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Delhi Excise Policy: केजरीवाल-सिसोदिया की बढ़ी मुश्किलें? हाईकोर्ट ने CBI की अपील पर जारी किया नोटिस!

Delhi Excise Policy

Delhi Excise Policy: दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले के मामले में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर विचार किया। अदालत ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 लोगों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। अब इस कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव 16 मार्च को तय किया गया है, जब कोर्ट मामले की विस्तृत समीक्षा करेगा।

Delhi Excise Policy: केजरीवाल और सिसोदिया की रिहाई पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने पुरजोर तरीके से मांग की कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को रिहा करने के आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने सीबीआई को झटका देते हुए रिहाई के आदेश पर स्टे लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल रिहाई की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाना जरूरी है। यह राहत केजरीवाल और उनकी टीम के लिए एक बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है।

Delhi Excise Policy: सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच वाले आदेश पर लगी रोक

एक तरफ जहां आरोपियों को राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट ने सीबीआई की एक अन्य आपत्ति को स्वीकार कर लिया। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Departmental Action) शुरू करने का निर्देश दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस विशिष्ट आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही, जस्टिस ने यह भी निर्देश दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मामले की सुनवाई तब तक टाल दी जाए, जब तक कि हाईकोर्ट सीबीआई की रिवीजन अर्जी पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता।

तुषार मेहता का पक्ष: “यह राजधानी के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दिल्ली के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और देश के लिए बेहद शर्मनाक है। उन्होंने दलील दी कि जांच पूरी तरह से ‘साइंटिफिक’ तरीके से की गई थी और साजिश का हर सिरा आपस में जुड़ा हुआ है। मेहता ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की इस प्रक्रिया में हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में धन का लेन-देन हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही आरोपी पक्ष इसे राजनीतिक बदले की भावना बताए, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज गवाहों के बयान सच्चाई बयां करते हैं।

100 करोड़ की रिश्वत और गोवा चुनाव के लिए हवाला का इस्तेमाल

सीबीआई ने अदालत को बताया कि उनके पास धारा 164 के तहत दर्ज ऐसे बयान और साक्ष्य हैं जो स्पष्ट करते हैं कि साजिश कैसे रची गई। एजेंसी के मुताबिक, विजय नायर नामक व्यक्ति, जो एक राजनीतिक दल का कम्युनिकेशन इंचार्ज था, इस पूरी साजिश का केंद्र था। सीबीआई का आरोप है कि नीति में बदलाव और अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले लगभग 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी। जांच के अनुसार, इसमें से 44.50 करोड़ रुपये हवाला नेटवर्क के माध्यम से गोवा भेजे गए थे, जिसका उपयोग पार्टी के चुनाव प्रचार में किया गया था।

600 पन्नों के फैसले पर सीबीआई की आपत्तियाँ

SG तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने हजारों ईमेल, व्हाट्सएप चैट और दस्तावेजी सबूत पेश किए थे। उनके अनुसार, इतने व्यापक और जटिल मामले में ट्रायल कोर्ट ने मात्र 12 दिनों के भीतर 600 पन्नों का फैसला सुना दिया। मेहता ने तर्क दिया कि ‘त्वरित न्याय’ एक अच्छा लक्ष्य है, लेकिन न्याय की गुणवत्ता और गहराई से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि साजिशें कभी खुलेआम नहीं रची जातीं, उन्हें कड़ियों को जोड़कर साबित करना होता है, जिसे निचली अदालत ने नजरअंदाज किया।

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