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Abhishek Sayani Flat Row : अभिषेक और सयानी के नाम पर मिले फ्लैट का वह सच, जिसने सबको चौंकाया?

Abhishek Sayani Row

Abhishek Sayani Flat Row : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीते कुछ दिनों से ‘कोलकाता फ्लैट विवाद’ को लेकर भारी घमासान मचा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो दिग्गज नेताओं—सांसद अभिषेक बनर्जी और सांसद सयानी घोष—का नाम एक बेनामी संपत्ति से जोड़े जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया था। हालांकि, अब इस पूरे मामले में एक ऐसा चौंकाने वाला 360 डिग्री का मोड़ आया है, जिसने न सिर्फ विरोधियों के दावों की हवा निकाल दी है, बल्कि पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया है। दरअसल, जिस आलीशान फ्लैट को लेकर टीएमसी नेताओं को घेरा जा रहा था, उसके असली मालिक कोई राजनेता नहीं बल्कि बिल्कुल आम इंसान हैं, जिनका नाम संयोगवश इन नेताओं से हूबहू मिलता है।

कोलकाता नगर निगम की जांच में सामने आया सच: दरवाजे पर लगी नेमप्लेट ने खोला राज

इस हाई-प्रोफाइल विवाद की हकीकत उस समय सामने आई जब बुधवार को कोलकाता नगर निगम (KMC) के अधिकारियों की एक विशेष टीम मामले की जांच के लिए संबंधित इमारत पर पहुंची। अधिकारियों ने जब विवादित फ्लैट (19 D, सेवन टैंक्स लेन रोड, पिन कोड- 700030) के दरवाजे पर दस्तक दी, तो वहां लगी नेमप्लेट देखकर वे भी हैरान रह गए। उस नेमप्लेट पर साफ अक्षरों में ‘अभिषेक-सानी’ लिखा हुआ था। दरवाजा खटखटाने पर अंदर से जो शख्स बाहर आया, उसने जब अपना और अपनी पत्नी का परिचय दिया, तो वहां मौजूद सभी प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए। सामने खड़े व्यक्ति ने स्पष्ट किया कि यह फ्लैट उनका वैध निवास स्थान है और उनका टीएमसी के सांसदों से कोई संबंध नहीं है।

निजी कंपनी के कर्मचारी निकले असली अभिषेक बनर्जी: पत्नी सयानी घोष हैं स्कूल शिक्षिका

फ्लैट के असली मालिक ने अपनी पहचान उजागर करते हुए बताया कि उनका नाम भी अभिषेक बनर्जी है, लेकिन वह किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं बल्कि एक निजी संस्थान (प्राइवेट फर्म) में कार्यरत एक साधारण कामकाजी पेशेवर हैं। उन्होंने आगे बताया कि उनकी पत्नी का नाम सयानी घोष है, जो पेशे से एक सम्मानित स्कूल टीचर (शिक्षिका) हैं। यह पूरा परिवार पिछले कई सालों से इस सोसाइटी में बेहद शांतिपूर्ण ढंग से रह रहा है। इस फ्लैट में अभिषेक बनर्जी अपनी बुजुर्ग मां, पत्नी सयानी और अपने दो मासूम बच्चों के साथ रहते हैं। इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया कि केवल नाम की समानता (Identity Coincidence) के कारण इस निर्दोष परिवार को राजनीतिक खींचतान का शिकार बनना पड़ा।

पीड़ित परिवार ने बयां किया अपना दर्द: कहा- जांच में हमेशा किया है पूरा सहयोग

इस अनावश्यक विवाद और मीडिया ट्रायल से पीड़ित मकान मालिक अभिषेक बनर्जी बेहद आहत और दुखी नजर आए। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनका और उनके परिवार का राजनीति की दुनिया से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने बताया कि वह साल 2022 से इस फ्लैट में सपरिवार रह रहे हैं और उनके पास इस संपत्ति के सभी वैध कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। अभिषेक ने यह भी साझा किया कि इससे पहले भी नगर निगम के अधिकारी इस पते पर वेरिफिकेशन के लिए आए थे और उन्होंने हमेशा एक जिम्मेदार नागरिक की तरह प्रशासनिक जांच में पूरा सहयोग किया है। इस बार भी उन्होंने अधिकारियों को सभी जरूरी कागजात दिखाए ताकि उनके परिवार को मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।

टीएमसी सांसद सयानी घोष ने पहले ही आरोपों को नकारा: कानूनी कार्रवाई की दी थी चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम से पहले ही टीएमसी सांसद सयानी घोष ने अपने ऊपर लग रहे इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने मीडिया के सामने आकर बेहद सख्त लहजे में कहा था कि कोलकाता की इस कथित विवादित संपत्ति से उनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई लेना-देना नहीं है। सयानी घोष ने स्पष्ट किया कि उनके नाम पर देश में जो भी चल-अचल संपत्ति मौजूद है, उसकी पूरी और सटीक जानकारी उनके द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए आधिकारिक चुनावी हलफनामे (Affidavit) में दर्ज है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी थी कि यदि किसी को कोई संदेह है, तो वह सरकारी रिकॉर्ड और हलफनामे की जांच कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी जारी की थी।

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