भगवान हनुमान को समर्पित भक्ति परंपरा में जहां शक्ति, साहस और सेवा का आदर्श समाया है, वहीं महिलाओं की आस्था और भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हनुमान जी को ‘ब्रह्मचारी’ माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद उनकी भक्ति में नारी वर्ग ने सदैव सक्रिय भागीदारी निभाई है।
मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर हनुमान चालीसा का पाठ करती हैं, सिंदूर और चमेली के तेल से पूजा करती हैं और संकटमोचन से अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करती हैं। ग्रामीण भारत से लेकर शहरी जीवन तक, हनुमान मंदिरों में महिलाओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भक्ति भाव में लिंगभेद का कोई स्थान नहीं है।
धार्मिक ग्रंथों और संतों की वाणी में भी यह उल्लेख मिलता है कि भक्ति में नारी और पुरुष समान हैं। हनुमान जी के जीवन से जुड़ी कथाओं में माता सीता के प्रति उनकी श्रद्धा, सेवा और समर्पण यह दर्शाते हैं कि वे नारी सम्मान के प्रतीक भी हैं।
आधुनिक दौर में भी हनुमान जी की पूजा महिलाओं के लिए आत्मबल और साहस का स्रोत बन गई है। तनावपूर्ण जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और सामाजिक चुनौतियों के बीच हनुमान भक्ति महिलाओं को मानसिक शांति, ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करती है।
विभिन्न धार्मिक आयोजनों, हनुमान जन्मोत्सव और हनुमान जयंती जैसे पर्वों में महिलाओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि हनुमान भक्ति एक समावेशी आस्था है, जिसमें नारी की भूमिका केवल पूजक की नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत की भी है।
