॉर्मूले से यह बढ़कर 59 हो जाएंगी।
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केरल: वर्तमान 20 सीटों की जगह अब 30 सीटें होने का अनुमान है।
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कर्नाटक: यहाँ 28 सीटों से बढ़कर संख्या 42 तक पहुंच सकती है।
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तेलंगाना व आंध्र प्रदेश: तेलंगाना में 17 से बढ़कर 25 और आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 37 सीटें होने की संभावना है।
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ओडिशा: यहाँ 21 सीटों की वर्तमान संख्या बढ़कर 31 हो जाएगी।
विपक्ष की रणनीति और संसद में हंगामे के आसार
सरकार के इन स्पष्टीकरणों के बावजूद विपक्ष संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करने का निर्णय लिया गया है। विपक्षी दलों का तर्क है कि परिसीमन और जनगणना की शर्तों के कारण महिला आरक्षण के लागू होने में अनावश्यक देरी हो रही है। इस राजनीतिक खींचतान के चलते गुरुवार को संसद में भारी हंगामे और तीखी बहस होने की पूरी आशंका है। सरकार की कोशिश है कि वह आंकड़ों के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों में फैले भ्रम को दूर कर इस बिल को सर्वसम्मति से पारित कराए।
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