HIV (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस) एक गंभीर संक्रमण है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। यह वायरस CD4 कोशिकाओं (टी-कोशिकाओं) को नष्ट करता है, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो यह एड्स (AIDS) में बदल सकता है। HIV संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि स्राव या दूध से फैल सकता है। यह यौन संपर्क, संक्रमित सुइयों, मां से बच्चे में और रक्त संक्रमण के माध्यम से फैल सकता है। यह रोग धीरे-धीरे प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और सामान्य बीमारियां भी खतरनाक हो जाती हैं। यह इलाज योग्य है लेकिन अभी तक इसका पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, केवल एंटीरेट्रोवायरल थैरेपी (ART) से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
पुरुषों में HIV संक्रमण के प्रमुख लक्षण
पुरुषों में HIV संक्रमण के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे दिखते हैं, इसलिए यह पहचान में नहीं आता। लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में सूजन, गले में खराश और थकान शामिल हैं। कुछ पुरुषों को मुंह में छाले या गले में घाव भी हो सकते हैं। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, वजन घटता है, पसीना आता है (विशेषकर रात में), त्वचा पर चकत्ते या फंगल संक्रमण दिखाई देते हैं। कुछ पुरुषों में सेक्स क्षमता में कमी और बार-बार संक्रमण की शिकायत होती है। यदि लगातार थकान, सूजनग्रस्त लिम्फ नोड्स और बुखार बना रहता है तो HIV की जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज न होने पर संक्रमण एड्स में बदल सकता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है।
महिलाओं में HIV संक्रमण के लक्षण
महिलाओं में HIV संक्रमण के लक्षण कई बार गुप्त रहते हैं, लेकिन कुछ संकेतों से इसकी पहचान संभव है। बार-बार योनि संक्रमण, पीरियड्स में अनियमितता, पेल्विक पेन, बुखार, थकान और वजन कम होना शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को बार-बार यूरिन इन्फेक्शन, फंगल इंफेक्शन, या गर्भधारण में कठिनाई होती है। स्तनों से दूध या तरल पदार्थ का रिसाव और त्वचा पर दाने भी HIV के लक्षण हो सकते हैं। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती जाती है और संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। यदि महिला को बार-बार बुखार, थकावट और योनि संक्रमण हो रहा हो, तो HIV की जांच अनिवार्य हो जाती है। जल्दी पहचान और उपचार से रोग नियंत्रण में आ सकता है।
HIV की पहचान कैसे करें?
HIV की पहचान के लिए सबसे पहला कदम होता है ब्लड टेस्ट। इसमें HIV एंटीबॉडी और एंटीजन की जांच की जाती है। आमतौर पर ELISA टेस्ट, रैपिड टेस्ट, या वेस्टर्न ब्लॉट जैसे परीक्षण किए जाते हैं। पॉजिटिव आने पर दोबारा पुष्टि के लिए दूसरा टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा अब आधुनिक समय में PCR टेस्ट और CD4 काउंट की मदद से वायरस की स्थिति और शरीर की प्रतिरक्षा की जानकारी भी मिलती है। HIV की पहचान शुरुआती लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि केवल रक्त जांच द्वारा ही की जा सकती है। नियमित रूप से असुरक्षित यौन संबंध रखने वालों या उच्च जोखिम वाले पेशों में लगे लोगों को हर 6 महीने में जांच करानी चाहिए। गुप्त जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। सही समय पर जांच से जीवन बचाया जा सकता है।
HIV से जुड़े भ्रम और सच्चाई
HIV को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं, जिनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं होता। उदाहरण के लिए, यह मानना कि HIV छूने, साथ बैठने या खाने से फैलता है-यह गलत है। HIV केवल संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि स्राव या मां के दूध से फैलता है। यह हवा, पानी, मच्छर या छींकने से नहीं फैलता। कुछ लोग सोचते हैं कि HIV सिर्फ समलैंगिकों या व्यभिचारी लोगों को होता है, जबकि यह किसी को भी हो सकता है। यह बीमारी किसी भी धर्म, जाति या वर्ग में हो सकती है। एक और भ्रम यह है कि HIV संक्रमित व्यक्ति को सामान्य जीवन नहीं जीना चाहिए, जबकि ART दवाओं से व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। इन भ्रमों को दूर करना सामाजिक जिम्मेदारी है।
HIV से बचाव के तरीके
HIV से बचाव की सबसे पहली शर्त है-सुरक्षित यौन संबंध बनाना। हमेशा कंडोम का प्रयोग करें और एक ही पार्टनर के साथ संबंध बनाना सर्वोत्तम होता है। संक्रमित सुई, ब्लेड या रेजर का उपयोग बिल्कुल न करें। रक्त चढ़वाने से पहले HIV जांच सुनिश्चित करें। गर्भवती महिलाएं HIV टेस्ट जरूर करवाएं ताकि समय रहते बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सके। ART दवाओं का समय पर सेवन और डॉक्टरी परामर्श से वायरस को नियंत्रित किया जा सकता है। आजकल प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) जैसी दवाएं भी उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए उपलब्ध हैं। जागरूकता, शिक्षा और नियमित जांच से ही HIV के प्रसार को रोका जा सकता है।
यह भी पढ़ें-कोविड का बच्चों पर असर कितना गंभीर है? WHO की चेतावनी और सलाह

One thought on “HIV संक्रमण क्या है? जानिए पुरुषों और महिलाओं में लक्षण और बचाव के उपाय”