West Bengal Voter List : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रिया में शुचिता लाने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार जिलावार मतदाताओं की विस्तृत सूची सार्वजनिक की है। इस नई सूची के आते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए हैं। यह कार्रवाई फर्जी मतदान को रोकने और केवल वास्तविक नागरिकों को मताधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
West Bengal Voter List : जांच के घेरे में थे 60 लाख से अधिक नाम: डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया जारी
निर्वाचन आयोग द्वारा साझा की गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, कुल 6,006,675 मतदाता प्रारंभिक रूप से गहन जांच के दायरे में रखे गए थे। सूक्ष्म जांच और भौतिक सत्यापन के बाद, इनमें से 2,716,393 नामों को आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के अधीन कुल मतदाताओं में से 5,984,512 व्यक्तियों का विवरण पोर्टल पर प्रकाशित किया जा चुका है। वर्तमान में लगभग 22,163 मतदाताओं के मामले सुलझा लिए गए हैं, लेकिन तकनीकी कारणों और डिजिटल हस्ताक्षर न होने के कारण उन्हें अंतिम रूप देना बाकी है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, हटाए गए नामों की संख्या में और भी इजाफा होने की संभावना है।
West Bengal Voter List : सीमावर्ती जिलों में बड़े पैमाने पर कटौती: कूचबिहार से दक्षिण 24 परगना तक असर
वोटर लिस्ट में हुई इस भारी कटौती का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में देखने को मिला है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, और उत्तर व दक्षिण 24 परगना जैसे संवेदनशील जिलों में बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं। इन क्षेत्रों में घुसपैठ और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए नाम जुड़वाने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। आयोग की इस कार्रवाई से उन क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं, जहां हार-जीत का अंतर बहुत कम रहता है।
90 लाख से अधिक नाम कटे: फरवरी से अब तक की कार्रवाई का ब्योरा
मतदाता सूची को शुद्ध करने का यह अभियान पिछले कई महीनों से जारी है। 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित शुरुआती अंतिम सूची में ही लगभग 6,366,952 लोगों के नाम काट दिए गए थे। ताजा जिलावार रिपोर्ट को शामिल करने के बाद, अब तक हटाए गए कुल नामों की संख्या 9,083,345 (90 लाख से अधिक) पहुंच गई है। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। आयोग का तर्क है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और केवल उन्हीं नामों को हटाया गया है जिनका विवरण संदिग्ध था या जो क्षेत्र में स्थायी रूप से निवास नहीं कर रहे थे।
चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्ष मतदान की प्रतिबद्धता
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक वैधानिक प्रक्रिया है। जिलावार सूची जारी करने का उद्देश्य नागरिकों को यह सुविधा देना है कि वे स्वयं देख सकें कि उनका नाम सूची में है या नहीं। आयोग ने उन मतदाताओं को अपील की है जिनके नाम गलती से कट गए हैं, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर उचित दस्तावेजों के साथ दावा पेश कर सकते हैं। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले, आयोग का लक्ष्य एक ऐसी त्रुटिहीन वोटर लिस्ट तैयार करना है, जिस पर कोई भी राजनीतिक दल उंगली न उठा सके।
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