Kuwait Airport drone attack: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने रविवार सुबह एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र के कई देशों पर किए गए समन्वित ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पूरे इलाके में युद्ध की दहशत फैला दी है। कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन जैसे प्रमुख राष्ट्रों ने इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में आसमान में जलते हुए ड्रोन और इंटरसेप्शन की तस्वीरें साफ देखी जा सकती हैं। इन हमलों ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दी है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और कूटनीतिक स्थिरता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
Kuwait Airport drone attack: कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला: ईंधन डिपो को बनाया गया निशाना
कुवैत की सेना द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रविवार की तड़के एक आत्मघाती ड्रोन ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ‘फ्यूल स्टोरेज’ (ईंधन भंडारण केंद्र) को निशाना बनाने की कोशिश की। यह हमला बेहद संवेदनशील इलाके में किया गया, जिससे बड़े जान-माल के नुकसान का खतरा था। हालांकि, कुवैती सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को और बिगड़ने से रोक लिया। इस हमले के बाद पूरे एयरपोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और देश की सभी प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां ‘हाई अलर्ट’ पर हैं।
Kuwait Airport drone attack: सऊदी अरब की सुरक्षा प्रणाली सक्रिय: 21 ड्रोन को हवा में ही किया नष्ट
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने भी रविवार सुबह एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि देश को बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। सऊदी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) ने अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए रविवार सुबह तक कम से कम 21 हमलावर ड्रोन को बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार, इन ड्रोन का लक्ष्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे थे। सऊदी अरब ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुँच जाते, तो ऊर्जा क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता था।
बहरीन के मिना सलमान सीपोर्ट में लगी आग: गृह मंत्रालय ने लगाया गंभीर आरोप
सऊदी और कुवैत के मुकाबले बहरीन में हालात अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं। किंग फहद कॉजवे के नजदीक स्थित मिना सलमान सीपोर्ट के एक हिस्से में भीषण आग लगने की खबर है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने प्राथमिक जांच के बाद स्पष्ट रूप से इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय का कहना है कि यह आग ईरानी ड्रोन हमले के परिणामस्वरूप लगी है। आपातकालीन सेवाएं और अग्निशमन दल अभी भी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरे बंदरगाह क्षेत्र की घेराबंदी कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
ईरानी राष्ट्रपति की ‘माफी’ और सेना का पलटवार: दोहरी नीति का संकट
इन हमलों का समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद चौंकाने वाला है। महज 24 घंटे पहले ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खाड़ी देशों से पिछले हमलों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने पड़ोसी मुल्कों को आश्वासन दिया था कि ईरान उन पर हमला नहीं करेगा। हालांकि, ईरान की सेना (IRGC) के कट्टरपंथियों ने उनके इस बयान को दरकिनार कर दिया। राष्ट्रपति कार्यालय को बाद में सफाई देनी पड़ी कि उनका आशय केवल उन देशों से था जो अमेरिकी हमलों में ईरान के खिलाफ नहीं खड़े होंगे। यह विरोधाभास दर्शाता है कि ईरान में सत्ता और सेना के बीच गहरे मतभेद हैं, जिसका खामियाजा अब पूरा खाड़ी क्षेत्र भुगत रहा है।
