Malda Judge Hostage Case : पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की अभूतपूर्व घटना पर सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ऑनलाइन पेश हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी, मालदा के डीएम और एसएसपी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि राज्य के आला अधिकारियों को अपना बुनियादी दायित्व तक नहीं पता है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के केंद्रीय बलों (CRPF) के खिलाफ दिए गए कथित भड़काऊ बयानों का भी जिक्र किया, जिस पर कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती है, तो न्यायपालिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
Malda Judge Hostage Case : मालदा का काला बुधवार: 9 घंटे तक खौफ के साये में रहे 7 जज
यह पूरा विवाद 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ, जब मालदा के कालियाचक में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के कार्य में जुटे निचली अदालत के 7 जजों को उग्र भीड़ ने घेर लिया। न्यायिक अधिकारियों को लगभग 9 घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया, जबकि स्थानीय पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप और आधी रात को भारी हंगामे के बाद इन अधिकारियों को सुरक्षित निकाला जा सका, लेकिन उस दौरान भी उन पर पथराव किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और सीधे अधिकार क्षेत्र को चुनौती मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया था।
Malda Judge Hostage Case : अनुच्छेद 142 का प्रयोग: NIA को सौंपी गई सभी 12 एफआईआर
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग किया। कोर्ट ने आदेश दिया कि मालदा कांड से जुड़ी सभी 12 एफआईआर की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। हालांकि एनआईए के वकील एसवी राजू ने तर्क दिया कि यह मामला उनके शेड्यूल्ड अपराधों के दायरे में नहीं आता, लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच के लिए एनआईए ही इस मामले को संभालेगी। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि अब तक गिरफ्तार किए गए सभी 26 आरोपियों की कस्टडी तुरंत एनआईए को सौंप दी जाए।
मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर सियासी घमासान और कोर्ट का दखल
सोमवार शाम को हुई विशेष सुनवाई में राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रगति पर भी चर्चा हुई। चुनाव आयोग ने कोर्ट को सूचित किया कि दावों के निपटारे का कार्य अंतिम चरण में है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लगभग 60 लाख लोगों को नोटिस दिए गए थे, जिनमें से तकनीकी कारणों से 45 प्रतिशत के दावे खारिज कर दिए गए हैं। टीएमसी ने मांग की कि मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहनी चाहिए ताकि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।
अपील ट्रिब्यूनल के लिए कमेटी का गठन: अगली सुनवाई 13 अप्रैल को
वोटर लिस्ट विवाद के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हाई कोर्ट के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों की एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया। यह कमेटी अपील ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली और नियमों को निर्धारित करेगी, जिससे उन लोगों को राहत मिल सके जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक सुधार साथ-साथ चलेंगे। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें एनआईए अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर सकती है।
