Headline
Suvendu Adhikari
Suvendu Adhikari : शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, नंदीग्राम छोड़ेंगे, भवानीपुर सीट से बने रहेंगे विधायक
PM Modi Convoy Cut
PM Modi Convoy Cut : देश के लिए पीएम मोदी का त्याग, ईंधन बचाने के लिए खुद उठाया बड़ा कदम
Prateek Yadav death
Prateek Yadav death : प्रतीक यादव पोस्टमार्टम रिपोर्ट खुलासा, फेफड़ों में खून का थक्का जमने और कार्डियक अरेस्ट से मौत
NEET UG 2026 Paper Leak
NEET UG 2026 Paper Leak : नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला, सीबीआई का बड़ा एक्शन, तीन राज्यों से 5 गिरफ्तार
Beetroot Juice
Beetroot Juice : क्या आप जानते हैं चुकंदर के जूस का जादू? बस एक गिलास और ये बदलाव
Dwarkadhish Temple History
Dwarkadhish Temple History : द्वारकाधीश मंदिर का इतिहास और रहस्य, समुद्र किनारे बसी भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी
Vijay’s Astrologer
Thalapathy Vijay’s Astrologer : विजय की जीत का ‘राज’ बताने वाले ज्योतिषी की चांदी, मुख्यमंत्री ने दिया खास तोहफा
NEET 2026 Paper Leak
NEET 2026 Paper Leak : सीबीआई की पहली बड़ी स्ट्राइक, जमवारामगढ़ और नासिक से गिरफ्तारियां
Chandranath Rath Murder Case
Chandranath Rath Murder Case : शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच करेगी CBI, बंगाल सरकार की सिफारिश

Apara Ekadashi 2026: पुण्य प्राप्ति का महासंयोग, जानें पांडवों से जुड़ा यह गहरा रहस्य और शुभ मुहूर्त

Apara Ekadashi 2026

Apara Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथियों का विशेष स्थान है, लेकिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी अपना एक विशिष्ट आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखती है। इसे ‘अचला एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जो जातक इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे असीम पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। यह तिथि केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध महाभारत काल के पांडवों और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य मार्गदर्शन से भी है।

Apara Ekadashi 2026: महाभारत काल और पांडवों से जुड़ा अनसुना रहस्य

अपरा एकादशी का इतिहास पांडवों के जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण समय से जुड़ा है। महाभारत युद्ध के पश्चात, विजयी होने के बावजूद पांडवों का मन अशांत था। अपने ही गुरुओं, पितामह और सगे-संबंधियों के विरुद्ध युद्ध करने के कारण वे आत्मग्लानि और पाप बोध से घिरे हुए थे। वनवास और युद्ध के कष्टों ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस ग्लानि से मुक्ति दिलाने और आध्यात्मिक शक्ति की पुनर्प्राप्ति के लिए अपरा एकादशी व्रत का विधान बताया। श्रीकृष्ण के अनुसार, यह व्रत जातक को ब्रह्महत्या, परनिंदा और पूर्व जन्मों के दोषों से मुक्ति प्रदान कर जीवन में नई चेतना भरता है।

Apara Ekadashi 2026: अपार धन और यश की प्राप्ति का माध्यम

‘अपरा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ही होता है—असीम या अपार। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किए गए व्रत, दान और तप का फल अनंत गुना बढ़कर मिलता है। वनवास के दौरान जब पांडवों ने अपना राज-पाट और मान-सम्मान खो दिया था, तब इसी व्रत के प्रभाव से उन्हें वह आंतरिक बल और संकल्प शक्ति मिली, जिससे वे अधर्म के विरुद्ध खड़े हो सके। पद्म पुराण में उल्लेख है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को संसार में कीर्ति मिलती है और मृत्यु पश्चात मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी है यह पावन तिथि

धार्मिक शास्त्रों और विद्वानों का मानना है कि अपरा एकादशी का फल किसी साधारण पूजा से कहीं अधिक है। इस दिन पूर्ण निष्ठा से व्रत रखने पर जातक को वही पुण्य प्राप्त होता है, जो महान अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है। यदि कोई व्यक्ति आर्थिक संकट, निरंतर असफलता या मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो उसके लिए यह व्रत रामबाण सिद्ध होता है। यह जातक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और नकारात्मकता का नाश करता है।

पूजा की सरल विधि और शुभ फल का मार्ग

अपरा एकादशी के दिन पूजा का विशेष फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन अनिवार्य है:

  • संकल्प और स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

  • स्थापना: भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से अभिषेक कर पीले वस्त्र, पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

  • मंत्र जाप: ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर मानसिक या माला से जाप करें।

  • सात्विकता: इस दिन तामसिक भोजन और क्रोध से दूर रहकर मन को पूरी तरह भक्ति में लीन रखें।

  • आरती और दान: संध्या समय भगवान की आरती करें और अगले दिन यानी द्वादशी को पारण से पूर्व दान-पुण्य अवश्य करें।

अपरा एकादशी का व्रत न केवल पापों का शमन करता है, बल्कि यह व्यक्ति को पांडवों की तरह कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहने की शक्ति देता है। 13 मई 2026 को पड़ने वाली यह एकादशी भक्ति और मोक्ष की राह पर चलने वाले हर श्रद्धालु के लिए एक महान अवसर है।

Read More:  Bhawanipur Election Results: भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी ने खिलाया कमल, ममता बनर्जी को मिली सबसे करारी हार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top