Headline
Manjalpur Bypoll Result
Manjalpur Bypoll Result: BJP की बड़ी जीत, सतीश पटेल ने 30 हजार+ वोटों से मारी बाजी
RSS Gen Z Outreach
RSS Gen Z Outreach: 100+ शहरों में युवाओं से संवाद करेंगे मोहन भागवत, बड़ा अभियान तैयार
Brij Bhushan Singh Case
Brij Bhushan Singh Case: बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में किया बरी
CWG 2026
CWG 2026: भारत के 39 मेडल पर PM मोदी का संदेश, खिलाड़ियों की मेहनत को सलाम
US-Iran Talks
US-Iran Talks: ट्रंप बोले- समझौता हुआ तो बचेगी कई लोगों की जान, आज से शुरू होगी वार्ता
Vitamin C in Monsoon
Vitamin C in Monsoon: सर्दी-जुकाम से बचाएगा Vitamin C, मानसून में डॉक्टरों की ये सलाह जरूर मानें हर दिन
Sawan 2026
Sawan 2026: सावन में अगर दिखें ये सपने, तो समझिए भोलेनाथ की कृपा बरसने वाली है
NEET UG Counselling 2026
NEET UG Counselling 2026: काउंसलिंग डेट घोषित, 8 सितंबर से शुरू होगा नया मेडिकल सत्र
World Breastfeeding Week
World Breastfeeding Week: स्तनपान से मां और बच्चे दोनों को फायदे, जानें मिथक और सच

Twisha Sharma Case: सर्वोच्च अदालत ने क्यों लिया एक्शन, कौन से राज आएंगे बाहर?

Twisha Sharma Case

Twisha Sharma Case:  ट्विशा शर्मा की संदिग्ध और अप्राकृतिक मौत के मामले में न्याय की उम्मीद लगाए लोगों के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से एक बेहद बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम में कथित रूप से हुए संस्थागत भेदभाव और न्यायिक प्रक्रिया में बरती गई गंभीर लापरवाहियों पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले को त्वरित सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख दी गई है। देश के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) सूर्यकांत की अगुआई में गठित तीन वरिष्ठ जजों की विशेष बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। इस बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ माननीय जस्टिस जॉयमाल्या बागची और माननीय जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली भी शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय में इस केस को 23 मई (शनिवार) की शाम 6:23 बजे आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग बिंदुओं पर होगी जिरह

इस पूरे मामले का एक कानूनी पहलू यह भी है कि सोमवार को ही देश की दो बड़ी अदालतों में इस पर एक साथ सुनवाई होनी है। जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट इस केस से जुड़े संस्थागत पक्षपात, प्रभावशाली लोगों के दबाव और पूरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने के गंभीर आरोपों की समीक्षा करेगा; वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी इसी दिन सुनवाई निर्धारित है। हालांकि, हाई कोर्ट की यह सुनवाई ट्विशा शर्मा की सास और पूर्व जिला जज राजबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर केंद्रित होगी, जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए अपनी याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट का दखल इस बात की ओर इशारा करता है कि मामले की निष्पक्षता को लेकर शीर्ष अदालत बेहद गंभीर है।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के विशेष नोट पर चीफ जस्टिस ने दी स्वतः संज्ञान की मंजूरी

दरअसल, इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के पटल पर लाने में अदालत की रजिस्ट्री ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई है। रजिस्ट्री विभाग ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष एक विस्तृत प्रशासनिक नोट प्रस्तुत कर इस पूरे प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेने की विशेष अनुमति मांगी थी। रजिस्ट्री द्वारा तैयार किए गए इस नोट में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और जमीनी परिस्थितियों का हवाला देते हुए स्थानीय पुलिस व प्रशासन की जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। नोट में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि आम जनता और समाज के एक बड़े वर्ग में यह धारणा घर कर रही है कि रसूख के कारण जांच की दिशा को मोड़ने का प्रयास किया गया है, क्योंकि मृतका की सास खुद एक सेवानिवृत्त जिला जज हैं।

इसके अलावा नोट में मृतका ट्विशा शर्मा को दी जाने वाली मानसिक प्रताड़ना, भारी दहेज की मांग और संस्थागत स्तर पर रसूखदारों द्वारा मामले को दबाने के आरोपों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। इस नोट के आधार पर ही इस मामले को “इन री: शादीशुदा महिला की असामान्य मौत में संस्थागत पक्षपात और जांच में गड़बड़ी” के शीर्षक के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भविष्य के लिए कड़े दिशा-निर्देश भी जारी कर सकता है।

ट्विशा के जीजा ने लगाया आरोप, कहा—आरोपी पति को बचा रहा है पूरा सिस्टम

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद से ही उनका मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह लगातार पुलिस को छका रहा था और फरार चल रहा था। लेकिन शुक्रवार, 22 मई को वह अचानक बेहद नाटकीय ढंग से जबलपुर हाई कोर्ट परिसर में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के लिए पहुंचा। इस दौरान कोर्ट परिसर के भीतर की तस्वीरें बेहद चौंकाने वाली थीं। समर्थ को पूरे समय दर्जनों वकीलों ने एक सुरक्षा घेरा बनाकर कवर कर रखा था। वहां मौजूद मीडियाकर्मियों को भी समर्थ की वीडियो रिकॉर्डिंग या कवरेज करने से बलपूर्वक रोक दिया गया और पत्रकारों के साथ जमकर धक्का-मुक्की की गई।

इस घटना के बाद ट्विशा का पक्ष रखने वाले वकीलों ने भी आरोप लगाया कि कोर्ट परिसर में उनके साथ खुलेआम बदसलूकी की गई। वहीं, ट्विशा के जीजा ने बेहद भावुक और आक्रोशित होकर आरोप लगाया कि पूरा प्रशासनिक और स्थानीय सिस्टम इस समय आरोपी समर्थ सिंह के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समर्थ सुबह से ही जबलपुर शहर में घूम रहा था, तो लुकआउट नोटिस और ₹30,000 का इनाम घोषित होने के बावजूद स्थानीय पुलिस या गठित विशेष जांच दल (SIT) की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी? उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार को ही कोर्ट रूम से बाहर धकेल दिया गया।

एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने बयां की कोर्ट रूम के भीतर की खौफनाक हकीकत

इस पूरे घटनाक्रम के चश्मदीद गवाह और पीड़ित पक्ष के एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट रूम के भीतर की खौफनाक और हैरान करने वाली हकीकत बयां की है। उन्होंने बताया, “कल शाम जब मैं जबलपुर में डिस्ट्रिक्ट और सेशंस कोर्ट के कमरा नंबर 32 में दाखिल हुआ, तो मुझे मुख्य आरोपी समर्थ वहां आराम से बैठा हुआ मिला। जब मैंने उसके आस-पास खड़े संदिग्ध लोगों से उसकी पहचान पूछी, तो उन्होंने पहले तो उसे पहचानने से ही साफ इनकार कर दिया और फिर उसे वहां से भगाने की कोशिश करने लगे।

जब हमने कानून का हवाला देते हुए उसे ठीक से सरेंडर करने को कहा, तो वहां मौजूद कई वकीलों के भेष में आए लोगों ने हमारे और मीडियाकर्मियों के साथ जमकर मारपीट और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। वे आरोपी को सुरक्षा देकर दूसरी बिल्डिंग के एक प्राइवेट चैंबर में ले गए, जहां हमारे साथ अश्लील गाली-गलौज और हाथापाई की गई। मुझे संदेह है कि वे लोग असली वकील थे या वकीलों की पोशाक में आए गुंडे थे।”

अंधेरे कोर्ट रूम में बंद थी लाइट, चल रहे थे पंखे; कटघरे के बजाय कुर्सी पर था आरोपी

अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने स्थानीय न्यायिक व्यवस्था के रवैए पर भी बेहद कड़े और गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी समर्थ सिंह ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर काले चश्मे पहन रखे थे और खुद को पूरी तरह से एक कपड़े से ढक रखा था ताकि उसके चेहरे के हाव-भाव किसी को दिखाई न दें। अनुराग ने सवाल उठाते हुए कहा, “हमें बताया गया था कि वह पहले डिस्ट्रिक्ट जज के सामने गया था और जज साहब ने कथित तौर पर उसे भोपाल कोर्ट में जाकर सरेंडर करने की सलाह दी थी।

हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन उस समय की एक लाइव तस्वीर सोशल मीडिया पर घूम रही है, जिसमें आरोपी समर्थ कोर्ट रूम के अंदर कटघरे में खड़े होने के बजाय वकीलों के लिए आरक्षित विशेष कुर्सियों पर ठाट से बैठा हुआ दिखाई दे रहा है। नियम कहते हैं कि अगर डिस्ट्रिक्ट जज ने उसका सरेंडर लेने से इनकार कर दिया था, तो उसे तुरंत पुलिस कस्टडी में दिया जाना चाहिए था।

जब मैं उस कोर्ट रूम में घुसा, तो वहां की लाइटें पूरी तरह बंद थीं, लेकिन आरोपी के लिए एसी और पंखे चालू रखे गए थे। जब मैंने कोर्ट स्टाफ से पूछा कि उन्होंने किस कानूनी अधिकार के तहत एक इनामी भगोड़े को कोर्ट रूम में इस तरह बैठा रखा है, तो वहां अचानक अफरा-तफरी मच गई और आरोपी को भगा दिया गया।” अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट इस पूरे घटनाक्रम की परतों को खोलेगा।

Read More:  Sunday Tulsi Rules : रविवार को तुलसी में जल देना पड़ सकता है भारी, जानिए असली वजह

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
पहले सावन सोमवार की पूजा ऐसे करें सफल कहां से आया फ्रेंडशिप डे का विचार? तवे पर बार-बार चिपक रहा डोसा? नमक बरसात में क्यों पकड़ लेता है नमी? इन छोटे बदलावों से सिंपल ब्लाउज बनेगा डिजाइनर पीस