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CBSE OSM Controversy: CBSE आंसर शीट विवाद में बड़ा एक्शन, शिक्षा मंत्रालय ने दागी कंपनी पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

CBSE OSM Controversy

CBSE OSM Controversy:  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं (आंसर शीट्स) के कथित रूप से बदले जाने और इसके कारण मेधावी छात्रों को कम अंक मिलने का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सीबीएसई ने उस निजी कंपनी के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना शुरू कर दिया है, जिसे इस पूरे काम का टेंडर सौंपा गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब देश का शिक्षा मंत्रालय भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मंत्रालय ने संबंधित कंपनी ‘सीओईएमपीटी’ (COEMPT) को ठेका दिए जाने के पूरे घटनाक्रम पर सीबीएसई से एक विस्तृत और स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है।

टेंडर प्रक्रिया की गहन जांच शुरू, दोषी अधिकारियों पर गिरेगी सख्त गाज

शिक्षा मंत्रालय इस समय टेंडर आवंटन की प्रक्रिया से जुड़े एक-एक दस्तावेज और बारीक जानकारियों को बारीकी से खंगाल रहा है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस पूरे टेंडर प्रोसेस की निष्पक्षता और नियमों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि सीबीएसई या किसी अन्य विभाग का कोई भी अधिकारी इस दागी कंपनी को फायदा पहुंचाने या लापरवाही बरतने का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से देश भर के प्रभावित छात्रों और अभिभावकों द्वारा कॉपियां बदले जाने के इस बड़े घोटाले को सोशल मीडिया पर पूरी ताकत से उठाया जा रहा है।

विवाद में कूदे राहुल गांधी, दागी कंपनी को लेकर उठाए गंभीर सवाल

यह पूरा प्रशासनिक विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप भी ले चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील विवाद में कूद पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर तीखा निशाना साधा है। राहुल गांधी ने इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, कंपनी ‘COEMPT’ की पृष्ठभूमि पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इस कंपनी का पुराना नाम ‘ग्लोबरीना’ था, जिसे साल 2019 में तेलंगाना में गंभीर धांधलियों के चलते ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) किया जा चुका था। ऐसे में इसे सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का इतना बड़ा और गोपनीय ठेका कैसे मिला, यह जांच का मुख्य विषय है।

छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया पर खोली पोल, अन्य छात्रों का भी फूटा गुस्सा

सीबीएसई कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले कई छात्रों ने तब इस भारी गड़बड़ी का पर्दाफाश किया, जब उन्होंने बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की गई अपनी कॉपियों की स्कैन प्रति (डिजिटल कॉपी) को डाउनलोड करके देखा। छात्रों का आरोप है कि पोर्टल पर जो उत्तर पुस्तिकाएं उनके नाम और रोल नंबर के साथ दिखाई दे रही हैं, वे असल में उनकी हैं ही नहीं, बल्कि उन पर किसी और की हैंडराइटिंग है। इस मामले में 12वीं कक्षा के छात्र वेदांत ने सबसे पहले साहस दिखाते हुए माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी फिजिक्स (भौतिकी) की फर्जी आंसर शीट की तस्वीरें शेयर कर पोल खोली थी। इसके तुरंत बाद देखते ही देखते देश भर के सैकड़ों अन्य छात्रों ने भी इसी तरह के सबूतों के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट की बाढ़ ला दी।

बोर्ड ने छात्रों को सौंपी सही कॉपियां, आईआईटी के विशेषज्ञ करेंगे सिस्टम की जांच

विवाद के सोशल मीडिया पर बुरी तरह वायरल होने और चौतरफा दबाव बढ़ने के बाद सीबीएसई ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी। बोर्ड ने त्वरित कदम उठाते हुए प्रभावित छात्रों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साधा और तकनीकी त्रुटि को सुधारते हुए उन्हें उनकी वास्तविक और सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में छात्रों के सामने आ रही इस तकनीकी समस्या को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर सुलझा लिया गया है। वहीं, सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास, आईआईटी कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (DICI) के शीर्ष साइबर और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ मिलकर इस पूरे ऑनलाइन इवैल्यूएशन सिस्टम की सुरक्षा जांच कर रहे हैं, ताकि भविष्य में छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा न हो सके।

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