India Russia Trade : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार (4 जून 2026) को भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते घनिष्ठ संबंधों से नई दिल्ली और मॉस्को के पारंपरिक रिश्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। पुतिन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले कुछ ही वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन लगातार भारत पर मॉस्को के साथ सहयोग खत्म करने का दबाव बनाता है, लेकिन पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व के सामने अमेरिका की ऐसी तमाम कोशिशें पूरी तरह बेअसर साबित हुई हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की धमक और मोदी सरकार की बेहतरीन रणनीतियां
राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह अभूतपूर्व सफलता भारत की जनता की कड़ी मेहनत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सरकार द्वारा तैयार की गई बेहतरीन आर्थिक रणनीतियों का परिणाम है। पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस, भारत के किसी अन्य देश (जैसे अमेरिका) के साथ द्विपक्षीय संबंधों को कभी भी नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखता, क्योंकि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने फैसले खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है।
सोवियत काल से चली आ रही ‘स्पेशल प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’
दोनों देशों के साझा इतिहास को याद करते हुए पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच एक ‘स्पेशल प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ (विशेष विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी) है। यह रिश्ता कोई नया नहीं, बल्कि दशकों पुराना और बेहद गहरा है। साल 1947 में जब भारत को आजादी मिली थी, तब सोवियत संघ ने तुरंत राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और एक नए स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत को आगे बढ़ाने में हर संभव तकनीकी और रणनीतिक मदद मुहैया कराई थी।
ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़कर फार्मास्युटिकल और नए क्षेत्रों में बढ़ा निवेश
रूसी राष्ट्रपति ने सहयोग के नए आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ ऊर्जा (Energy) और परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) तक ही सीमित नहीं है। अब दोनों देश कई अन्य उभरते हुए क्षेत्रों में भी एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था में रूस का बहुत बड़ा निवेश है। चूंकि भारत वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल (दवा निर्माण) क्षेत्र में बेहद मजबूत है, इसलिए रूसी कंपनियां भारतीय फर्मों के साथ मिलकर कई नए और दिलचस्प प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
पीएम मोदी एक भरोसेमंद साझेदार, अंतरराष्ट्रीय दबावों का पुरजोर प्रतिरोध
पुतिन ने दृढ़ता के साथ कहा कि अमेरिका कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत को प्रभावित करने और दबाने का प्रयास करता है, लेकिन पीएम मोदी जैसी मजबूत शख्सियत पर किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव बनाना अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से खुद अमेरिका के लिए नुकसानदेह साबित होगा। पुतिन के शब्दों में, ‘पीएम मोदी पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।’ भारत इन सभी बाहरी दबावों का डटकर प्रतिरोध कर रहा है और रूस, भारत को हर परिस्थिति में एक बेहद भरोसेमंद और अडिग पार्टनर मानता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों की नई धमकी और भारत का संप्रभु ऊर्जा रुख
पुतिन का यह बड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने मंगलवार (2 जून 2026) को संकेत दिया कि वह रूसी तेल खरीदने वाले देशों को दी गई प्रतिबंधों में छूट को अब समाप्त करना चाहता है। सीनेट की विदेश नीति समिति के सामने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दलील दी कि यूक्रेन-ईरान युद्ध के मद्देनजर वैश्विक तेल आपूर्ति को सुचारु रखने के लिए ये छूट सीमित समय के लिए थीं।
अमेरिका ने मार्च में प्रतिबंधों से छूट दी थी और 17 मई को इसे आखिरी बार एक महीने के लिए बढ़ाया था, जिसका फायदा भारत को भी मिला। हालांकि, इस पर भारत का सार्वजनिक रुख हमेशा की तरह बिल्कुल साफ है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश की ऊर्जा नीति का फैसला सिर्फ नई दिल्ली में होगा। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और आर्थिक आवश्यकताओं को सर्वोपरि रखते हुए ही भविष्य में भी तेल आयात से जुड़े सभी रणनीतिक फैसले लेता रहेगा।
