Headline
Manjalpur Bypoll Result
Manjalpur Bypoll Result: BJP की बड़ी जीत, सतीश पटेल ने 30 हजार+ वोटों से मारी बाजी
RSS Gen Z Outreach
RSS Gen Z Outreach: 100+ शहरों में युवाओं से संवाद करेंगे मोहन भागवत, बड़ा अभियान तैयार
Brij Bhushan Singh Case
Brij Bhushan Singh Case: बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में किया बरी
CWG 2026
CWG 2026: भारत के 39 मेडल पर PM मोदी का संदेश, खिलाड़ियों की मेहनत को सलाम
US-Iran Talks
US-Iran Talks: ट्रंप बोले- समझौता हुआ तो बचेगी कई लोगों की जान, आज से शुरू होगी वार्ता
Vitamin C in Monsoon
Vitamin C in Monsoon: सर्दी-जुकाम से बचाएगा Vitamin C, मानसून में डॉक्टरों की ये सलाह जरूर मानें हर दिन
Sawan 2026
Sawan 2026: सावन में अगर दिखें ये सपने, तो समझिए भोलेनाथ की कृपा बरसने वाली है
NEET UG Counselling 2026
NEET UG Counselling 2026: काउंसलिंग डेट घोषित, 8 सितंबर से शुरू होगा नया मेडिकल सत्र
World Breastfeeding Week
World Breastfeeding Week: स्तनपान से मां और बच्चे दोनों को फायदे, जानें मिथक और सच

Parliament Monsoon Session: सरकार लाएगी 5 बड़े बिल, विपक्ष ने तैयार किया मास्टरप्लान

Parliament Monsoon Session

Parliament Monsoon Session: केंद्र सरकार ने 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र, जिसे मानसून सत्र कहा जा रहा है, के लिए अपनी व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस सत्र में सरकार का मुख्य ध्यान पांच महत्वपूर्ण नए विधेयकों को सदन में पेश करने और पारित कराने पर है। सरकार के इस एजेंडे में आयकर कानून, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या में फेरबदल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रणाली, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जुड़े संशोधन शामिल हैं।

इनमें से आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को उन अध्यादेशों के स्थान पर लाया जाएगा जो फिलहाल लागू हैं। इन विधेयकों का उद्देश्य कर सुधारों को गति देना, न्यायपालिका की कार्यकुशलता बढ़ाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार इन कानूनों के माध्यम से देश के औद्योगिक और नागरिक बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव लाने की कोशिश में है।

लंबित विधेयकों को पारित कराने का दबाव

नई पेश होने वाली विधेयकों की सूची के अलावा, सरकार दो महत्वपूर्ण लंबित विधेयकों को भी इस मानसून सत्र में प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएगी। इसमें पहला है विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill), जिसे इसी वर्ष मार्च में लोकसभा में पेश किया गया था। दूसरा, अत्यंत महत्वपूर्ण ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ है, जिसे पिछले साल दिसंबर में सदन में रखने के बाद गहन समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया था। सरकार का मानना है कि इन विधेयकों के पारित होने से शिक्षा क्षेत्र और विदेशी फंडिंग के नियमन में स्पष्टता आएगी। मानसून सत्र के दौरान इन विषयों पर व्यापक चर्चा आयोजित करने और सर्वसम्मति से इन्हें पारित कराने का सरकारी प्रयास है। यह सत्र सरकार के लिए नीतिगत दृष्टिकोण से अत्यंत निर्णायक माना जा रहा है।

बदलती राजनीतिक समीकरण और विपक्ष की घटती ताकत

मानसून सत्र के आगाज से पहले राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। बजट सत्र (फरवरी 2026) की तुलना में इस समय विपक्ष अपनी पुरानी एकजुटता को खोता नजर आ रहा है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट देखने को मिली है, जहां पार्टी के 28 में से 20 सांसद बागी होकर नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) का हिस्सा बन गए हैं और अब वे NDA को समर्थन देने की स्थिति में हैं। इस विलय की वैधता पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का निर्णय आने वाला है।

वहीं, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल होने से विपक्ष की संख्याबल पर गहरा असर पड़ा है। इसके अलावा, तमिलनाडु में कांग्रेस और TVK के गठबंधन के बाद डीएमके (DMK) का ‘इंडी’ गठबंधन से अलग होना एक बड़ा घटनाक्रम है। हालांकि डीएमके ने औपचारिक रूप से NDA का दामन नहीं थामा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह चुनिंदा विधेयकों पर सरकार का इश्यू-बेस्ड (मुद्दा आधारित) समर्थन कर सकती है।

विपक्ष की घेराबंदी: कांग्रेस की रणनीति और तेवर

अपनी कमजोर होती स्थिति के बावजूद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। गुरुवार को 10 जनपथ पर सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी की आक्रामक रणनीति साफ दिखाई दी। बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे, शशि थरूर और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सत्र के दौरान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का निर्णय लिया है। सांसद प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया है कि ‘राम मंदिर चंदे की कथित चोरी’ का मुद्दा सदन में जोर-शोर से उठाया जाएगा। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि सरकार को महंगाई, पेपर लीक, भ्रष्टाचार, संस्थाओं पर कब्जे और राजनीतिक दलों को तोड़ने की नीति पर जवाब देना होगा।

सरकार के सामने चुनौतियों की लंबी फेहरिस्त

विपक्ष ने मुद्दों की एक लंबी सूची तैयार की है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के जरिए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इसके अलावा, विदेश नीति की कथित विफलताओं, इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण वाहन मालिकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ, और जंगलों की बेतहाशा कटाई को लेकर विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा।

सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन का है। विपक्ष इन सभी मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह स्पष्ट है कि आगामी मानसून सत्र विधायी कार्यों के साथ-साथ तीखी बहस और हंगामेदार चर्चाओं का गवाह बनेगा, जहां सरकार अपने बिलों को पारित कराने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष अपनी खोई हुई साख को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है।

Read More : US Iran War: ईरान पर लगातार छठी रात अमेरिकी हमला, बंदर अब्बास में सात मौतें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
पहले सावन सोमवार की पूजा ऐसे करें सफल कहां से आया फ्रेंडशिप डे का विचार? तवे पर बार-बार चिपक रहा डोसा? नमक बरसात में क्यों पकड़ लेता है नमी? इन छोटे बदलावों से सिंपल ब्लाउज बनेगा डिजाइनर पीस