Iran-US War 2026: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान द्वारा अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक A-10 वॉर्थोग और F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों को मार गिराए जाने की खबर ने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लापता पायलट और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह तनावपूर्ण स्थिति अब एक गंभीर बंधक संकट में बदलने की ओर अग्रसर है, जिससे दोनों देशों के बीच सीधे युद्ध की संभावनाएं और अधिक प्रबल हो गई हैं।
Iran-US War 2026: राष्ट्रपति ट्रंप की रहस्यमयी चुप्पी और लापता पायलट का संकट
लापता F-15E पायलट की स्थिति को लेकर जब ‘द इंडिपेंडेंट’ ने राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल किया, तो उन्होंने किसी भी जवाबी कार्रवाई या बचाव योजना का विवरण देने से साफ इनकार कर दिया। ट्रंप ने अत्यंत संक्षिप्त और नपे-तुले शब्दों में कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि हम उम्मीद करते हैं कि वैसा (बुरा) न हो।” इसके तुरंत बाद उन्होंने कॉल काट दी, जिससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन इस समय अत्यंत संवेदनशील स्थिति से गुजर रहा है। लापता चालक दल का सदस्य ईरानी क्षेत्र में विमान गिरने के बाद इजेक्ट करने को मजबूर हुआ था, और उसके पकड़े जाने की आशंका ने वाशिंगटन की रातों की नींद उड़ा दी है।
Iran-US War 2026: “हम युद्ध में हैं”: ट्रंप ने स्वीकार की जमीनी हकीकत
एनबीसी न्यूज़ के साथ बातचीत में ट्रंप ने कड़े तेवर अपनाते हुए स्वीकार किया कि अमेरिका और ईरान इस समय सीधे तौर पर युद्ध की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, “विमानों का नुकसान होना युद्ध का हिस्सा है, और हम अभी युद्ध में हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना के बावजूद अमेरिका-ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह पटरी से नहीं उतरेगी। ट्रंप ने मीडिया कवरेज पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए बचाव अभियान (Rescue Operation) की कोई भी जानकारी साझा करने से मना कर दिया। यदि तेहरान के इलाके में गिरा पायलट ईरानी सेना के हाथ लग जाता है, तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार और सुरक्षा चुनौती साबित होगी।
ईरान का दावा: होर्मुज स्ट्रेट के पास गिराया गया दूसरा विमान
ईरान ने दावा किया है कि उसने न केवल F-15E बल्कि होर्मुज स्ट्रेट के सामरिक मार्ग के पास एक A-10 वॉर्थोग को भी मार गिराया है। तेहरान की सेना ने इन दोनों विमानों को गिराने की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए इसे “अमेरिकी आक्रामकता के विरुद्ध एक रक्षात्मक जीत” करार दिया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि A-10 का पायलट सुरक्षित रूप से कुवैती हवाई क्षेत्र में इजेक्ट करने में सफल रहा और उसे बचा लिया गया। लेकिन F-15E का मामला अभी भी अधर में लटका हुआ है, क्योंकि वह विमान सीधे ईरानी सीमा के भीतर क्रैश हुआ है।
बंधक संकट की आहट और पेंटागन की बढ़ती चिंताएं
पेंटागन के हालिया आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों में अब तक 247 सैनिक घायल हो चुके हैं और 13 अपनी जान गंवा चुके हैं। लापता पायलट का मामला अब अमेरिकी सैन्य कमान की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। यदि ईरान पायलट को बंधक बना लेता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप को कूटनीति और सैन्य जवाबी कार्रवाई के बीच एक कठिन चुनाव करना होगा। यह स्थिति 1979 के प्रसिद्ध ईरानी बंधक संकट की याद दिलाती है, जिसने अमेरिकी संकल्प की कड़ी परीक्षा ली थी।
विशेष बलों की संभावित कार्रवाई और अनिश्चित भविष्य
लापता पायलट के जीवित रहने की संभावनाओं पर अभी भी प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। ट्रंप की चुप्पी को विशेषज्ञ दो तरह से देख रहे हैं—एक तरफ यह बचाव अभियान की गोपनीयता बनाए रखने की रणनीति हो सकती है, तो दूसरी तरफ यह विशेष सैन्य बलों (Special Forces) द्वारा संभावित सर्जिकल स्ट्राइक का संकेत भी हो सकता है। तेहरान इस समय न केवल युद्धविराम के प्रस्तावों को ठुकरा रहा है, बल्कि इजरायल पर भी मिसाइलों की बौछार कर रहा है। ऐसे में एक अमेरिकी पायलट का दुश्मन के कब्जे में होना पूरे मध्य पूर्व की आग में घी डालने का काम कर सकता है।
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