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Pushya Nakshatra 2026: सितंबर में 7-8 तारीख को बन रहा पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग, नोट कर लें तारीख

Pushya Nakshatra 2026

Pushya Nakshatra 2026 : ज्योतिष शास्त्र और सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। नए कारोबार की शुरुआत, महत्वपूर्ण निवेश या सोने-चांदी जैसी मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी शुभ समय देखा जाता है। 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को विशेष रूप से शुभ, पवित्र और मंगलकारी माना गया है। इसी वजह से इसे ‘नक्षत्रों का राजा’ या ‘नक्षत्र सम्राट’ भी कहा जाता है। सितंबर 2026 में पुष्य नक्षत्र का संयोग लगातार दो दिनों तक रहने वाला है।

7 सितंबर की शाम से शुरू होगा पुष्य नक्षत्र

पंचांग के अनुसार, सितंबर 2026 में पुष्य नक्षत्र की शुरुआत 7 सितंबर, सोमवार को शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगी। इसका समापन अगले दिन 8 सितंबर, मंगलवार को शाम 4 बजकर 39 मिनट पर होगा। इस तरह पुष्य नक्षत्र का प्रभाव करीब दो दिनों तक रहने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन दोनों दिनों में शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए मुहूर्त देखा जा सकता है।

27 नक्षत्रों में आठवें स्थान पर है पुष्य

पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में इसे शुभता, पोषण, स्थिरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसका संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है और बृहस्पति को ही इसका देवता बताया गया है। ‘पुष्य’ शब्द का अर्थ पोषण करने वाला माना जाता है। इसलिए ऐसे कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है, जिनमें लंबे समय तक वृद्धि और स्थिरता की अपेक्षा की जाती है।

सोना चांदी और वाहन खरीदना माना जाता है शुभ

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में सोना, चांदी, आभूषण, वाहन और घर से संबंधित जरूरी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में खरीदी गई मूल्यवान वस्तुओं में स्थिरता और वृद्धि बनी रहती है। इसी वजह से कई लोग महत्वपूर्ण खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र का इंतजार करते हैं। हालांकि किसी भी बड़े निर्णय से पहले अपनी परिस्थिति और उचित मुहूर्त पर विचार करना चाहिए।

निवेश और बचत के लिए भी माना जाता है अनुकूल

पुष्य नक्षत्र को आर्थिक मामलों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस दौरान निवेश या बचत से जुड़े नए कदम उठाना शुभ माना गया है। खासतौर पर लंबे समय के लिए किए जाने वाले आर्थिक निर्णयों के लिए इस नक्षत्र को अनुकूल बताया जाता है। यही कारण है कि कुछ लोग निवेश की शुरुआत के लिए इस नक्षत्र में शुभ मुहूर्त का चयन करते हैं।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की करें पूजा

पुष्य नक्षत्र के दौरान धार्मिक कार्यों को भी शुभ माना जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। मान्यता है कि धार्मिक गतिविधियों से मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।

जरूरतमंदों को दान करने की भी है मान्यता

पुष्य नक्षत्र में जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस तरह के सेवा कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने की परंपरा कई धार्मिक परिवारों में देखने को मिलती है।

शुभ कार्य शुरू करने के लिए देख सकते हैं मुहूर्त

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से नया कारोबार, खरीदारी, निवेश या किसी अन्य शुभ कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहा है, तो पुष्य नक्षत्र के दौरान उचित मुहूर्त देखकर इसकी शुरुआत कर सकता है। सितंबर 2026 में 7 और 8 सितंबर को पुष्य नक्षत्र रहने के कारण इन दोनों दिनों को ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विशेष माना जा रहा है। स्थानीय पंचांग और व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार मुहूर्त का चयन करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।

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