Headline
Hardeep Singh Puri
Hardeep Singh Puri मध्य प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे, कांग्रेस की आपत्तियां खारिज, निर्विरोध जीत दर्ज
Agniveer Scheme New Rules: अग्निवीरों को मिलेगा दो साल एक्सटेंशन, शादी की अनुमति पर भी विचार
CAIT Protest
CAIT Protest: राहुल गांधी को व्यापारियों की चेतावनी, देशभर में मनाया जाएगा धिक्कार दिवस
Supreme Court Arrest Verdict
Supreme Court Arrest Verdict : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस हिरासत के 24 घंटे नियम पर बदला कानून
Chirag Paswan
Chirag Paswan: चिराग पासवान ने फिर दिखाई बगावती तेवर, BJP पर उठाए सवाल
Kiren Rijiju Rahul Gandhi
Kiren Rijiju Rahul Gandhi: राहुल गांधी को रिजिजू की सात शर्तें, बोले- कांग्रेस ज्यादा सांसद जिताना चाहती है तो
Child Swallowed Object : बच्चे ने निगल ली बैटरी या सिक्का? तुरंत अपनाएं ये जरूरी कदम
Choti Diwali 2026
Choti Diwali 2026 Date : छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन, जानिए सही तारीख
CM Yogi on Congress
CM Yogi on Congress: योगी ने कांग्रेस से मांगा आपातकाल पर माफी का जवाब, विपक्ष पर साधा निशाना

TMC Rebel MPs: सांसदी रद्द होने के नोटिस से घबराए बागी सांसद, ओम बिरला से मांगा अतिरिक्त समय

TMC Rebel MPs

TMC Rebel MPs:  तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों की लोकसभा सदस्यता को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ सामने आया है। लोकसभा सचिवालय और अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए इन सांसदों ने तीन सप्ताह यानी करीब 21 दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। इससे पहले उन्हें मंगलवार तक यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता क्यों नहीं समाप्त की जानी चाहिए।

विधानसभा चुनाव के बाद TMC में शुरू हुई थी बगावत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक उठापटक तेज हो गई थी। इसी दौरान पार्टी के 20 सांसदों ने नेतृत्व के खिलाफ बगावती रुख अपनाते हुए TMC छोड़ने और एनडीए समर्थित NCPI में शामिल होने का फैसला किया। सुदीप बंद्योपाध्याय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी राय समेत कई प्रमुख सांसद इस गुट के साथ बताए गए। इसके बाद संसद में इन सांसदों के बैठने की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया।

NCPI में शामिल होने के बावजूद मान्यता का पेंच

TMC छोड़कर NCPI में जाने वाले सांसदों को संसद में अलग बैठने की व्यवस्था तो मिल गई, लेकिन उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर कानूनी पेंच अभी कायम है। तकनीकी और संवैधानिक स्तर पर उन्हें लोकसभा में NCPI के स्वतंत्र सांसदों के तौर पर पूर्ण मान्यता मिलने का मामला स्पष्ट नहीं हुआ है। इसी वजह से उनकी सदस्यता और दल-बदल कानून के प्रावधानों को लेकर विवाद लगातार जारी है। अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मामला

मानसून सत्र के दौरान TMC के लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर भी इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की गई। इस कदम के बाद विवाद ने संवैधानिक और कानूनी रूप ले लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी थी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने लोकसभा अध्यक्ष से कार्यवाही की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद लोकसभा सचिवालय ने सभी 20 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस के जरिए उनसे पूछा गया कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त क्यों न की जाए। अब सांसदों की ओर से अतिरिक्त समय मांगने के बाद प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

बागी सांसदों ने मांगा तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय

नोटिस मिलने के बाद NCPI गुट के सांसदों ने अपना पक्ष तैयार करने के लिए अधिक समय की मांग की है। लोकसभा में NCPI गुट के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि लोकसभा सचिवालय को पत्र भेजकर तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया है। सांसदों का कहना है कि मामले की संवैधानिक और कानूनी जटिलताओं को देखते हुए विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए पर्याप्त समय आवश्यक है।

कानूनी विशेषज्ञों से सलाह के बाद लिया फैसला

सूत्रों के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद बागी सांसदों ने अपने कानूनी विकल्पों पर चर्चा शुरू कर दी थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने वरिष्ठ वकीलों से सलाह-मशविरा किया और अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कानूनी पहलुओं पर विचार किया। इसी प्रक्रिया के बाद उन्होंने जवाब दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया। हालांकि, अतिरिक्त समय दिए जाने का अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना है।

10वीं अनुसूची को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने

इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून है। TMC का तर्क है कि इस प्रावधान के तहत राजनीतिक दल का विलय संभव है, लेकिन कुछ सांसदों का अलग होकर किसी दूसरे दल में शामिल होना अपने आप में विलय नहीं माना जा सकता। पार्टी का कहना है कि बागी सांसदों की कार्रवाई दल-बदल कानून के दायरे में आती है और उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।

बागी सांसद दो-तिहाई समर्थन का दे रहे हवाला

वहीं, बागी सांसदों का दावा है कि उनके पास TMC के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है। उनका तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के साथ अलग राजनीतिक समूह बनाने की स्थिति में उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होना चाहिए। इसी संवैधानिक व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुख्य विवाद है। अब लोकसभा अध्यक्ष के सामने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों पर विचार करने की चुनौती है।

ओम बिरला के फैसले पर टिकी निगाहें

अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले कदम पर है। सबसे पहले यह तय होना है कि 20 सांसदों को जवाब देने के लिए मांगे गए तीन सप्ताह के अतिरिक्त समय की अनुमति मिलती है या नहीं। इसके बाद उनके जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर सदस्यता को लेकर फैसला आगे बढ़ सकता है। यह मामला दल-बदल कानून की व्याख्या और संसद में सांसदों की सदस्यता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Read More :  RGPV Name Change : मोहन सरकार का बड़ा फैसला, RGPV से हटेगा राजीव गांधी का नाम, जानें नया नाम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
38 साल के हुए विराट कोहली, जानिए उनके करियर की 8 बड़ी उपलब्धियां इस दिवाली बाजार जैसे खूबसूरत दिखेंगे घर के दीये मिट्टी के दीयों से क्यों रोशन करते हैं घर? जानें इसका महत्व गुलमर्ग से औली तक, न्यू ईयर पर इन जगहों का करें दीदार कभी दाल में पानी मिलाकर खाते थे शाहरुख खान