Pahalgam Attack NIA : जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में पिछले साल हुए जघन्य आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है। एनआईए द्वारा अदालत में दाखिल की गई विस्तृत चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे खूनी हमले की साजिश पड़ोसी देश पाकिस्तान में रची गई थी। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस आत्मघाती हमले का मुख्य मास्टरमाइंड प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार कमांडर सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा था। साजिद जट्ट पाकिस्तान के लाहौर स्थित कसूर इलाके में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देता है। वह इस हमले के दौरान सीधे तौर पर मुख्य हैंडलर की भूमिका निभा रहा था और सीमा पार से आतंकियों को पल-पल की निर्देश (रियल टाइम डायरेक्शन) दे रहा था।
बैसरन घाटी में हुआ था टारगेटेड हमला, छब्बीस निर्दोष पर्यटकों की गई थी जान
एनआईए द्वारा 15 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई इस चार्जशीट के मुख्य अंश अब सार्वजनिक हो चुके हैं। इसके मुताबिक, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम से महज छह किलोमीटर दूर स्थित खूबसूरत बैसरन घाटी में आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस कायरतापूर्ण हमले में कुल 26 मासूम पर्यटकों (टूरिस्ट्स) की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। चार्जशीट में यह बेहद संवेदनशील बात सामने आई है कि आतंकियों ने वहां मौजूद लोगों की धार्मिक पहचान की पुष्टि करने के बाद उन्हें विशेष रूप से अपना निशाना बनाया था। एनआईए ने इसे पूरी तरह से धर्म के आधार पर किया गया एक ‘टारगेटेड मर्डर’ (लक्षित हत्या) करार दिया है, जिसमें 25 बाहरी राज्यों के पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक मारा गया था।
स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की घोर लापरवाही और आतंकियों की घुसपैठ की इनसाइड स्टोरी
जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों— परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एनआईए का कहना है कि यदि इन दोनों गाइडों ने समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी होती, तो इस भीषण नरसंहार को आसानी से टाला जा सकता था। इन दोनों ने बैसरन घाटी में संदिग्ध हथियारबंद आतंकियों को देखा था, लेकिन डर या मिलीभगत के कारण पुलिस को नहीं बताया। फिलहाल दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमले से एक दिन पहले, तीनों पाकिस्तानी आतंकियों ने गाइड परवेज की झोपड़ी में खुदा के नाम पर मदद मांगकर खाना खाया था और जाते समय अपने साथ अतिरिक्त राशन भी ले गए थे। वारदात को अंजाम देने के बाद आतंकियों ने धार्मिक नारे लगाते हुए हवा में जश्न मनाते हुए फायरिंग भी की थी।
‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का संस्थापक और जेड मोड़ टनल हमले का मुख्य आरोपी
मास्टरमाइंड साजिद जट्ट का आतंकी इतिहास काफी पुराना और खौफनाक रहा है। वह साल 2005 में अवैध रूप से नियंत्रण रेखा (LoC) पार करके दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में घुसा था। एक मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद से वह कृत्रिम (नकली) पैर का इस्तेमाल करता है और इसी वजह से आतंकी हलकों में उसे ‘लंगड़ा’ कहा जाता है। साल 2019 में उसी ने लश्कर के मुखौटा संगठन ‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) की स्थापना की थी। उसे जम्मू-कश्मीर में आतंकी ऑपरेशन्स का मुख्य कमांडर माना जाता है। साजिद जट्ट का नाम श्रीनगर की जेड मोड़ टनल में हुई फायरिंग (जिसमें 7 लोगों की मौत हुई थी), पुंछ एयरफोर्स काफिला हमला, डांगरी हमला और रियासी की बस पर हुए आतंकी हमलों की साजिशों से भी मजबूती से जुड़ा हुआ है।
भारत का करारा पलटवार
भारतीय सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए एक बेहद आक्रामक रुख अपनाया। एनआईए के मुताबिक, इस हमले में सीधे तौर पर शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकियों— फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी को सेना ने 28 जुलाई 2025 को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मार गिराया था। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट पर भारत सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।
इसके अलावा, भारत ने इस आतंकी हमले का अंतिम बदला लेने के लिए 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पीओके (PoK) की सीमा के भीतर घुसकर एक बड़ी एयर स्ट्राइक की, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने 24 घातक मिसाइलें दागकर 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्यों सहित 100 से ज्यादा खूंखार आतंकी मारे गए थे।
