Ramayana Story : रामायण की कथा के अनुसार लंका के युद्ध में भगवान श्रीराम के हाथों रावण का वध होने के बाद लंका में शोक का वातावरण छा गया। रावण की पत्नी मंदोदरी और उसकी अन्य रानियां विलाप करने लगीं। वहीं रावण का छोटा भाई विभीषण भी अपने बड़े भाई की मृत्यु से दुखी था। इसी प्रसंग के आगे वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड में रावण के अंतिम संस्कार से जुड़ी महत्वपूर्ण घटना का वर्णन मिलता है।
श्रीराम ने विभीषण को दिया अंतिम संस्कार का दायित्व
रावण के वध के बाद भगवान श्रीराम ने विभीषण से कहा कि अब अपने बड़े भाई के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करें। लेकिन विभीषण ने शुरुआत में इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने से मना कर दिया। उनके मन में रावण के प्रति पुराने विवाद और उसके आचरण को लेकर गहरा विरोध था। यही कारण था कि वह अपने भाई का अंतिम संस्कार करने को लेकर दुविधा में थे।
रावण के कर्मों से दुखी थे विभीषण
वाल्मीकि रामायण के अनुसार विभीषण ने श्रीराम के सामने अपनी बात रखते हुए रावण के कर्मों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रावण ने धर्म के मार्ग का पालन नहीं किया और दूसरे की पत्नी सीता का हरण किया। विभीषण के अनुसार रावण ने अपने आचरण से अधर्म का रास्ता अपनाया था। इसके अलावा रावण ने उन्हें भी अपना भाई होते हुए शत्रु की तरह माना और कई तरह से पीड़ा पहुंचाई।
श्रीराम ने समझाया मृत्यु के बाद धर्म
विभीषण की बात सुनने के बाद भगवान श्रीराम ने उन्हें समझाया कि मृत्यु के साथ वैर समाप्त हो जाना चाहिए। किसी व्यक्ति ने जीवन में कितने भी गलत कर्म किए हों, मृत्यु के बाद उसके प्रति शत्रुता बनाए रखना उचित नहीं माना जाना चाहिए। श्रीराम ने विभीषण को याद दिलाया कि रावण उनका बड़ा भाई था और अब उसका अंतिम संस्कार करना उनका कर्तव्य है।
रावण की वीरता का भी किया उल्लेख
श्रीराम ने रावण के युद्ध कौशल और पराक्रम को भी स्वीकार किया। युद्ध में रावण एक शक्तिशाली और वीर योद्धा था। इसलिए उसके अंतिम संस्कार को उचित रीति से पूरा किया जाना चाहिए। श्रीराम की बातों का उद्देश्य यही था कि युद्ध और व्यक्तिगत वैर अपनी जगह हैं, लेकिन मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार जैसे कर्तव्य को पूरा करना अलग विषय है।
विभीषण ने भाई का अंतिम संस्कार किया
श्रीराम की बात सुनने के बाद विभीषण अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद रावण के अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। कथा के अनुसार विभीषण ने आवश्यक सामग्री जुटाई और विधि-विधान के अनुसार अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार किया। इस तरह जिस विभीषण ने शुरुआत में रावण के संस्कार से इनकार किया था, वही अंततः उसके अंतिम संस्कार का कर्तव्य निभाने वाला बना।
प्रसंग में छिपा कर्तव्य और धर्म का संदेश
रावण के अंतिम संस्कार से जुड़ा यह प्रसंग रामायण की कथा में महत्वपूर्ण नैतिक संदेश देता है। श्रीराम ने युद्ध में रावण का वध किया, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद व्यक्तिगत शत्रुता को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के कर्मों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन मृत्यु के बाद उसके प्रति आवश्यक मानवीय और पारिवारिक कर्तव्यों का पालन किया जाना चाहिए।
विभीषण बने लंका के राजा
रावण के अंतिम संस्कार के बाद रामायण की कथा आगे बढ़ती है। श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा बनाया। विभीषण ने युद्ध के दौरान श्रीराम का साथ दिया था और रावण के विरुद्ध धर्म के पक्ष में खड़े हुए थे। रावण के अंत के बाद लंका की सत्ता विभीषण को मिली और उनके राज्याभिषेक का प्रसंग भी आगे की कथा में आता है।
रामायण का यह प्रसंग क्यों है महत्वपूर्ण
रावण की मृत्यु और अंतिम संस्कार का प्रसंग केवल युद्ध के अंत की घटना नहीं है, बल्कि कर्तव्य, क्षमा और मृत्यु के बाद वैर समाप्त करने की सोच को भी सामने रखता है। इसी वजह से विभीषण का शुरुआती इंकार और बाद में श्रीराम की समझाइश पर अंतिम संस्कार करना रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों में गिना जाता है।
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