India US Trade Deal : अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्तों में एक नया और सकारात्मक मोड़ आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने टैरिफ प्लान को अवैध घोषित किए जाने के बाद, ट्रंप प्रशासन ने अब सभी आयातक देशों पर एक समान 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या भारत के साथ हुई हालिया ‘ट्रेड डील’ के तहत निर्धारित 18 फीसदी टैरिफ बना रहेगा या उसे भी कम किया जाएगा। व्हाइट हाउस ने अब स्पष्ट कर दिया है कि भारत को भी इस नए वैश्विक आदेश का लाभ मिलेगा और उस पर अब प्रस्तावित 18 फीसदी के बजाय केवल 10 फीसदी ड्यूटी ही लागू होगी।
India US Trade Deal : सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और ट्रंप की नई रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक कड़े फैसले से हुई। अदालत ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के पहले के भारी-भरकम टैरिफ प्लान को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। हालांकि, हार न मानते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही घंटों के भीतर ‘इंपोर्ट सरचार्ज’ की नई घोषणा कर दी। ट्रंप ने ऐलान किया कि वह 24 फरवरी की आधी रात से अमेरिका में आने वाली सभी वस्तुओं पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाएंगे। यह नया नियम ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को कानूनी सीमाओं के भीतर लागू करने की एक कोशिश माना जा रहा है।
India US Trade Deal : भारत के लिए व्यापारिक लाभ: 18% से गिरकर 10% पर पहुंची दर
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत भारत ने रूस से तेल की खरीद कम करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों को खरीदने पर सहमति जताई थी। इसके बदले में अमेरिका भारत पर लगने वाले 25 फीसदी के भारी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी करने के लिए तैयार हुआ था। लेकिन अब ट्रंप के नए वैश्विक आदेश ने भारतीय निर्यातकों की लॉटरी लगा दी है। यह दर सीधे 10 प्रतिशत पर आ गई है, जिसका सीधा मतलब है कि अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय कारोबारियों की लागत काफी कम हो जाएगी और उनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे।
व्हाइट हाउस की पुष्टि: पुराने समझौतों पर भारी पड़ेगा नया नियम
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही ट्रंप प्रशासन के साथ अलग-अलग टैरिफ दरें तय कर ली थीं, उन पर भी अब नया 10 प्रतिशत का नियम ही लागू होगा। यानी भले ही भारत पहले 18 फीसदी ड्यूटी देने के लिए राजी हो गया था, लेकिन मौजूदा कानूनी और प्रशासनिक बदलावों के कारण अब उसे अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। यह निर्णय भारत समेत उन सभी प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए सुखद है जो अमेरिका के साथ लंबी व्यापारिक बातचीत में उलझे हुए थे।
पीएम मोदी और ट्रंप की ‘स्मार्ट’ डील: ‘हमने बाजी पलट दी है’
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब डोनाल्ड ट्रंप से भारत के साथ हुए समझौते के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने खास अंदाज में प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ डील पक्की है। वह एक महान व्यक्ति और मित्र हैं, लेकिन सच तो यह है कि वह पिछले अमेरिकी नेताओं की तुलना में कहीं अधिक स्मार्ट साबित हुए और हमें नुकसान पहुंचा रहे थे। अब हमने इस डील को फ्लिप (पलट) कर दिया है। अब हम उन्हें टैरिफ नहीं दे रहे, बल्कि वे हमें दे रहे हैं।” ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वे इस समझौते को अमेरिका के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं।
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