US-Iran War Cost: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच छिड़ा युद्ध अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। पिछले 15 दिनों से जारी इस निरंतर गोलाबारी और सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को हिलाकर रख दिया है। स्थिति उस वक्त और भी भयावह हो गई जब ईरान ने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हार्मूज’ (Hormuz Strait) पर पूर्ण नाकेबंदी की घोषणा कर दी। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे दुनिया भर में अस्थिरता का माहौल है।
US-Iran War Cost: तेहरान से इस्फहान तक बमबारी: अमेरिकी बी-52 बॉम्बर्स का एक्शन
जवाबी कार्रवाई के रूप में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर घुसकर उसके रणनीतिक ठिकानों को तबाह करना शुरू कर दिया है। ताजा सैन्य इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना के घातक बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर विमान तेहरान और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में स्थित ईरानी सैन्य अड्डों पर भारी बमबारी कर रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेशों के तहत संचालित इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं और परमाणु अनुसंधान केंद्रों को निष्क्रिय करना है। इन हवाई हमलों में ईरान की सैन्य अवसंरचना (Military Infrastructure) को व्यापक क्षति पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
US-Iran War Cost: ईरान का पलटवार: मिसाइल और ड्रोन हमलों से थर्राया क्षेत्र
भारी नुकसान के बावजूद ईरानी सेना पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान ने अपनी ‘प्रॉक्सि’ सेनाओं और उन्नत मिसाइल तकनीक का उपयोग करते हुए अमेरिकी ठिकानों और इजरायली शहरों पर लगातार ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले जारी रखे हैं। यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच न रहकर एक बहुपक्षीय युद्ध का रूप ले चुका है। दोनों ओर से हो रहे हमलों ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है, जहाँ कूटनीतिक बातचीत के रास्ते फिलहाल बंद नजर आ रहे हैं और सैन्य समाधान ही प्राथमिकता बना हुआ है।
युद्ध का आर्थिक बोझ: केविन हैसेट ने किया 12 अरब डॉलर के खर्च का खुलासा
युद्ध की विभीषिका के बीच अब इसकी आर्थिक कीमत का आधिकारिक आंकड़ा भी सामने आ गया है। अमेरिका की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने रविवार को सीबीएस न्यूज के एक कार्यक्रम में सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ईरान के विरुद्ध चलाए जा रहे विभिन्न सैन्य ऑपरेशनों में अमेरिका अब तक लगभग 12 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर चुका है। यह खर्च हथियारों की तैनाती, रसद आपूर्ति, और मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैन्य बलों के संचालन पर हुआ है। इतनी बड़ी राशि महज 15 दिनों में खर्च होना यह दर्शाता है कि यह युद्ध कितना खर्चीला और सघन होता जा रहा है।
भविष्य की रणनीति और बजट: क्या कांग्रेस से लेनी होगी अतिरिक्त मदद?
कार्यक्रम के दौरान जब हैसेट से यह पूछा गया कि क्या अमेरिका को युद्ध जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त बजटीय सहायता की आवश्यकता होगी, तो उन्होंने वर्तमान स्थिति को नियंत्रण में बताया। हैसेट के अनुसार, फिलहाल रक्षा मंत्रालय के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन यदि युद्ध और लंबा खिंचता है, तो बजट की समीक्षा अनिवार्य होगी। इस वित्तीय निगरानी का जिम्मा प्रबंधन और बजट कार्यालय (OMB) और उसके निदेशक रसेल वॉट के पास है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या अमेरिका अपने नागरिकों के टैक्स का एक और बड़ा हिस्सा इस विदेशी युद्ध की भेंट चढ़ाएगा या शांति की कोई नई पहल होगी।
