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Raghav Chadha BJP : राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ 7 सांसद भाजपा में शामिल, आप में फूट

Raghav Chadha BJP

Raghav Chadha BJP :  दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) इस वक्त अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर एक बड़ी फूट पड़ गई है, जिसके तहत राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, डॉ. संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम केवल तीन सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दिग्गज क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रम साहनी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। इन नेताओं के जाने से ‘आप’ के संसदीय दल का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे राजनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

Raghav Chadha BJP :  राघव चड्ढा का तीखा हमला: “पार्टी अब भ्रष्टाचार के दलदल में है”

पार्टी के सबसे युवा और चर्चित चेहरों में से एक राघव चड्ढा ने अपने इस्तीफे के साथ ही अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने इस पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा था और वह इसके संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो पार्टी भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर अस्तित्व में आई थी, आज वही “कंपरमाइज्ड” लोगों के हाथों में खेल रही है। चड्ढा ने दावा किया कि पार्टी अब देश हित के बजाय व्यक्तिगत फायदों के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक साल से उनकी दूरी का मुख्य कारण पार्टी की संदिग्ध गतिविधियाँ और गलत काम थे, जिनके साथ वे खड़े नहीं होना चाहते थे।

Raghav Chadha BJP :  संदीप पाठक का छलका दर्द: “देश सेवा के लिए आए थे, राजनीति के लिए नहीं”

पार्टी के रणनीतिकार माने जाने वाले डॉ. संदीप पाठक ने भी भारी मन से ‘आप’ से अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले पाठक ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसा कड़ा फैसला लेना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वे केवल देश सेवा के उद्देश्य से राजनीति में आए थे और हमेशा अरविंद केजरीवाल को अपना आदर्श मानकर पार्टी को सर्वोपरि रखा। पाठक के अनुसार, अब पार्टी के भीतर स्थितियां बदल चुकी हैं और वे अपनी ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ वहां और अधिक समय तक नहीं रह सकते। उनके जाने को संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

अशोक मित्तल और राघव चड्ढा की नई जुगलबंदी: बदल गए समीकरण

हाल ही में पार्टी के भीतर समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा गया था, जब राघव चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाया गया था। माना जा रहा था कि पार्टी राघव को किनारे कर रही है। हालांकि, अब अशोक मित्तल खुद राघव चड्ढा के साथ सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही अशोक मित्तल के ठिकानों पर छापेमारी भी हुई थी, जिसे राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। अब ये दोनों नेता एक साथ आकर बीजेपी की ताकत बढ़ा रहे हैं, जो आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है।

पार्टी के भविष्य पर संकट: क्या ‘आप’ खुद को बचा पाएगी?

राघव चड्ढा ने दावा किया है कि राज्यसभा के दो-तिहाई सांसद बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो सदन में आम आदमी पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह जैसे प्रभावशाली चेहरों के जाने से पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुँचा है। जानकारों का कहना है कि पार्टी के पुराने और समर्पित सदस्यों का इस तरह साथ छोड़ना यह संकेत देता है कि आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका है। अब देखना यह होगा कि आगामी चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल इस बिखराव को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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