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NITI Aayog : नीति आयोग में बंगाल का जलवा, अशोक लाहिड़ी बने नए उपाध्यक्ष, गोवर्धन दास को मिली बड़ी जिम्मेदारी!

NITI Aayog :

NITI Aayog : भारत के नीति निर्धारण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संस्थान, नीति आयोग में एक बड़ा फेरबदल हुआ है। केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की दो दिग्गज हस्तियों को इस संस्थान की कमान सौंपी है। विख्यात अर्थशास्त्री डॉ. अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. गोवर्धन दास सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। ये नियुक्तियां न केवल उनकी व्यक्तिगत विशेषज्ञता का सम्मान हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बंगाल की बौद्धिक विरासत और विशेषज्ञता की महत्वपूर्ण भागीदारी को भी रेखांकित करती हैं।

NITI Aayog :  डॉ. अशोक लाहिड़ी: चार दशकों का आर्थिक अनुभव अब नीति आयोग के पास

नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. अशोक लाहिड़ी का नाम अर्थशास्त्र की दुनिया में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘विकसित भारत’ के विजन को गति देने के लिए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. लाहिड़ी का करियर 40 वर्षों से अधिक का है, जिसमें उन्होंने भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार और 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इसके अतिरिक्त, उनके पास विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसी वैश्विक संस्थाओं में काम करने का व्यापक अनुभव है। प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के पूर्व छात्र रहे लाहिड़ी को जटिल आर्थिक नीतियों को सरल बनाने और बंगाल की प्रगति के लिए मुखर रहने के लिए जाना जाता है।

NITI Aayog : डॉ. गोवर्धन दास: विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र का वैश्विक चेहरा

नीति आयोग के नए सदस्य के रूप में शामिल हुए डॉ. गोवर्धन दास एक विश्व प्रसिद्ध मॉलिक्यूलर साइंस प्रोफेसर हैं। इम्यूनोलॉजी, संक्रामक रोगों और सेल बायोलॉजी के क्षेत्र में उनका शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। विशेष रूप से तपेदिक (Tuberculosis) के रोगजनन पर उनके काम ने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी है। वर्तमान में भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) के निदेशक के रूप में कार्यरत डॉ. दास ने लंबे समय तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में भी अध्यापन किया है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को छोड़ मातृभूमि की सेवा का संकल्प

डॉ. दास का वैज्ञानिक सफर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल और दक्षिण अफ्रीका की क्वाज़ुलु-नटाल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण शोध किए हैं। एक सफल अंतरराष्ट्रीय करियर होने के बावजूद, उन्होंने अपनी मातृभूमि की सेवा करने के उद्देश्य से भारत लौटने का साहसिक निर्णय लिया। उनकी यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि देश के वैज्ञानिक और बौद्धिक विकास के लिए वे कितने समर्पित हैं।

संघर्ष और अदम्य साहस की मिसाल है डॉ. दास का जीवन

डॉ. गोवर्धन दास की व्यक्तिगत कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम प्रेरणादायक नहीं है। उनका जन्म बांग्लादेश से आए एक हिंदू दलित शरणार्थी परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता ने उत्पीड़न से बचने के लिए अपना घर-बार छोड़ दिया था और बंगाल में अत्यंत गरीबी में जीवन बिताया। उनके पिता एक निर्धन किसान थे और आर्थिक तंगी के कारण डॉ. दास को स्ट्रीट लाइट की रोशनी में अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ी। उन्होंने दंगों के दौरान अपने परिवार के 17 सदस्यों को खोने का गहरा आघात भी झेला, लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों ने उनके संकल्प को कभी टूटने नहीं दिया।

बंगाल की मेधा से राष्ट्र-निर्माण को मिलेगी नई दिशा

नीति आयोग में इन दो दिग्गजों का शामिल होना यह स्पष्ट करता है कि सरकार विशेषज्ञों के माध्यम से नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाना चाहती है। डॉ. लाहिड़ी की आर्थिक दूरदर्शिता और डॉ. दास का वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिलकर भारत के भविष्य के रोडमैप को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। डॉ. दास का जीवन उन लाखों युवाओं के लिए आशा की किरण है जो अभावों के बीच बड़े सपनों को साकार करना चाहते हैं। बंगाल की यह बौद्धिक शक्ति अब पूरे देश के समग्र विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

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