कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। शुरुआत में ऐसा माना गया था कि यह वायरस बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए अधिक घातक है, लेकिन जैसे-जैसे नए वैरिएंट सामने आए, बच्चों पर इसके प्रभाव को लेकर भी चिंताएं बढ़ीं। कई माता-पिता इस सवाल से परेशान हैं: “क्या बच्चों पर कोविड का असर ज्यादा होता है?” इस ब्लॉग में हम WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय जानेंगे।
WHO के अनुसार बच्चों में कोविड का जोखिम कितना है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में कोविड-19 संक्रमण की संभावना तो है, लेकिन गंभीर लक्षण बहुत कम देखने को मिलते हैं। आमतौर पर बच्चों में हल्का बुखार, गले में खराश, खांसी और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, और वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। WHO के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में गंभीर संक्रमण के मामले और भी कम हैं। हालांकि, कुछ विशेष मामलों में मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS-C) जैसे जटिल लक्षण देखे गए हैं, जो दुर्लभ हैं लेकिन गंभीर हो सकते हैं। WHO का मानना है कि बच्चों में संक्रमण की दर वयस्कों की तुलना में कम है, लेकिन उन्हें वायरस फैलाने का माध्यम माना जा सकता है।
बच्चों में कोविड के सामान्य और असामान्य लक्षण
सामान्य लक्षण
- बुखार
- खांसी
- थकान
- गले में खराश
असामान्य लक्षण
- त्वचा पर चकत्ते
- पेट दर्द और दस्त
- आंखों में लालिमा
- सांस लेने में तकलीफ
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चा सुस्त हो जाए, लगातार बुखार बना रहे, या सांस लेने में कठिनाई हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वे हल्के लक्षणों को भी गंभीरता से लें और आइसोलेशन की प्रक्रिया का पालन करें।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा असर
कोविड-19 का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन, स्कूल बंद होना, दोस्तों से दूरी, और माता-पिता के तनाव ने बच्चों के मन में डर, चिंता और अकेलेपन की भावना को बढ़ा दिया है।
बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, पढ़ाई में मन न लगना और उदासी जैसे लक्षण दिखाई देने लगे हैं। WHO और UNICEF दोनों संस्थाओं ने यह स्पष्ट किया है कि बच्चों की मानसिक स्थिति को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए और यदि जरूरत हो तो काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।
बच्चों के लिए टीकाकरण की स्थिति और विशेषज्ञों की राय
भारत सहित कई देशों ने 12 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कोविड टीकाकरण की अनुमति दे दी है। भारत में कोवैक्सीन और कोर्बेवैक्स जैसे टीके बच्चों को लगाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण से बच्चों में गंभीर संक्रमण की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।
WHO की सलाह है कि जिन बच्चों को पहले से कोई गंभीर रोग है (जैसे अस्थमा, मधुमेह या इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी), उन्हें प्राथमिकता से वैक्सीन दी जानी चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे किसी भी भ्रम में न पड़ें और बच्चों के टीकाकरण को प्राथमिकता दें, ताकि स्कूल जाने और सामाजिक विकास की प्रक्रिया सामान्य हो सके।
घरेलू देखभाल और सुरक्षा उपाय
- बच्चों को हाथ धोने की आदत डालें
- मास्क पहनने की ट्रेनिंग दें
- स्कूल बैग, टिफिन और बोतल को नियमित रूप से सैनिटाइज करें
- विटामिन सी, जिंक और पोषक तत्वों से भरपूर आहार दें
- बाहर से आने के बाद कपड़े बदलवाना और स्नान कराना
विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहेगी, तो कोविड संक्रमण से निपटना आसान होगा। इसके साथ ही माता-पिता को भी जिम्मेदारी से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
कोविड के बाद बच्चों में लॉन्ग कोविड के लक्षण
हालांकि बच्चों में लॉन्ग कोविड (Long COVID) के मामले कम होते हैं, लेकिन कुछ केस ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें बच्चों को कोविड ठीक होने के बाद भी हफ्तों तक लक्षण बने रहे-
- लगातार थकान
- एकाग्रता में कमी (ब्रेन फॉग)
- सांस फूलना
- जोड़ों में दर्द
- नींद की समस्या
WHO और विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे बच्चों को विशेष निगरानी की जरूरत होती है। उन्हें पर्याप्त आराम, पोषण और समय पर मेडिकल जांच की आवश्यकता है। अगर बच्चा लगातार थका हुआ महसूस करता है या उसका व्यवहार बदल रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करें और उसकी हेल्थ हिस्ट्री शेयर करें।
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